डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने किया UGC नियमों का पोस्टमार्टम, कहा- प्रिंसिपल और वाइस-चांसलर करवा रहे बवाल, कहीं क्रिमिनल केस का जिक्र तक नहीं
UGC नियमों पर जारी विवादों के बीच शिक्षा जगत के जाने-माने विशेषज्ञ डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने अपनी प्रतिक्रिया दी है.
Vikas Divyakirti
UGC Controversy: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी किए गए नए इक्विटी नियमों पर जारी विवादों के बीच शिक्षा जगत के जाने-माने विशेषज्ञ डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इन नियमों के सकारात्मक पक्ष पर जोर देते हुए कहा कि ये पुराने 2012 के भेदभाव-विरोधी ढांचे से अधिक प्रभावी और बेहतर हैं. दिव्यकीर्ति ने सामाजिक भेदभाव से जुड़े दावों और विरोध प्रदर्शन पर भी अपनी राय रखी.
उन्होंने समृद्ध उच्च शिक्षा वातावरण और समान अवसर सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाए गए इन नियमों की आवश्यकता पर बात करते हुए कहा कि इसमें भेदभाव जैसी कोई भावना शामिल नहीं है और इसे गलत समझा जा रहा है. इस बयान ने शिक्षा नीति पर चल रही बहस को और तेज कर दिया है.
डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने UGC नियमों पर क्या कहा?
डॉ. दिव्यकीर्ति ने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में कहा “कुल मिलाकर रेग्युलेशन्स बहुत अच्छे हैं. कुछ बिंदुओं को छोड़ दिया जाए, तो ये 2012 की तुलना में कहीं बेहतर हैं. इसमें कोई दिक्कत नहीं है. इन नियमों की आवश्यकता इसलिए थी, ताकि उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता के लक्ष्य को वास्तविक रूप से लागू किया जा सके."
भेदभाव को लेकर चली आलोचनाओं पर दिव्यकीर्ति ने स्पष्ट किया कि “भेदभाव कोई फीलिंग नहीं हो सकती. अगर है, तो वह कृत्य होगा.” उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि नियमों में प्रतिनिधित्व इस तरह सुनिश्चित किया जा सकता है कि समाज के सभी वर्गों की भागीदारी बनी रहे.
सवर्ण छात्रों के डर पर दिव्यकीर्ति की राय
कुछ समूहों द्वारा सवर्ण छात्रों के खिलाफ भेदभाव के आरोप लगाए जा रहे हैं और इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर हुई है. इस विवाद को लेकर दिव्यकीर्ति ने कहा “रेग्युलेशन बनाने वालों के दिमाग में यह बात नहीं रही होगी कि हम जनरल कैटेगरी की बात को खारिज कर दें. यह सरकार भी नहीं चाहेगी.” उन्होंने यह भी कहा कि 2012 में भी समान प्रावधान थे, लेकिन तब किसी ने प्रश्न नहीं उठाया.
विरोध प्रदर्शनों पर सवाल
डॉ. दिव्यकीर्ति ने उन लोगों के विरोध प्रदर्शनों पर भी सवाल उठाए जो नए नियमों के खिलाफ सड़कों पर उतर रहे हैं. उन्होंने कहा, “ये सब ऑर्गेनिक नहीं हैं. मुझे लगता है कि ये कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के प्रिंसिपल और कुलपति करा रहे हैं.” उनका मानना है कि संशोधन में जहां OBC वर्ग लिखा गया है, उसे ठीक कर लेने से अधिकांश आपत्तियां दूर हो सकती हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने UGC द्वारा जारी किए गए नए इक्विटी नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी है. शीर्ष अदालत ने इन नियमों को लेकर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा कि इनके प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं और इससे समाज में भेदभाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद उच्च शिक्षा से जुड़े नए नियमों पर फिलहाल अमल थम गया है. मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने नियमों की भाषा और दायरे पर सवाल उठाए. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि नियमों का दायरा और उद्देश्य साफ तौर पर परिभाषित नहीं किया गया है.
UGC के नए नियम क्या हैं?
यह नया UGC Equity नियम 2026 उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान, विकलांगता आदि आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव को रोकने के लिए लागू किया गया है. यह नियम 2012 के भेदभाव-विरोधी ढांचे की जगह लेता है और सभी कॉलेजों, विश्वविद्यालयों हेतु अनिवार्य अनुपालन की व्यवस्था देता है ताकि भेदभाव की शिकायतों को गंभीरता से निपटाया जा सके.





