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Nana Patekar को आया था कार्डियक अरेस्ट, हार्ट अटैक से कितना अलग, जानें क्या होता है CPR

नाना पाटेकर के निधन के बाद एक बार फिर हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के बीच का फर्क समझना जरूरी हो गया है. दोनों स्थितियां दिल से जुड़ी हैं, लेकिन एक में खून का बहाव रुकता है, जबकि दूसरे में दिल की पंपिंग अचानक बंद हो सकती है.

Nana Patekar को आया था कार्डियक अरेस्ट, हार्ट अटैक से कितना अलग, जानें क्या होता है CPR
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( Image Source:  ANI )
हेमा पंत
Edited By:हेमा पंत3 Mins Read

Updated on: 8 Oct 2026 10:07 AM IST

नाना पाटेकर के निधन की खबर के बाद कार्डियक अरेस्ट को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है. 75 साल के एक्टर को गोवा स्थित उनके घर पर बेहोशी की हालत में पाया गया था. शुरुआती जानकारी के मुताबिक उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया था. अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें बचाने के लिए करीब 45 मिनट तक CPR देने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका.

अक्सर लोग हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को एक ही बीमारी समझ लेते हैं, जबकि दोनों में काफी अंतर है. हार्ट अटैक में दिल तक खून पहुंचाने वाली नस में रुकावट आ जाती है, जबकि कार्डियक अरेस्ट में दिल की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी बिगड़ने से वह अचानक खून पंप करना बंद कर देता है. ऐसी स्थिति में CPR बेहद अहम हो जाता है.

हार्ट अटैक में क्या होता है?

हार्ट अटैक तब होता है, जब दिल तक खून पहुंचाने वाली किसी कोरोनरी आर्टरी में रुकावट आ जाती है. इसकी वजह से दिल की मांसपेशियों तक ऑक्सीजन की सप्लाई कम या बंद हो सकती है और उस हिस्से को नुकसान पहुंचने लगता है. इस दौरान दिल आमतौर पर धड़कता रहता है. सीने में दर्द या दबाव, सांस लेने में परेशानी, ठंडा पसीना और दर्द का हाथ, पीठ, गर्दन या जबड़े तक पहुंचना इसके कुछ संकेत हो सकते हैं. ऐसे लक्षण नजर आएं तो तुरंत मेडिकल मदद लेना जरूरी है.

कार्डियक अरेस्ट हार्ट अटैक से कैसे अलग है?

कार्डियक अरेस्ट में समस्या दिल की इलेक्ट्रिकल सिस्टम से जुड़ी होती है. अचानक दिल की धड़कन ऐसी गड़बड़ा सकती है कि वह शरीर में खून पंप करना बंद कर दे. ऐसे में व्यक्ति अचानक गिर सकता है, होश खो सकता है और सामान्य तरीके से सांस लेना बंद हो सकता है. नाना पाटेकर के मामले में भी उन्हें घर पर बेहोश पाए जाने के बाद अस्पताल पहुंचाया गया था और डॉक्टरों ने लगातार CPR के जरिए उन्हें बचाने की कोशिश की थी.

CPR क्या है और कब काम आता है?

CPR यानी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन एक इमरजेंसी प्रक्रिया है. जब किसी व्यक्ति की सांस या दिल की धड़कन रुक जाती है, तब प्रशिक्षित व्यक्ति छाती के बीच में लगातार दबाव देकर खून के प्रवाह को बनाए रखने की कोशिश करता है. जरूरत के अनुसार रेस्क्यू ब्रीदिंग भी दी जा सकती है.

कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में तुरंत इमरजेंसी सेवा को फोन करना, CPR शुरू करना और उपलब्ध होने पर AED का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी होता है. नाना पाटेकर के मामले में डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक CPR किया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका.

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