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A Wednesday में नसीरुद्दीन शाह नहीं नाना पाटेकर होते, क्यों पीछे हट गए डायरेक्टर नीरज पांडे

नाना पाटेकर अपनी बेबाकी के लिए मशहूर रहे हैं. एक इंटरव्यू में उन्होंने फिल्म A Wednesday से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सुनाया. वहीं ‘26/11’ को लेकर नाना ने फिल्म से ज्यादा इसे एक अनुभव और नसीहत बताया. उन्होंने बताया कि आखिर इस फिल्म के जरिए वह दर्शकों से क्या कहना चाहते थे.

A Wednesday में नसीरुद्दीन शाह नहीं नाना पाटेकर होते, क्यों पीछे हट गए डायरेक्टर नीरज पांडे
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नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे. अब उनसे जुड़े किस्से ही याद किए जा रहे हैं. आज यानी 8 अक्टूबर की सुबह जब उनके निधन की खबर आई है, तभी से उनसे जुड़े किस्से और उनकी बातें याद की जा रही हैं. वो अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते थे. उनके कई पुराने इंटरव्यू वायरल हो रहे हैं, जिनसे उनकी पर्सनलिटी सामने आ रही है. उनके कई किस्से सामने आ रहे हैं. पुरानी और कई अंदर की बातें पता चल रही हैं.

ऐसे ही एक कार्यक्रम 'आप की अदालत' के दौरान नाना पाटेकर ने कई सवालों के बेबाकी से जवाब दिए. वह निडरता से खुद पर लगे सभी इल्जामों को नकारते चले गए और पब्लिक देखती ही रह गई. एपिसोड में उनसे सवाल पूछा गया कि 'ए वेडनसडे' मूवी के नसीरुद्दीन शाह के लीड रोल को पहले नाना को ऑफर किया जाने वाला था लेकिन डायरेक्टर नीरज पांडे को उनसे डर लगता था. नाना ने बताया कि नसीरुद्दीन ने उन्हें बताया था कि उन्होंने उनका नाम सजेस्ट किया था, लेकिन नीरज ने कहा कि नहीं यार वो मार खाना पड़ेगा, इसलिए मैं नहीं करूंगा.

इसी इंटरव्यू में उन्होंने 26/11 फिल्म पर बात की और कहा कि वो इसके माध्यम से क्या कहना चाहते हैं. उन्होंने कहा, देखो एक टिकिट आपको कटवानी पड़ेगी. मुझे लगता है कि यह फिल्म हैं नहीं, ये अनुभव है और एक नसीहत है और मुझे पूरा यकीन है एक बार देखने के बाद आप चुप नहीं बैठेंगे,दस बार ये फिल्म देखेंगे. यहां न तो चिकनी चमेली है, न तो मुन्नी बाई है कोई नहीं है. आपको कुछ कहती रहेगी ये फिल्म. मूवी में नाना पाटेकर ने राकेश मारिया का रोल किया था जो तत्कालीन संयुक्त पुलिस आयुक्त की भूमिका में थे. साथ ही संजीव जायसवाल अजमल कसाब की भूमिका में थे. फिल्म को राम गोपाल वर्मा ने डायरेक्ट किया था.

युवाओं में बदलाव बहुत आएगा

सवाल में पूछा गया कि क्या फिल्म देखने के बाद दो चार लोगों की कुर्सी जाएगी. तो नाना ने कहा कि कुर्सी नहीं जाएगी. लेकिन देखने के बाद युवाओं में बदलाव बहुत आएगा. ये नया जो क्रॉप है,इनके लिए ये फिल्म है. ये सब ठीक हो जाएंगे फर्म हो जाएंगे. मुझे उससे ज्यादा लेना देना है.यब विल लव इट कंफर्म. पूरी बातचीत के दौरान नाना के चेहरे पर एक शालीनता भररी मुस्कान थी. उन्होंने कहा इल्जाम तो होते रहेंगे, पर आप अगर फर्म हैं, आपके दिमागमें क्लैरिटी है तो मुझे नहीं लगता कोई दिक्कात होती है. वो क्लैरिटी होनी चाहिए वो हैं. यह फिल्म पैसे के लिए नहीं बनाई गई है.उन्होंने प्रहार और वेलकम का उदाहरण देते हुए कहा, धंधे में फर्क है.

दिनभर में 60 सिगरेट पी जाते थे

इससे पहले एक इंटरव्यू में नाना ने यह बताया थी कि एक समय ऐसा था जब वह दिनभर में 60 सिगरेट पी जाते थे. हालात यहां तक पहुंच गए थे कि नहाते समय भी उनके हाथ में सिगरेट रहती थी. फिर उनकी बहन की कही एक बात ने नाना को भीतर तक झकझोर दिया. दरअसल उनकी बहन के इकलौते बेटे की मौत हो गई थी. एक दिन नाना को सिगरेट पीते देख उनकी बहन ने कहा कि उन्हें और क्या-क्या देखना पड़ेगा. बस इसके बाद उन्होंने सिगरेट पीना छोड़ दिया था.

कम उम्र में ही उठा पिता का साया

नाना की जिंदगी में कम उम्र में ही पिता का साया उठ गया था. जब वह करीब 28 साल के थे, तब उनके पिता की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी. परिवार में उनके दो भाई अशोक और दिलीप पाटेकर भी हैं. बाद में बेटे दुर्वासा को खोने का दुख भी उनकी जिंदगी का बेहद कठिन दौर बना. बताया जाता है कि इस सदमे के बाद उनका सिगरेट पीना और बढ़ गया था.

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