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सुप्रीम कोर्ट ने पलटा हाई कोर्ट का फैसला, कहा- महिला के सलवार का नाड़ा खोलना भी रेप का प्रयास

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला पलटते हुए कहा कि किसी महिला को गलत तरीके से छूना और उसके पायजामे की डोरी खोलना बलात्कार का प्रयास माना जाएगा.

Supreme Court said woman pyjama string is tantamount attempted rape
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Supreme Court

( Image Source:  ANI )
विशाल पुंडीर
Edited By: विशाल पुंडीर

Updated on: 18 Feb 2026 9:07 AM IST

महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी महिला को गलत तरीके से छूना और उसके पायजामे की डोरी खोलना बलात्कार का प्रयास माना जाएगा. अदालत ने इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस विवादास्पद फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें इसे केवल बलात्कार की तैयारी बताया गया था, जिसके तहत कम सजा का प्रावधान है.

यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि हाई कोर्ट के 17 मार्च 2025 के निर्णय से आक्रोश पैदा हो गया था. गैर-सरकारी संगठन ‘वी द वुमेन’ की संस्थापक अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता सोभा गुप्ता के पत्र के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर संज्ञान लिया और सुनवाई की. इस निर्णय को महिलाओं की गरिमा और अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक सशक्त कदम माना जा रहा है.

सुप्रीम कोर्ट के बयान की 10 बातें

1. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि महिला के पायजामे की डोरी खोलना सीधे ‘बलात्कार का प्रयास’ है, इसे केवल ‘तैयारी’ या ‘आउटरेजिंग मोडेस्टी’ नहीं माना जा सकता.

2. इलाहाबाद HC का मार्च 2025 का फैसला रद्द किया गया, जिसमें अपराध को कम गंभीर माना गया और कम सजा देने का रास्ता खुला था.

3. SC ने स्वतः संज्ञान लिया, NGO ‘We the Women’ की शिकायत और वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता की चिट्ठी पर कार्रवाई की.

4. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने POCSO एक्ट के तहत दो आरोपी के खिलाफ बलात्कार के प्रयास का सख्त आरोप बहाल किया.

5. न्यायाधीशों को महिलाओं के हालात और संवेदनशीलता समझते हुए मामलों का न्यायपूर्ण निर्णय लेने की हिदायत दी गई.

6. फैसले में कहा गया कि संवेदना और सहानुभूति न्यायपालिका का अहम हिस्सा होना चाहिए, जिससे न्याय प्रणाली प्रभावी और न्यायपूर्ण बने.

7. SC ने यह भी कहा कि फैसले की भाषा सरल होनी चाहिए, विदेशी या जटिल शब्दावली से बचना होगा.

8. न्यायपालिका में लिंग आधारित पूर्वाग्रह रोकने और संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए दिशानिर्देशों पर काम शुरू किया जाएगा.

9. एनजेए निदेशक न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस को विशेषज्ञ समिति गठित कर ‘सेंसिटिविटी और कंपैशन’ पर रिपोर्ट बनाने का निर्देश दिया गया.

10. सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला महिलाओं के प्रति अपराधों के मामलों में न्यायिक दृष्टिकोण में गंभीर बदलाव और कड़ा संदेश माना जा रहा है.

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