Begin typing your search...

दिल्ली-एनसीआर में अचानक क्यों बढ़ गए सर्दी, जुकाम और बुखार के मरीज? डॉक्टर ने बताया कॉमन कोल्ड और स्वाइन फ्लू में अंतर

डॉ. मीरा पाठक के मुताबिक, इस समय कॉमन कोल्ड के अलावा स्वाइन फ्लू के मरीज भी सामने आ रहे हैं. दोनों बीमारियों के कई लक्षण मिलते-जुलते होने की वजह से आम लोगों के लिए इनके बीच फर्क समझना आसान नहीं होता.

दिल्ली-एनसीआर में अचानक क्यों बढ़ गए सर्दी, जुकाम और बुखार के मरीज? डॉक्टर ने बताया कॉमन कोल्ड और स्वाइन फ्लू में अंतर
X
मोहम्मद रज़ा
मोहम्मद रज़ा4 Mins Read

Updated on: 9 Sept 2026 1:59 PM IST

दिल्ली-एनसीआर में इन दिनों लगभग हर घर में सर्दी, जुकाम और बुखार से पीड़ित मरीज देखने को मिल रहे हैं.मौसम में बदलाव के साथ अचानक बढ़े इन मामलों को लेकर हमने नोएडा के भंगेल स्थित सीएचसी अस्पताल में कार्यरत डॉ. मीरा पाठक से बातचीत की.उन्होंने बताया कि मौसम बदलने के दौरान तापमान में उतार-चढ़ाव, बढ़ती नमी और वायरस में होने वाले बदलाव संक्रमण के मामलों को बढ़ा सकते हैं.

डॉ. मीरा पाठक के मुताबिक, मौसम बदलने के दौरान मुख्य रूप से तीन फैक्टर काम करते हैं.पहला और सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर तापमान में उतार-चढ़ाव है. तापमान में अचानक बदलाव होने पर हमारे रेस्पिरेटरी ट्रैक यानी श्वसन तंत्र के प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र प्रभावित हो सकते हैं. उन्होंने बताया कि दूसरा फैक्टर ह्यूमिडिटी यानी नमी है. नमी बढ़ने के साथ कुछ श्वसन संबंधी वायरस के संक्रमण और ट्रांसमिशन की संभावना बढ़ सकती है. तीसरा कारण रेस्पिरेटरी वायरस में समय के साथ होने वाले जेनेटिक बदलाव हैं. इन्फ्लूएंजा जैसे वायरस में बदलाव के कारण शरीर की पहले से मौजूद प्रतिरोधक क्षमता कम प्रभावी हो सकती है, जिससे संक्रमण के मामले बढ़ने लगते हैं.

कोल्ड और स्वाइन फ्लू में अंतर

डॉ. मीरा पाठक ने बताया कि इन दिनों कॉमन कोल्ड के साथ-साथ स्वाइन फ्लू के मामले भी सामने आ रहे हैं. हालांकि दोनों में अंतर करना आम लोगों के लिए आसान नहीं होता, क्योंकि कॉमन कोल्ड और स्वाइन फ्लू के कई लक्षण एक जैसे हो सकते हैं. उन्होंने बताया कि दोनों के बीच अंतर करने का सबसे आसान तरीका टेस्टिंग है. हालांकि लक्षणों के आधार पर भी कुछ मामलों में अंतर का अंदाजा लगाया जा सकता है. अगर किसी व्यक्ति में अचानक लक्षण शुरू हों, तेज बुखार, शरीर का तापमान काफी बढ़ जाना, तेज सिरदर्द और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए.ऐसे मामलों में तुरंत अस्पताल जाकर डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है.

किसे है सबसे ज्यादा जोखिम?

डॉ. मीरा पाठक के अनुसार कुछ लोग संक्रमण की स्थिति में अधिक जोखिम में हो सकते हैं. इनमें बुजुर्ग लोग, गर्भवती महिलाएं, पांच साल से कम उम्र के बच्चे, पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोग, कमजोर इम्यूनिटी वाले मरीज शामिल हैं. ऐसे लोगों को संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और समय पर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए. डॉक्टर ने बताया कि कई मामलों में मरीज के लक्षणों के आधार पर इलाज किया जाता है और जरूरत पड़ने पर एंटीवायरल ट्रीटमेंट शुरू किया जाता है. हालांकि हर मरीज को एंटीवायरल दवा की जरूरत नहीं होती. यदि मरीज हाई रिस्क ग्रुप में आता है या उसके लक्षण गंभीर हैं तो डॉक्टर की सलाह पर स्वाइन फ्लू की जांच कराई जा सकती है.

कैसे रखें खुद का ध्यान?

डॉ. मीरा पाठक ने बताया कि संक्रमण से बचाव के लिए सावधानी बेहद जरूरी है. यदि किसी व्यक्ति में सर्दी, जुकाम या बुखार जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो उसे मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए और अन्य लोगों से उचित दूरी बनाकर रखनी चाहिए. उन्होंने कहा कि हल्के मामलों में पर्याप्त पानी पीना, शरीर को हाइड्रेट रखना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज करना जरूरी है. कुछ मामलों में भाप लेने और डॉक्टर की सलाह पर पैरासिटामोल या सिट्रिजिन जैसी दवाओं से लक्षणों में राहत मिल सकती है.

बुखार ठीक होने और शरीर की स्थिति सामान्य होने के बाद ही व्यक्ति अपनी सामान्य गतिविधियां शुरू कर सकते ह.डॉक्टर ने खासतौर पर सलाह दी कि अस्पताल या भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाते समय मास्क का इस्तेमाल करें.घर में यदि किसी व्यक्ति को बुखार या फ्लू जैसे लक्षण हैं तो उसके साथ उचित दूरी बनाए रखें और संक्रमण से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियां बरतें.

अगला लेख