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आकाश तीर से आकाश तरंग तक, भारत ने तैयार किया ‘डिटेक्ट-ट्रैक-न्यूट्रलाइज’ एयर डिफेंस नेटवर्क; ड्रोन से हमला करने पर मिलेगा करारा जवाब

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ड्रोन वॉरफेयर के बढ़ते खतरे के बीच भारत अपनी काउंटर-ड्रोन और लेयर्ड एयर डिफेंस क्षमता को तेजी से मजबूत कर रहा है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ड्रोन और मिसाइल हमलों का सामना करने के बाद भारत ने ड्रोन खतरे से निपटने के लिए अपने सुरक्षा नेटवर्क को और मजबूत करने पर जोर दिया है. ‘आकाश तीर’ को एयर डिफेंस नेटवर्क का अहम हिस्सा बताया गया है, जो आसमान में मौजूद खतरों को डिटेक्ट और ट्रैक करने में मदद करता है. इसके साथ ‘आकाश तरंग’ जैसी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमता को भी आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे ड्रोन के कम्युनिकेशन और कंट्रोल को बाधित करने की कोशिश की जा सकती है. 3 जुलाई 2026 को रक्षा अधिग्रहण परिषद ने सेना के लिए एंटी-यूएवी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम समेत कई एयर डिफेंस प्रस्तावों को मंजूरी दी. भारत की रणनीति सिर्फ मिसाइल से ड्रोन गिराने की नहीं, बल्कि डिटेक्ट, ट्रैक, इलेक्ट्रॉनिकली न्यूट्रलाइज और जरूरत पड़ने पर हार्ड-किल की कई परतों वाली है. सैकड़ों ड्रोन के एक साथ हमले यानी ड्रोन स्वॉर्म के खतरे से निपटने के लिए रडार, जैमर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और काउंटर-ड्रोन हथियारों को एक नेटवर्क में जोड़ने पर जोर है. इसी दिशा में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने करीब ₹52,000 करोड़ के पूंजीगत रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जिससे भारत की काउंटर-यूएएस और लेयर्ड एयर डिफेंस क्षमता बढ़ने की उम्मीद है.