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क्यों की जाती है चंद्रदेव की उपासना और ज्योतिष में क्या है चंद्रमा का महत्व? समझें 7 Points में

ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन और भावनाओं का स्वामी माना गया है, जिसका सीधा असर मानसिक स्थिति पर पड़ता है. चंद्रदेव की पूजा से मानसिक शांति, संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है.

क्यों की जाती है चंद्रदेव की उपासना और ज्योतिष में क्या है चंद्रमा का महत्व? समझें 7 Points में
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( Image Source:  Chait GPT )
State Mirror Astro
By: State Mirror Astro3 Mins Read

Updated on: 3 May 2026 7:30 AM IST

वैदिक ज्योतिष में नौ प्रमुख ग्रहों का वर्णन मिलता है. सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु. इनमें चंद्रमा को सबसे तेज गति से चलने वाला ग्रह माना गया है, जो लगभग ढाई दिन में एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है. इसी वजह से इसका प्रभाव व्यक्ति के मन और भावनाओं पर बहुत जल्दी और गहराई से पड़ता है.

चंद्रमा से जुड़ी पौराणिक कथा

पुराणों के अनुसार, सृष्टि निर्माण के समय ब्रह्मा जी ने अपने मानस पुत्र ऋषि अत्रि को उत्पन्न किया. ऋषि अत्रि का विवाह अनसूया से हुआ और उनके तीन पुत्र हुए. दुर्वासा, दत्तात्रेय और सोम (चंद्रमा). चंद्रदेव का विवाह दक्ष प्रजापति की 27 कन्याओं से हुआ, जिन्हें हम 27 नक्षत्रों के रूप में जानते हैं. चंद्रमा जब इन सभी नक्षत्रों की परिक्रमा पूरी करता है, तब एक माह का चक्र पूर्ण होता है.

मन और शांति का कारक है चंद्रमा

ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का स्वामी माना गया है. यह व्यक्ति की भावनाओं, सोचने की क्षमता और मानसिक संतुलन को नियंत्रित करता है. यदि कुंडली में चंद्रमा मजबूत स्थिति में हो, तो व्यक्ति शांत, संतुलित और सकारात्मक रहता है. वहीं कमजोर चंद्रमा मानसिक तनाव, अस्थिरता और भ्रम पैदा कर सकता है. पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की ऊर्जा सबसे अधिक प्रभावी मानी जाती है. इस दिन उसकी पूजा और ध्यान करने से मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और सकारात्मकता में वृद्धि होती है.

चंद्रमा की पूजा क्यों की जाती है?

चंद्रमा की उपासना के पीछे कई आध्यात्मिक और ज्योतिषीय कारण बताए गए हैं. चंद्रमा मन और भावनाओं को नियंत्रित करता है, इसलिए इसकी पूजा मानसिक स्थिरता के लिए की जाती है. हमारे शरीर में भौंहों के बीच का स्थान चंद्रमा का केंद्र माना जाता है, इसलिए महिलाएं यहां बिंदी लगाती हैं. भगवान शिव के मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित है, जो उनके संतुलित और योगी स्वरूप का प्रतीक है. चंद्रमा को औषधियों और वनस्पतियों का स्वामी भी माना गया है. इसकी शीतल किरणें प्रकृति और मन दोनों पर सकारात्मक प्रभाव डालती हैं. व्रत-त्योहारों में, विशेषकर करवा चौथ जैसे पर्वों में, चंद्र दर्शन का विशेष महत्व होता है, जो दांपत्य प्रेम और समर्पण का प्रतीक है. जो व्यक्ति चंद्रमा में परम तत्व को समझकर उसकी उपासना करता है, वह जीवन में सुख, शांति और दीर्घायु प्राप्त करता है.

कुंडली में चंद्रमा को मजबूत करने के आसान उपाय

  1. -सुबह के समय ध्यान करना चंद्रमा को मजबूत करता है. इससे मन शांत होता है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है.
  2. -पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी में बैठकर ध्यान करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है. इससे मानसिक तनाव कम होता है.
  3. -चंद्रमा का संबंध माता से भी होता है. मां का आदर और आशीर्वाद लेने से चंद्र दोष कम होते हैं.
  4. -चांदी को चंद्रमा से जोड़ा जाता है. चांदी के आभूषण पहनना या चांदी के बर्तन में पानी पीना शुभ माना जाता है.
  5. -सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा करें. शिवलिंग पर जल, दूध और गंगाजल से अभिषेक करने से चंद्रमा के अशुभ प्रभाव कम होते हैं.
  6. -पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करना या स्नान के पानी में गंगाजल मिलाना भी लाभकारी होता है.
  7. -सोमवार को सफेद कपड़े पहनना, चावल या खीर का दान करना चंद्रमा को प्रसन्न करता है.
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