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क्या सही CPR और समय पर अस्पताल पहुंचने से बच सकती थी नाना पाटेकर की जान? डॉक्टर ने कार्डियक अरेस्ट को पूरा समझाया

नाना पाटेकर की मौत के बाद कार्डियक अरेस्ट लेकर फिर चर्चा शुरू हो गई है. डॉक्टरों के मुताबिक, ऐसे मामलों में शुरुआती मिनट बेहद अहम होते हैं और तुरंत सही CPR व समय पर अस्पताल पहुंचने से मरीज की जान बचाई जा सकती है.

Nana Patekar
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( Image Source:  ANI )
मोहम्मद रज़ा
मोहम्मद रज़ा4 Mins Read

Updated on: 8 Oct 2026 2:38 PM IST

अभिनेता नाना पाटेकर की मौत के बाद एक बार फिर कार्डियक अरेस्ट और सडन डेथ को लेकर चर्चा तेज हो गई है. दरअसल नाना पाटेकर की देर रात 2:30 बजे से तबियत खराब होने लगी थी और वह करीब 4:20 से 4:30 बजे के बीच हॉस्पिटल पहुंचे. इस पर डॉक्टर का कहना है कि अचानक होने वाली मौत के मामलों के बीच डॉक्टरों का कहना है कि कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं. समय रहते सही तरीके से सीपीआर देने और मरीज को अस्पताल पहुंचाने से जान बचाने की संभावना बढ़ सकती है.

आईएमए नोएडा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एनके शर्मा ने कार्डियक अरेस्ट को लेकर आसानी से समझाया उन्होंने बताया कि हमारे हार्ट में एक इलेक्ट्रिक सिस्टम होता है, जो दिल की धड़कनों को नियंत्रित करता है. जब दिल की धड़कन अचानक बहुत अनियंत्रित हो जाती है या सामान्य से बहुत कम हो जाती है, तो कार्डियक अरेस्ट की स्थिति पैदा हो सकती है. इसमें हार्ट की पंपिंग अचानक बंद हो जाती है और शरीर में ब्लड सर्कुलेशन रुक जाता है.

किससे बढ़ता है कार्डियक अरेस्ट का खतरा

डॉ. एन.के शर्मा के मुताबिक, ब्लड सर्कुलेशन रुकने के कारण शरीर और खासतौर पर ब्रेन तक ऑक्सीजन की सप्लाई बंद होने लगती है. मरीज अचानक बेहोश हो सकता है और समय पर इलाज नहीं मिलने पर उसकी मौत हो सकती है. उन्होंने कहा कि मोटापा, पहले से मौजूद हृदय संबंधी बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसे कारणों से कार्डियक अरेस्ट का खतरा बढ़ सकता है.

उन्होंने बताया कि कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में तत्काल सीपीआर देना बेहद जरूरी है. सीपीआर का उद्देश्य हार्ट की पंपिंग को किसी तरह बनाए रखना होता है, ताकि शरीर और ब्रेन तक कुछ समय के लिए ब्लड और ऑक्सीजन पहुंचती रहे और मरीज को अस्पताल तक पहुंचाया जा सके. हालांकि, सीपीआर सही तकनीक से किया जाना चाहिए. गलत तरीके से छाती दबाने पर पसलियों में चोट या फ्रैक्चर जैसी समस्या हो सकती है.

हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में क्या अंतर?

डॉ. एन.के शर्मा ने बताया कि हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट एक जैसी स्थिति नहीं हैं. हार्ट अटैक में आमतौर पर हार्ट तक ब्लड पहुंचाने वाली धमनियों में ब्लॉकेज या ब्लड क्लॉट के कारण रक्त की आपूर्ति बाधित होती है. इसमें मरीज को सीने में दर्द, सांस फूलने जैसी शिकायत हो सकती है और तत्काल चिकित्सा मिलने पर इलाज की संभावना रहती है.

वहीं, कार्डियक अरेस्ट में हार्ट की इलेक्ट्रिकल गतिविधि और पंपिंग अचानक बंद हो सकती है. इससे ब्लड सर्कुलेशन रुक जाता है और मरीज तेजी से बेहोश हो सकता है. ऐसे में तत्काल सीपीआर और आपातकालीन चिकित्सा बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है.

किन बातों का रखें ध्यान

डॉक्टर ने कि हार्ट संबंधी गंभीर स्थिति से बचने के लिए लोगों को अपनी लाइफस्टाइल पर ध्यान देना चाहिए. खान-पान में सावधानी, नियमित एक्सरसाइज और योग, मोटापे से बचाव तथा तनाव को कम करना जरूरी है. उन्होंने जंक फूड और फास्ट फूड से दूरी बनाने की सलाह दी.

उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव भी लोगों की सेहत पर असर डाल रहा है. डायबिटीज के मरीजों में कई बार हार्ट अटैक के लक्षण स्पष्ट नहीं होते और इसे साइलेंट हार्ट अटैक कहा जाता है. इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच और शरीर में होने वाले बदलावों को लेकर जागरूक रहना बेहद जरूरी है.

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