घर में सीढ़ियां बनवाते समय रखें इन वास्तु नियमों का ध्यान, तभी आएगी सुख-समृद्धि
वास्तु शास्त्र में घर की हर दिशा और निर्माण का विशेष महत्व बताया गया है. इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण हिस्सा है घर की सीढ़ियां. सही दिशा में बनी सीढ़ियां परिवार के सदस्यों के जीवन में सफलता, सुख-समृद्धि और सकारात्मकता लाती हैं, जबकि गलत दिशा में बनी सीढ़ियां कई प्रकार की परेशानियों का कारण बन सकती हैं.
घर में सीढ़ियां बनवाते समय रखें इन वास्तु नियमों का ध्यान
अगर आप नया घर बनवा रहे हैं या घर में सीढ़ियों का निर्माण करवाने की योजना बना रहे हैं, तो केवल डिजाइन और मजबूती ही नहीं, बल्कि वास्तु नियमों का ध्यान रखना भी जरूरी माना जाता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार सीढ़ियां घर की ऊर्जा को प्रभावित करती हैं. गलत दिशा या गलत स्थान पर बनी सीढ़ियां आर्थिक परेशानियों, तनाव और तरक्की में रुकावट का कारण बन सकती हैं.
वास्तु विशेषज्ञों के मुताबिक सीढ़ियां बनवाते समय उनकी दिशा, संख्या और स्थान पर विशेष ध्यान देना चाहिए. आमतौर पर दक्षिण, पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम दिशा में सीढ़ियां शुभ मानी जाती हैं. वहीं उत्तर-पूर्व दिशा में सीढ़ियां बनवाने से बचने की सलाह दी जाती है. मान्यता है कि सही वास्तु नियमों के अनुसार बनी सीढ़ियां घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और सफलता के मार्ग खोलने में मदद करती हैं.
किस दिशा में बनवाएं सीढ़ियां
- वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की सीढ़ियां दक्षिण-पश्चिम दिशा यानी नैऋत्य कोण में बनवाना सबसे शुभ माना जाता है. इस दिशा में सीढ़ियां बनने से घर का भार संतुलित रहता है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है. साथ ही परिवार के लोगों का स्वास्थ्य भी अच्छा बना रहता है. यदि किसी कारणवश इस दिशा में सीढ़ियां बनाना संभव न हो, तो दक्षिण या पश्चिम दिशा में भी सीढ़ियों का निर्माण कराया जा सकता है. इन दिशाओं में बनी सीढ़ियां भी सामान्य रूप से शुभ फल प्रदान करती हैं.
- जगह की कमी होने पर वायव्य (उत्तर-पश्चिम) या आग्नेय (दक्षिण-पूर्व) दिशा में भी सीढ़ियां बनाई जा सकती हैं, लेकिन इससे बच्चों की शिक्षा और मानसिक स्थिति पर कुछ नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना रहती है.
इस दिशा में भूलकर भी न बनवाएं सीढ़ियां
- घर का मध्य भाग, जिसे वास्तु में ब्रह्म स्थान कहा जाता है, बेहद संवेदनशील माना जाता है. इस स्थान पर सीढ़ियां बनवाना शुभ नहीं माना जाता. ऐसा करने से घर में तनाव, मानसिक अशांति और कई तरह की समस्याएं बढ़ सकती हैं. वहीं ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को वास्तु में सबसे पवित्र और हल्का क्षेत्र माना गया है.
- इस दिशा में सीढ़ियां बनवाने से धन हानि, करियर में रुकावट, कर्ज बढ़ना और परिवार में परेशानियां आने की आशंका रहती है. बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है.
सीढ़ियों से जुड़े महत्वपूर्ण वास्तु नियम
- वास्तु के अनुसार सीढ़ियों की संख्या हमेशा विषम यानी ऑड नंबर में होनी चाहिए. जैसे 5, 7, 9, 11, 15 या 17 सीढ़ियां शुभ मानी जाती हैं.
- सीढ़ियों की शुरुआत और अंत में दरवाजा होना अच्छा माना जाता है, लेकिन नीचे का दरवाजा ऊपर के दरवाजे के बराबर या उससे थोड़ा बड़ा होना चाहिए.
- एक सीढ़ी से दूसरी सीढ़ी के बीच लगभग 9 इंच का अंतर सबसे उपयुक्त माना गया है.
- सीढ़ियां इस प्रकार बनाई जानी चाहिए कि ऊपर चढ़ते समय व्यक्ति का मुख दक्षिण या पश्चिम दिशा की ओर रहे. वहीं नीचे उतरते समय चेहरा उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ होना चाहिए.
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- सीढ़ियों के नीचे रसोईघर, पूजा घर, शौचालय या स्टोर रूम नहीं बनवाना चाहिए. इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और परिवार को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.
- गोलाकार या घुमावदार सीढ़ियां वास्तु में अधिक शुभ नहीं मानी जातीं. यदि ऐसी सीढ़ियां बनवाना जरूरी हो, तो उनका घुमाव क्लॉकवाइज यानी दाईं ओर होना चाहिए.
- खुली सीढ़ियां वास्तु के अनुसार उचित नहीं मानी जातीं. इसलिए उनके ऊपर शेड या छत अवश्य होनी चाहिए.
- सीढ़ियों के नीचे का स्थान जितना संभव हो खुला रखना चाहिए. मान्यता है कि इससे घर के बच्चों को शिक्षा और करियर में सफलता प्राप्त होती है.




