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ईरान में जंग का भारत पर असर! LPG सप्लाई को लेकर सरकार अलर्ट, लागू हुआ Essential Commodities Act, जानें क्या कहता है कानून

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत में गैस सप्लाई को लेकर सरकार अलर्ट हो गई है. संभावित संकट को देखते हुए केंद्र ने Essential Commodities Act का इस्तेमाल करते हुए गैस की सप्लाई और वितरण को नियंत्रित करने का फैसला किया है. सवाल यह है कि आखिर यह कानून क्या है और इससे आम लोगों की रसोई गैस पर क्या असर पड़ सकता है?

ईरान में जंग का भारत पर असर! LPG सप्लाई को लेकर सरकार अलर्ट, लागू हुआ Essential Commodities Act, जानें क्या कहता है कानून
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( Image Source:  AI GENERATED IMAGE- SORA )

Essential Commodities Act: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ग्लोबल एनर्जी सप्लाई पर असर पड़ रहा है. इसी को देखते हुए भारत सरकार ने देश में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए कदम उठाए हैं. कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और होर्मुज के रास्ते होने वाली सप्लाई को लेकर हो रही परेशानी के मद्देनजक केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए नेचुरस गैस की आपूर्ति और डिस्ट्रीब्यूशन को कंट्रोल करने का फैसला किया है.

भारत के अलग-अलग राज्यों से गैस की सप्लाई में दिक्कतों की रिपोर्ट्स सामने आ रही थीं. कुछ जगहों पर कमर्शियल सिलेंडर्स की सप्लाई को पूरी तरह से रोक दिया गया था. ऐसे में सरकार को ये फैसला लेना पडा है. संभावित कमी को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल यूनिट्स को निर्देश दिए हैं कि वे एलपीजी के उत्पादन को अधिकतम स्तर तक बढ़ाएं.

इसते साथ ही पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए 25 दिन का इंटर-बुकिंग पीरियड भी लागू किया है. इसका उद्देश्य जमाखोरी रोकना और कालाबाजारी पर लगाम लगाना है.

Essential Commodities Act क्या कहता है?

  • सरकार की तरफ से आदेश में कहा गया है कि पेट्रोलियम और उससे जुड़े उत्पाद Essential Commodities Act की अनुसूची में शामिल हैं. इसलिए इस कानून के तहत केंद्र सरकार को उनकी सप्लाई और डिस्ट्रीब्यूशन को कंट्रोल करने का अधिकार है.
  • कानून की धारा 3 के तहत सरकार आवश्यक होने पर पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई और व्यापार को कंट्रोल कर सकती है ताकि उनकी उपलब्धता बनी रहे और समान डिस्ट्रीब्यूशन सुनिश्चित किया जा सके.

मौजूदा सरकार के निर्देश के अनुसार गैस आवंटन को चार प्राथमिकता वाले सेक्टर्स में बांटा गया है.

पहली प्राथमिकता वाले सेक्टर?

- घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी की सप्लाई

- परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाली सीएनजी

- एलपीजी उत्पादन और उससे जुड़ी आवश्यकताएं

- पाइपलाइन कम्प्रेसर ईंधन और पाइपलाइन संचालन से जुड़ी जरूरी जरूरतें

इन क्षेत्रों को गैस की आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर दी जाएगी और उपलब्धता के अनुसार सप्लाई बनाए रखी जाएगी.

दूसरी प्राथमिकता वाले क्षेत्र कौनसे हैं?

खाद बनाने वाले कारखाने- इन प्लांट्स को पिछले छह महीनों की औसत गैस खपत का सत्तर प्रतिशत तक गैस उपलब्ध कराई जाएगी, बशर्ते कि संचालन के लिहाज से यह संभव हो. आदेश में कहा गया है कि यह गैस केवल उर्वरक उत्पादन के लिए ही इस्तेमाल की जाएगी.

तीसरी प्राथमिकता वाले सेक्टर कौनसे हैं?

प्राथमिकता क्षेत्र तीन में चाय उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और वे औद्योगिक उपभोक्ता शामिल हैं जो राष्ट्रीय गैस ग्रिड से जुड़े हुए हैं. गैस मार्केटिंग कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि इन उपभोक्ताओं को पिछले छह महीनों की औसत खपत का अस्सी प्रतिशत गैस उपलब्ध कराई जाए.

चौथी प्राथमिकता वाले क्षेत्र कौनसे हैं?

प्राथमिकता क्षेत्र चार में वे औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ता शामिल हैं जिन्हें सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के जरिए गैस मिलती है. इन्हें भी पिछले छह महीनों की औसत खपत का अस्सी प्रतिशत गैस उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है.

प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को गैस उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने अन्य क्षेत्रों में गैस की सप्लाई कम करने की अनुमति दी है. पेट्रोकेमिकल यूनिट्स को सबसे पहले गैस सप्लाई में कटौती का सामना करना पड़ सकता है. इनमें ओएनजीसी पेट्रो एडिशंस लिमिटेड, गेल पाटा पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स और रिलायंस ओ2सी जैसी कंपनियां शामिल हैं. जरूरत पड़ने पर इसके बाद बिजली प्लांट्स को मिलने वाली गैस में भी कमी की जा सकती है.

आदेश में यह भी कहा गया है कि नेचुरल गैस के सभी उत्पादक, आयातक, विपणन करने वाली कंपनियां और वितरक केंद्र सरकार को डिटेल जानकारी उपलब्ध कराएंगे. इसमें उत्पादन, आयात, भंडार, सप्लाई और खपत से जुड़ा पूरा विवरण शामिल होगा. इसमें एलएनजी और री-गैसिफाइड एलएनजी से संबंधित जानकारी भी देनी होगी.

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