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Valentine’s Day पर बढ़ती है Emergency Pills की डिमांड! रिपोर्ट क्या कहती है, युवाओं को क्या जानना चाहिए?

BMJ स्टडी के अनुसार वैलेंटाइन डे के आसपास emergency contraceptive pills की बिक्री बढ़ती है, लेकिन 43 लाख बांझपन और कैंसर के वायरल दावे को लेकर कोई आधिकारिक मेडिकल प्रमाण नहीं मिला है.

Valentine’s Day पर बढ़ती है Emergency Pills की डिमांड! रिपोर्ट क्या कहती है, युवाओं को क्या जानना चाहिए?
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Valentine’s Day यानी 14 फरवरी और उसके आसपास प्यार और रिश्तों की चर्चा के साथ एक और ट्रेंड तेजी से सुर्खियों में आता है. इस दौरान Emergency Contraceptive Pills की मांग भी बढ़ जाती है. कई अंतरराष्ट्रीय स्टडीज और रिटेल डेटा बताते हैं कि 14 फरवरी के आसपास ‘मॉर्निंग-आफ्टर पिल’ की बिक्री में उछाल देखा जाता है, लेकिन क्या यह सच में चिंताजनक ट्रेंड है या सिर्फ एक व्यवहारिक पैटर्न? और सबसे जरूरी युवाओं को इससे जुड़ी कौन-सी सही जानकारी होनी चाहिए?

Valentine’s Day और Emergency Pills: क्या कहती है रिसर्च?

वैलेंटाइन डे आते ही रिश्तों और निजी फैसलों पर चर्चा तेज हो जाती है. इसी दौरान emergency contraceptive pills (जैसे i-pill) को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे वायरल होते हैं . कभी बांझपन, कभी कैंसर का डर, लेकिन सवाल है: सच क्या है?

BMJ रिपोर्ट में क्या सामने आया?

दिसंबर 2023 में British Medical Journal (BMJ) के क्रिसमस इश्यू में प्रकाशित एक स्टडी ने 2016–2022 के बीच अमेरिका में levonorgestrel आधारित emergency contraception की बिक्री का विश्लेषण किया था. रिपोर्ट में सामने आया कि Valentine’s Day के बाद 15-44 वर्ष की हर 1,000 महिलाओं पर लगभग 0.31 यूनिट बिक्री में वृद्धि दर्ज हुई. यह बढ़ोतरी New Year के बाद देखी गई वृद्धि (0.63 यूनिट प्रति 1,000) से लगभग आधी थी.

हैप्पी न्यूज ईयर, Independence Day और St. Patrick’s Day के आसपास भी हल्की वृद्धि देखी गई. रिसर्चर्स ने इसे छुट्टियों के दौरान बढ़ी sexual activity और alcohol consumption से जोड़ा-

भारत में क्या ट्रेंड है?

भारत में आधिकारिक सरकारी डेटा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, लेकिन Quick commerce प्लेटफॉर्म (जैसे Blinkit, Dunzo आदि) ने Valentine Week के दौरान sexual wellness products की बिक्री में 30-40% तक वृद्धि दर्ज होने की बात कही है. इसमें condoms और emergency pills दोनों शामिल हैं.

सोशल मीडिया पर बांझपन और कैंसर ट्रेंड - सच या अफवाह?

दूसरी तरफ, सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि लाखों लड़कियों में बांझपन और कैंसर emergency pills की वजह से हुआ. अब तक WHO, ICMR, AIIMS या किसी peer-reviewed मेडिकल जर्नल ने इस तरह के आंकड़ों की पुष्टि नहीं की है. Emergency pills में levonorgestrel नामक हार्मोन होता है — आर्सेनिक या कोई जहरीला तत्व नहीं.

सावधानी क्या बरतें?

डॉक्टरों के अनुसार, इसे नियमित गर्भनिरोधक के रूप में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.बार-बार उपयोग से hormonal imbalance या menstrual irregularity हो सकती है, लेकिन occasional use से स्थायी बांझपन का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है.

Valentine के बाद Gynecologist के पास भीड़ क्यों?

त्योहारों या खास मौकों के बाद sexual health से जुड़ी सलाह लेने वाले मरीजों की संख्या बढ़ना इसका सबसे बड़ा कारण है. यह जरूरी नहीं कि सभी मामलों में emergency pill कारण हो. अक्सर इसके कारण असुरक्षित यौन संबंध, STD का डर और अनियमित पीरियड होते हैं.

14 फरवरी को Condom Day क्यों कहा जाता है?

कई देशों में 14 फरवरी को “Condom Day” के रूप में भी प्रमोट किया जाता है. भारत में भी इसका ट्रेंड धीरे—धीरेर बढ़ रहा है. इसका मकसद Safe sex को बढ़ावा देना, STI/STDs से बचाव, जिम्मेदार यौन व्यवहार को प्रोत्साहित करना, कंडोम गर्भावस्था रोकने के साथ-साथ संक्रमण से भी सुरक्षा देता है, जो emergency pills नहीं करतीं.

युवाओं के लिए जरूरी संदेश

डर या शर्म के बजाय जानकारी जरूरी है. इमरजेंसी पिल्स का उपयोग करने से पहले सहमति, सुरक्षा, रेगुलर गर्भनिरोधक जागरूकता, मेडिकल सलाह को लेकर सतर्क रहें और उस पर अमल करें. रिसर्च से यह साबित होता है कि Valentine’s Day के आसपास emergency pills की बिक्री बढ़ती है, लेकिन लाखों बांझपन और कैंसर के वायरल दावे का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है.

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