पीरियड ब्लड को फ्रीज करने से क्या होता है? किसने और क्यों किया ऐसा, FAQ से जानें सबकुछ
पीरियड्स के दौरान निकलने वाला खून सिर्फ खून नहीं होता. इसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत से निकले टिश्यू, इम्यून सेल्स, हार्मोन, प्रोटीन और दूसरे जैविक तत्व भी मौजूद होते हैं. यही वजह है कि वैज्ञानिक अब इसे मेडिकल रिसर्च के लिए उपयोगी मान रहे हैं.
क्या पीरियड ब्लड को किया जा सकता है फ्रीज
पीरियड ब्लड को आमतौर पर मेडिकल वेस्ट समझा जाता है, लेकिन वैज्ञानिकों की दिलचस्पी अब इसमें मौजूद सेल्स, टिश्यू, हार्मोन और दूसरे जैविक संकेतों को समझने में बढ़ रही है. इसी वजह से पीरियड ब्लड के सैंपल को बेहद कम तापमान पर सुरक्षित रखकर रिसर्च की जा सकती है.
हाल ही में टेक एंटरप्रेन्योर ब्रायन जॉनसन ने बताया कि उन्होंने अपनी गर्लफ्रेंड का करीब 10 मिलीलीटर पीरियड ब्लड 80 डिग्री सेल्सियस पर फ्रीज करके रखा है. एंटरप्रेन्योर के मुताबिक, इस सैंपल के जरिए बीमारी से जुड़े साइन, माइक्रोप्लास्टिक्स, PFAS और दूसरे एलिमेंट काे स्टडी करने में मदद मिल सकती है.
हां, रिसर्च के लिए पीरियड ब्लड के सैंपल को फ्रीज करके सेफ रखा जा सकता है. वैज्ञानिक बायोलॉजिकल सैंपल को बहुत कम तापमान पर स्टोर करते हैं, ताकि उसमें मौजूद सेल्स और दूसरे तत्वों का आगे स्टडी किया जा सके. लेकिन घर के सामान्य फ्रीजर में पीरियड ब्लड को रख देना और मेडिकल रिसर्च के लिए सैंपल को सुरक्षित रखना एक जैसी बात नहीं है.
ब्रायन जॉनसन ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि उनकी गर्लफ्रेंड का पीरियड ब्लड -80°C के फ्रीजर में रखा गया है. उनका कहना है कि वह इसमें मौजूद कंटेंट का इस्तेमाल हेल्थ से जुड़ी जानकारी समझने के लिए करना चाहते हैं. उन्होंने इसे महिलाओं की सेहत और गर्भाशय से जुड़ी जानकारी हासिल करने का संभावित तरीका बताया.
पीरियड ब्लड में नॉर्मल ब्लड के अलावा गर्भाशय की अंदरूनी परत के सेल्स, इम्यून सेल्स, म्यूकस और दूसरे ऑर्गैनिक चीजें मिल सकते हैं. इसमें हार्मोन, प्रोटीन और जेनेटिक इलिमेंट्स से जुड़े साइन भी पाए जा सकते हैं. इसी वजह से वैज्ञानिक इसे रिसर्च के लिहाज से दिलचस्प मान रहे हैं.
पीरियड ब्लड यूट्रस की अंदरूनी परत से निकलने वाले पदार्थों को साथ लेकर आता है. इसलिए वैज्ञानिक यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इसमें मौजूद साइन से गर्भाशय और रिप्रोडक्टिव हेल्थ के बारे में कितनी जानकारी मिल सकती है.
इस दिशा में रिसर्च चल रही है. साइंटिस्ट पीरियड ब्लड में मौजूद कुछ प्रोटीन, इम्यून सेल्स और दूसरे बायोमार्कर को स्टडी कर रहे हैं. भविष्य में इनके जरिए एंडोमेट्रियोसिस की पहचान आसान हो सकती है, लेकिन फिलहाल इसे बीमारी की पक्की जांच के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाता है.
कुछ शुरुआती स्टडी में पीरियड ब्लड में ऐसे जैविक संकेतों की जांच की गई है, जिनका कनेक्शन मेटाबॉलिक हेल्थ और इंसुलिन से जुड़े बदलावों से हो सकता है. हालांकि, यह अभी रिसर्च का विषय है. इसलिए पीरियड ब्लड के आधार पर किसी व्यक्ति को डायबिटीज होने या न होने का कन्क्लूजन नहीं निकाला जा सकता.
पीरियड ब्लड में हार्मोन और दूसरे बायोलॉजिकल साइन मौजूद हो सकते हैं, इसलिए वैज्ञानिक इसका इस्तेमाल मासिक चक्र, हार्मोनल बदलाव और प्रजनन स्वास्थ्य को समझने के लिए कर रहे हैं. भविष्य में यह फर्टिलिटी से जुड़ी कुछ समस्याओं की निगरानी में मददगार हो सकता है, लेकिन अभी इसे नियमित मेडिकल टेस्ट नहीं माना जाता.
इस तरीके का सबसे बड़ा संभावित फायदा यह माना जा रहा है कि सैंपल बिना किसी सर्जिकल प्रक्रिया के हासिल किया जा सकता है. अगर भविष्य में शोध सफल होते हैं, तो बार-बार सैंपल लेकर शरीर में होने वाले बदलावों को समझना आसान हो सकता है. इससे महिलाओं की उन हेल्थ समस्याओं पर रिसर्च बढ़ सकती है, जिनकी पहचान में अक्सर समय लगता है.
फिलहाल डॉक्टरों की ओर से ऐसा कोई सुझाव नहीं दिया जाता कि हर महिला अपना पीरियड ब्लड फ्रीज करके रखे. इसे अभी मुख्य रूप से रिसर्च और वैज्ञानिक जांच के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. ब्रायन जॉनसन ने भी एक्सपेरिमेंट के तौर पर ऐसा किया है. अगर पीरियड्स या प्रेग्नेंसी से जुड़ी कोई परेशानी हो, तो खुद से कोई तरीका अपनाने के बजाय डॉक्टर की सलाह और जरूरी मेडिकल जांच करवाना बेहतर है.




