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सुरेश कलमाड़ी: पुणे की सियासत से ओलंपिक गलियारों तक - एक ऐसा नाम जिसने राजनीति और खेल दोनों को छुआ

Suresh Kalmadi death: वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश कलमाड़ी का 81 वर्ष की उम्र में पुणे में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. वह पुणे की राजनीति का जाना-पहचाना चेहरा थे और कई बार लोकसभा सांसद रहे. केंद्र सरकार में राज्य मंत्री रहते हुए उन्होंने खासकर रेलवे से जुड़े कार्यों में भूमिका निभाई. राजनीति के साथ-साथ कलमाड़ी भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के अध्यक्ष भी रहे और राष्ट्रीय खेल प्रशासन में उनकी मजबूत मौजूदगी रही.

सुरेश कलमाड़ी: पुणे की सियासत से ओलंपिक गलियारों तक - एक ऐसा नाम जिसने राजनीति और खेल दोनों को छुआ
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( Image Source:  ANI )
प्रवीण सिंह
Edited By: प्रवीण सिंह

Updated on: 6 Jan 2026 9:09 AM IST

Suresh Kalmadi death: वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश कलमाड़ी का मंगलवार तड़के पुणे में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. वह 81 वर्ष के थे. परिवार के अनुसार, उन्होंने सुबह करीब 3:30 बजे अंतिम सांस ली. उनके निधन से महाराष्ट्र की राजनीति और खेल प्रशासन जगत में शोक की लहर फैल गई है.

सुरेश कलमाड़ी पिछले कुछ समय से पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में भर्ती थे. उनके पार्थिव शरीर को एरंडवणे स्थित उनके निवास ‘कलमाड़ी हाउस’ में दोपहर 2 बजे तक अंतिम दर्शन के लिए रखा गया. इसके बाद दोपहर 3:30 बजे नवी पेठ स्थित वैकुंठ श्मशानभूमि में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.

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पुणे से शुरू हुआ सफर

सुरेश कलमाड़ी का नाम पुणे की राजनीति का पर्याय बन चुका था. वह सिर्फ एक सांसद नहीं थे, बल्कि उस दौर के प्रतिनिधि थे जब स्थानीय नेता राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत आवाज बनकर उभरते थे. उन्होंने कई बार पुणे लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया और शहर के विकास, पहचान और राजनीतिक प्रभाव को दिल्ली तक पहुंचाया.

पुणे में उनकी पकड़ केवल चुनावी गणित तक सीमित नहीं थी. पार्टी संगठन, सामाजिक संपर्क और प्रशासनिक समझ - तीनों का ऐसा संतुलन बहुत कम नेताओं में देखने को मिलता है.

केंद्रीय मंत्री के रूप में भूमिका

कलमाड़ी यूपीए के दौर में केंद्र सरकार में राज्य मंत्री रहे और रेल मंत्रालय में भी उन्होंने जिम्मेदारी निभाई. उस दौर में रेलवे केवल परिवहन नहीं, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक रीढ़ माना जाता था. मंत्रालय में रहते हुए उन्होंने पुणे और महाराष्ट्र से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई.

खेलों की दुनिया में कलमाड़ी

राजनीति से इतर, सुरेश कलमाड़ी की सबसे अलग पहचान खेल प्रशासन से जुड़ी रही. वह भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के अध्यक्ष रहे और लंबे समय तक देश के खेल ढांचे के केंद्र में बने रहे. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों से जुड़े फैसलों में उनका असर साफ दिखता था. साल 2010 में दिल्‍ली में कॉमनवेल्‍थ खेलों का सफल आयोजन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. खेलों को लेकर उनकी सक्रियता ने उन्हें सिर्फ नेता नहीं, बल्कि एक पावरफुल एडमिनिस्ट्रेटर के रूप में भी स्थापित किया. ओलंपिक और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे आयोजनों से जुड़कर वह देशभर में चर्चा में रहे.

विवाद और आलोचना भी साथ चले

सुरेश कलमाड़ी का करियर पूरी तरह निर्विवाद नहीं रहा. उनके सार्वजनिक जीवन में ऐसे दौर भी आए जब आलोचनाएं तेज हुईं और सवाल उठे. लेकिन इसके बावजूद यह सच है कि वह भारतीय राजनीति और खेल प्रशासन में एक प्रभावशाली और ताकतवर नाम बने रहे. उनका जीवन इस बात का उदाहरण रहा कि सत्ता के गलियारों में पहुंचना जितना मुश्किल है, उतना ही मुश्किल वहां टिके रहना भी होता है.

निजी जीवन और परिवार

राजनीति की हलचल से दूर, सुरेश कलमाड़ी एक पारिवारिक व्यक्ति थे. वह अपने पीछे पत्नी, बेटा, बहू, दो विवाहित बेटियां, दामाद और नाती-पोतों से भरा परिवार छोड़ गए हैं. उनके निधन के बाद एरंडवणे स्थित उनके आवास पर समर्थकों, सहयोगियों और परिचितों की भीड़ उमड़ पड़ी.

अंतिम विदाई

उनके पार्थिव शरीर को कलमाड़ी हाउस में दोपहर 2 बजे तक अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जिसके बाद नवी पेठ स्थित वैकुंठ श्मशानभूमि में अंतिम संस्कार किया जाएगा. सुरेश कलमाड़ी का निधन केवल एक नेता का जाना नहीं है, बल्कि उस राजनीतिक संस्कृति का अंत है जिसमें स्थानीय नेता राष्ट्रीय मंच तक अपनी मजबूत पहचान बनाते थे. पुणे की राजनीति, कांग्रेस पार्टी और भारतीय खेल प्रशासन - तीनों में उनका खालीपन लंबे समय तक महसूस किया जाएगा.

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