तमिलनाडु में बदली परंपरा! नए CM विजय के शपथ ग्रहण समारोह की 'वंदे मातरम्' से हुई शुरुआत, क्या BJP को दिया खास संदेश?
तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री विजय के शपथ ग्रहण समारोह की 'वंदे मातरम्' से शुरुआत होना राजनीतिक गलियारों में बड़ी चर्चा का विषय बन गया है. इसे केंद्र सरकार और बीजेपी को दिए गए एक बड़े राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है.
राहुल गांधी की मौजूदगी में सीएम विजय के शपथ ग्रहण समारोह में गूंजा 'वंदे मातरम'
Tamil Nadu CM Vijay Swearing-In Begins With Vande Mataram: तमिलनाडु की राजनीति ने रविवार को वो तस्वीर देखी, जिसकी शायद कुछ साल पहले तक किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. फिल्मों के ‘थलापति’ कहलाने वाले विजय ने आखिरकार सत्ता के असली मंच पर कदम रख दिया. चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में हजारों समर्थकों, फिल्मी चमक और राजनीतिक ताकत के बीच विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.
लेकिन इस पूरे शपथ ग्रहण समारोह में सबसे ज्यादा चर्चा किसी मंत्री, किसी गठबंधन या किसी भाषण की नहीं… बल्कि शुरुआत में बजाए गए 'वंदे मातरम्' की रही. 'वंदे मातरम्' भारत का राष्ट्रीय गीत है.
‘तमिल थाई वाझ्थु’ नहीं, पहले ‘वंदे मातरम्’
तमिलनाडु में सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत परंपरागत रूप से राज्य गीत 'तमिल थाई वाझ्थु' से होती रही है, लेकिन विजय के शपथ ग्रहण समारोह में सबसे पहले 'वंदे मातरम्' बजाया गया, फिर राष्ट्रगान और उसके बाद तमिल थाई वाझ्थु..
राजनीतिक गलियारों में इसे सिर्फ प्रोटोकॉल नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है. खासकर ऐसे समय में जब केंद्र सरकार ने हाल ही में 'वंदे मातरम्' को लेकर सख्त रुख अपनाया है और इसे राष्ट्रीय सम्मान कानून के दायरे में लाने की तैयारी की है.
क्या BJP को संदेश देना चाहते हैं विजय?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय ने यह कदम सिर्फ औपचारिकता के तहत नहीं उठाया. यह एक संकेत भी हो सकता है कि उनकी सरकार केंद्र के साथ टकराव की राजनीति नहीं, बल्कि संतुलन की रणनीति अपनाएगी. दिलचस्प बात यह भी रही कि मंच पर विजय के साथ राहुल गांधी भी मौजूद थे. राहुल गांधी वही नेता हैं जिन्होंने हाल के दिनों में केंद्र सरकार पर 'वंदे मातरम्' को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया था.
बंगाल से अलग दिखी तस्वीर
तमिलनाडु की यह तस्वीर इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि एक दिन पहले पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह में ऐसा नहीं हुआ था. बंगाल में पहली बार बीजेपी सरकार बनने के ऐतिहासिक मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मौजूद थे, लेकिन वहां समारोह की शुरुआत 'वंदे मातरम्' से नहीं हुई. यही वजह है कि विजय के समारोह को अब राजनीतिक प्रतीकों और संकेतों के नजरिए से देखा जा रहा है.
फिल्मी स्टार से सत्ता के शिखर तक
विजय की पार्टी TVK ने अपने पहले ही चुनाव में 108 सीटें जीतकर तमिल राजनीति को हिला दिया, लेकिन असली ड्रामा चुनाव नतीजों के बाद शुरू हुआ, जब बहुमत के लिए जरूरी आंकड़े जुटाने को लेकर कई दिनों तक पर्दे के पीछे बातचीत चलती रही. आखिरकार कांग्रेस, CPI, CPM, VCK और IUML के समर्थन से विजय ने बहुमत साबित किया और अब वे तमिलनाडु की सत्ता के सबसे बड़े चेहरे बन चुके हैं.
अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि विजय मुख्यमंत्री बन गए. असली सवाल यह है कि क्या वे तमिलनाडु की पारंपरिक द्रविड़ राजनीति की दिशा बदलने जा रहे हैं? और क्या 'वंदे मातरम्' से शुरू हुआ यह शपथ ग्रहण आने वाले दिनों में उनकी नई राजनीतिक लाइन का संकेत है?




