पाकिस्तान से आए दलित हिंदुओं को घर देना सरकार की जिम्मेदारी, 250 परिवारों को सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान से आए दलित हिंदू शरणार्थियों को बड़ी राहत देते हुए कहा कि केवल नागरिकता देना काफी नहीं, सरकार को उन्हें सम्मानजनक आवास भी देना होगा. अदालत ने 250 परिवारों की बेदखली पर फिलहाल रोक लगा दी है.
सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान से भारत आए दलित हिंदू शरणार्थियों के पक्ष में अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि केवल उन्हें भारतीय नागरिकता देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सरकार की जिम्मेदारी है कि उन्हें सम्मानजनक जीवन के लिए रहने की जगह भी उपलब्ध कराई जाए.
सोमवार को जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटेश्वर सिंह की पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो दिल्ली के मजनू का टीला स्थित सिग्नेचर ब्रिज के पास रह रहे पाकिस्तानी मूल के दलित हिंदुओं की प्रस्तावित बेदखली से जुड़ी है.
इन परिवारों को पहले भारतीय नागरिकता दी जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद वे अब भी बेदखली के खतरे में हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि “नागरिकता देना पर्याप्त नहीं है, सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इन लोगों को रहने के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक स्थान मिले.”
4 हफ्ते में सरकार से जवाब मांगा
कोर्ट ने केंद्र और संबंधित प्राधिकरणों को इस मुद्दे पर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. तब तक अदालत ने साफ आदेश दिया है कि कोई बेदखली अभियान नहीं चलाया जाएगा और ना ही कोई विकास परियोजना लागू की जाएगी जिससे इन परिवारों को हटाया जाए.
250 परिवार, 1000 से ज्यादा लोग प्रभावित
अदालत का यह अंतरिम आदेश करीब 250 परिवारों पर लागू होगा, जिनमें 1000 से ज्यादा लोग रहते हैं. ये सभी लोग लंबे समय से सिग्नेचर ब्रिज के पास झुग्गियों में रह रहे हैं और अब उनके पुनर्वास को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी.
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि सरकार को यह बताना होगा कि इन लोगों को कहां और कैसे बसाया जाएगा. कोर्ट ने कहा कि नागरिकता के बाद भी अगर कोई व्यक्ति बेघर है, तो यह मानवीय और संवैधानिक दोनों स्तर पर चिंता का विषय है, पुनर्वास के बिना बेदखली अन्यायपूर्ण होगी.
क्यों आए थे भारत?
बताया जाता है कि ये परिवार धार्मिक उत्पीड़न और सामाजिक भेदभाव के चलते पाकिस्तान से भारत आए थे. वर्षों तक शरणार्थी के रूप में रहने के बाद इन्हें हाल ही में भारतीय नागरिकता दी गई, लेकिन अब विकास परियोजनाओं के चलते इनके मौजूदा ठिकाने को हटाने की तैयारी की जा रही थी.
अब चार हफ्तों में सरकार को कोर्ट को यह बताना होगा कि इन लोगों के पुनर्वास की क्या योजना है और उन्हें स्थायी आवास कैसे मिलेगा. साथ ही क्या कोई वैकल्पिक जमीन या कॉलोनी तय की गई है? तब तक इन परिवारों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है.





