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नाना पाटेकर को पहले CPR फिर 45 मिनट तक दी गई कार्डियक मसाज, आखिर दोनों में कितना है अंतर?

कार्डियक मसाज में छाती पर दबाव देकर दिल को पंप करने की कोशिश की जाती है. वहीं, CPR में चेस्ट कंप्रेशन दिया जाता है और जरूरत के मुताबिक सांस देने की कोशिश भी की जाती है.

nana patekar
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( Image Source:  ANI )
हेमा पंत
Edited By:हेमा पंत7 Mins Read

Updated on: 8 Oct 2026 1:07 PM IST

नाना पाटेकर के निधन के बाद कार्डियक मसाज शब्द एक बार फिर चर्चा में है. बताया गया कि अभिनेता को बचाने के लिए अस्पताल में लंबे समय तक इमरजेंसी कोशिशें की गईं. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल है कि आखिर कार्डियक मसाज क्या होती है, क्या यह CPR से अलग है और इसे कौन दे सकता है?

दोनों का इस्तेमाल इमरजेंसी कंडीशन में मरीज की जान बचाने के लिए किया जाता है, लेकिन दोनों का मतलब एक जैसा नहीं है. आसान भाषा में समझें तो कार्डियक मसाज में छाती पर दबाव देकर दिल की पंपिंग में मदद करने की कोशिश की जाती है. वहीं CPR एक पूरी इमरजेंसी प्रोसेस है, जिसमें छाती पर दबाव देने के साथ जरूरत के हिसाब से सांस देने और दूसरी जरूरी मदद शामिल हो सकती है. यानी कार्डियक मसाज को CPR का एक अहम हिस्सा समझा जा सकता है, लेकिन CPR सिर्फ कार्डियक मसाज तक सीमित नहीं होती है.

क्या होती है कार्डियक मसाज?

कार्डियक मसाज को आम तौर पर चेस्ट कंप्रेशन भी कहा जाता है. जब किसी व्यक्ति का दिल अचानक खून पंप करना बंद कर देता है, तब छाती के बीच वाले हिस्से पर लय के साथ दबाव दिया जाता है. इसका मकसद शरीर में खून का फ्लो कुछ हद तक बनाए रखना होता है, ताकि दिमाग और दूसरे जरूरी अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचती रहे. यह प्रोसेस तब तक मदद करती है, जब तक मेडिकल टीम आगे की जरूरी कार्रवाई नहीं कर लेती. कार्डियक अरेस्ट के दौरान हर सेकंड जरूरी होता है, इसलिए तुरंत रिएक्शन देना बेहद जरूरी माना जाता है.

कार्डियक मसाज और CPR में क्या अंतर?

कार्डियक मसाज और CPR यानी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन को कई बार एक ही समझ लिया जाता है, लेकिन दोनों बिल्कुल समान शब्द नहीं हैं. CPR एक पूरी इमरजेंसी प्रक्रिया है, जिसमें चेस्ट कंप्रेशन यानी कार्डियक मसाज शामिल हो सकती है. कंडीशन के अनुसार इसमें रेस्क्यू ब्रीदिंग और AED यानी ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. वहीं कार्डियक मसाज मुख्य रूप से छाती पर दिए जाने वाले कंप्रेशन को कहा जाता है. आसान शब्दों में कहें तो कार्डियक मसाज CPR का एक अहम हिस्सा हो सकती है, जबकि CPR इससे बड़ा पूरा रेससिटेशन तरीका है.

कार्डियक मसाज कितने तरह की होती है?

1. एक्सटर्नल या क्लोज्ड-चेस्ट कार्डियक मसाज: यह सबसे आम तरीका है और CPR के दौरान इस्तेमाल किया जाता है. इसमें छाती को बाहर से हाथों की मदद से दबाया जाता है. ट्रेन व्यक्ति कंडीशन के अनुसार केवल चेस्ट कंप्रेशन या कंप्रेशन के साथ रेस्क्यू ब्रीदिंग दे सकता है.

2. इंटरनल या ओपन-चेस्ट कार्डियक मसाज: यह बेहद अलग और गंभीर मेडिकल प्रोसेस है. इसमें छाती खोलकर सीधे दिल पर काम किया जाता है. यह नॉर्मल फर्स्ट एड का हिस्सा नहीं है और इसे केवल एक्सपर्ट सर्जन या ट्रेन मेडिकल टीम ही खास कंडीशन में करती है.

कार्डियक मसाज कब जरूरी हो सकती है?

अगर कोई व्यक्ति अचानक गिर जाए, आवाज देने या हिलाने पर रिएक्ट न करे और सामान्य तरीके से सांस न ले रहा हो, तो यह कार्डियक अरेस्ट का साइन हो सकता है. ऐसी कंडीशन में तुरंत इमरजेंसी मेडिकल मदद बुलाना जरूरी है. ट्रेनड शख्स मौजूद होने पर CPR शुरू कर सकता है. यहां समय बेहद अहम होता है. मदद पहुंचने तक चेस्ट कंप्रेशन शरीर में रक्त फ्लो बनाए रखने में मदद कर सकते हैं.

कौन दे सकता है कार्डियक मसाज?

बाहर से की जाने वाली चेस्ट कंप्रेशन तकनीक का इस्तेमाल CPR की ट्रेनिंग ले चुका व्यक्ति कर सकता है. किसी व्यक्ति को कार्डियक अरेस्ट होता देखकर आसपास मौजूद प्रशिक्षित व्यक्ति तुरंत मदद शुरू कर सकता है. हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स और इमरजेंसी रिस्पॉन्डर्स भी इसे करते हैं. हालांकि, ओपन-चेस्ट यानी इंटरनल कार्डियक मसाज आम लोगों के लिए नहीं है. यह अस्पताल जैसी मेडिकल सेटिंग में विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा ही की जाती है. इसलिए कार्डियक मसाज को नॉर्मल मालिश समझना सही नहीं है. यह कार्डियक अरेस्ट जैसी जानलेवा इमरजेंसी में इस्तेमाल होने वाली मेडिकल तकनीक है, जिसमें सही समय पर सही तरीके से दी गई मदद बेहद जरूरी हो सकती है.

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