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आखिर क्यों Bryan Johnson अपनी गर्लफ्रेंड के साथ नहीं सोते? बताया इसका कारण, क्या अलग सोने से बेहतर होते हैं रिश्ते

Bryan Johnson के मुताबिक, रिश्ते में प्यार बनाए रखने के लिए हर रात एक ही बेड शेयर करना जरूरी नहीं है. उनका ‘अलग सोने’ का फॉर्मूला नींद बेहतर रखने और दिनभर मूड अच्छा रखने से जुड़ा है.

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( Image Source:  instagram-@bryanjohnson_ )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत4 Mins Read

Updated on: 21 Aug 2026 2:08 PM IST

आमतौर पर कपल्स के लिए एक ही बेड पर सोना प्यार और नजदीकी का हिस्सा माना जाता है, लेकिन टेक एंटरप्रेन्योर Bryan Johnson का तरीका बिल्कुल अलग है. वह अपनी गर्लफ्रेंड Kate Tolo के साथ अलग बेड पर सोते हैं और दोनों के घर भी अलग हैं. ब्रायन की वजह रोमांस से दूरी नहीं, बल्कि नींद की क्वालिटी है. उनका मानना है कि अगर पार्टनर के हिलने-डुलने, करवट बदलने या रात में जागने से आपकी नींद बार-बार टूटती है, तो इसका असर सेहत पर पड़ सकता है.

अपने इस फैसले को समझाने के लिए ब्रायन ने नींद से जुड़ी कुछ रिसर्च का जिक्र किया. उन्होंने 55 कपल्स पर हुई एक स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि पार्टनर की वजह से रात में कई बार नींद टूट सकती है. हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि रिसर्च में ऐसा कहीं नहीं कहा गया है कि कपल को अलग सोना चाहिए.

Bryan Johnson ने अलग सोने की क्या वजह बताई?

Bryan Johnson का मानना है कि अच्छी नींद शरीर और दिमाग के लिए बेहद जरूरी है. अगर पार्टनर की वजह से रात में बार-बार नींद टूटती है तो इसका असर अगले दिन के मूड, ऊर्जा और काम करने की क्षमता पर पड़ सकता है. इसलिए उनका तर्क है कि दोनों लोग अगर आराम से सोएं तो इससे उनकी सेहत के साथ-साथ रिश्ते पर भी अच्छा असर पड़ सकता है. हालांकि, अलग बेड का मतलब यह नहीं है कि दोनों के बीच नजदीकी नहीं है. Johnson ने बताया है कि वे साथ में बेड पर समय बिताते हैं, लेकिन पूरी रात एक साथ सोना जरूरी नहीं मानते.

क्या कहती है स्टडी?

अपने इस फैसले को समझाने के लिए ब्रायन ने नींद से जुड़ी कुछ रिसर्च का जिक्र किया. उन्होंने 55 कपल्स पर हुई एक स्टडी का हवाला देते हुए बताया कि पार्टनर की वजह से रात में कई बार नींद टूट सकती है. हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि रिसर्च पूरी तरह अलग सोने के पक्ष में नहीं है. वहीं, दूसरी ओर12 कपल्स पर हुई एक दूसरी स्टडी में साथ सोने पर REM यानी सपनों वाली नींद करीब 10 फीसदी ज्यादा और दोनों पार्टनर्स के नींद के पैटर्न में बेहतर तालमेल देखा गया. यानी हर कपल के लिए एक ही नियम सही नहीं हो सकता है. असली बात यह है कि दोनों को किस तरह सोने पर अच्छी नींद मिलती है.

महिलाओं के लिए क्या कहती है स्टडी?

10 जोड़ों पर की गई एक स्टडी में हर व्यक्ति कम से कम 10 रातें अकेले और 10 रातें साथ सोया. एक्टिग्राफी और खुद की रेटिंग, दोनों के आधार पर पाया गया कि पार्टनर के साथ बिस्तर पर सोने पर महिलाओं की नींद काफी खराब रही. वहीं, पुरुषों ने बताया कि उन्हें बेहतर नींद आई,

क्या साथ सोने के फायदे भी हैं?

लगभग 1,000 अडल्ट्स पर किए गए एक सर्वे में पाया गया कि अकेले सोने की तुलना में पार्टनर के साथ एक ही बिस्तर पर सोने से अनिद्रा और थकान कम होती है, साथ ही नींद ज़्यादा आती है और मेंटल हेल्थ भी बेहतर रहती है.

क्या है ‘Sleep Divorce’?

अलग कमरे या अलग बेड पर सोने के चलन को आम तौर पर ‘Sleep Divorce’ कहा जाता है. नाम भले ही थोड़ा अजीब लगे, लेकिन इसका मतलब रिश्ते का टूटना नहीं होता. इसका मकसद सिर्फ दोनों पार्टनर्स को बेहतर नींद देना है. खर्राटे, अलग शेड्यूल, रात में ज्यादा हलचल या नींद बार-बार टूटने जैसी वजहों से कई कपल यह तरीका अपनाते हैं. अच्छी नींद मिलने से मूड और धैर्य बेहतर रह सकता है, जिसका फायदा रिश्ते को भी मिल सकता है.

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