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अच्छा काम करके जा रहा हूं, सुकून है... यहां पढ़ें नाना पाटेकर का वो महाडायलॉग जो है अमर, इंसान से लेकर पाकिस्तान तक को दिखाई औकात

'क्रांतिवीर' 1994 में आई एक भारतीय हिंदी-भाषा की एक्शन-क्राइम फ़िल्म है, जिसका डायलॉग आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने बेहद दमदार था. इसमें नाना ने पाकिस्तान से लेकर इंसान की हरकतों पर तंज कसा था.

nana patekar
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( Image Source:  youtube- NH Studioz )
हेमा पंत
Edited By:हेमा पंत4 Mins Read

Updated on: 8 Oct 2026 11:53 AM IST

नाना पाटेकर के निधन के बाद उनकी फिल्मों के वो डायलॉग भी फिर याद किए जा रहे हैं, जिन्होंने कभी पर्दे पर तहलका मचा दिया था. 1994 की फिल्म ‘क्रांतिवीर’ में नाना का किरदार और उनके डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर हैं. नाना पाटेकर की इस फिल्म का डायलॉग 'आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने' आज के दौर में भी सटीक बैठता है.

इसी डायलॉग में नाना ने पाकिस्तान को लेकर भी बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया था और उसे ‘पिस्सू देश’ तक कह दिया था. वहीं इंसान की करतूतों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा था कि भगवान भी इंसान को देखता होगा तो शर्म करता होगा.

आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने

आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने अब मुझे लटका देंगे जुबान ऐसी बाहर आएगी आंखें बाहर आएगी थोड़ी देर लटकता रहूंगा, फिर ये मेरा भाई मुझे नीचे उतार देगा फिर आप चर्चा करते हैं घर चले जाओगे खाना खाओगे सो जाओगे.

तुम्हारी ये नामर्दगी बुजदिली एक दिन इस देश की मौत का तमाशा इसी खामोशी से देखेगी. कुछ नहीं कहना मुझे तुम्हें कुछ नहीं. तुम्हारी जिंदगी में कोई फर्क पड़ने वाला नहीं. अंधेरे में रहने की आदत पड़ी है तुमको गुलामी करने की आदत पड़ी है

पहले राजा महाराजाओं की गुलामी करो फिर अंग्रेजों की. अब चंद गद्दार नेताओं की और गुंडो की. धर्म के नाम पर ये तुम्हें बहकाते हैं तुम एक दूसरे के गले काट रहे हो. काटो-काटो.

ऊपर वाला भी ऊपर से देखता होगा तो उसे शर्म आती होगी. सोचता होगा मैंने सबसे खूबसूरत चीज बनाई थी इंसान, नीचे देखा तो सब कीड़े बन गए कीड़े. रेंगते रहो, सड़ते रहो और मरो. आए और गए खेल खत्म.

क्यों जीए मालूम नहीं, क्यों मरे मालूम नहीं, कलम वाली बाई क्रांति लाना चाहती थी, कलम के जोर पर काले वर्तमान को खत्म करना चाहती थी, कौन समझा उसकी बात को, सब साले मुर्दे, जिंदा लाश है.

किसे जगाती वो, मैं जाग गया, कुछ अच्छा काम करके जा रहा हूं, सुकून है, लेकिन ध्यान में रखना तुम्हारी ये खामोशी कल तुम्हारे बच्चों के लिए रोना बन जाएगी. ये कानून वाले वर्दी वाले नेता इन्होंने अपना ईमान बेच दिया. एक दूसरे को जलाते वक्त तुम्हारा ईमान कहा गया था भाड़ में.

ये पिस्सू जैसा हमारा पड़ोसी मुल्क, आने वाले कल में शायद अपने आपको दुनिया के नक्शे पर देख नहीं पाएगा. एक बात भूल रहा है उनके घर में जो रोटी बनती है ना उसका आटा भी विदेश की चक्की से पीस के आता है. साले अपने खुद के देश में सुई नहीं बना सकते हैं और हमारे देश को तोड़ने का सपना देखते हैं. वो ये सपना देख सकते हैं क्योंकि उन्हें मालूम है यह मुर्दों का देश है. वतन के लिए किसी को कोई हमदर्दी नहीं है, इसे तोड़ना बिल्कुल आसान है.

मैं हिंदू मैं मुसलमान मैं सिख, मैं फलाना, मैं ढिमका, एक लाठी को तो कोई भी तोड़ सकता है, लेकिन लाठी के भाड़े को तोड़ना मुश्किल है. मैंने बचपन में पढ़ा था स्कूल में तीसरी में, मैं क्यों समझा रहा हूं तुमको क्यों समझा रहा. पागल हूं मैं, भूसा भरा पड़ा है मेरे दिमाग, क्यों बाते कर रहा हूं इन पत्थरों से हंसो हंसो खुशियां मनाओ.

क्रांति की राह पर एक और कुत्ते की मौत मरने जा रहा है कल कोई और मरेगा हमें क्या हां, हम इसी तरह जीते रहेंगे है ना जिओ भाई जियो जैसे चाहिए वैसे जियो, मैं हिजड़े की जिंदगी जीना नहीं चाहता ये ला चल चल,

इसके बाद फिर खुद नाना पाटेकर फांसी पर चढ़ जाते हैं, और सामने से डिंपल के साथ नेता आकर कहते हैं ये फांसी नहीं हो सकती है.

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