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Gold-Silver ETF Crash: सोना-चांदी के बाद ईटीएफ भी क्रैश! सुरक्षित निवेश बना सिरदर्द, 5 लाख लगाने वालों को कितना नुकसान?

सोना और चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट हो रही. सोना 20% और चांदी 41% तक टूट गई है. वहीं, Gold और Silver ETF में लोअर सर्किट लग चुका है.

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गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ क्रैश होने से निवेशकों के लाखों रुपये डूबे

( Image Source:  Sora_ AI )

Gold Silver ETF Crash: जो निवेश अब तक सबसे सुरक्षित माना जाता था, वही निवेश अब लोगों को सबसे ज़्यादा डराने लगा है. सोना और चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट का असर अब सीधे निवेशकों की जेब पर दिख रहा है. हालात ऐसे हैं कि सोना-चांदी के साथ-साथ Gold और Silver ETF भी धड़ाम हो गए हैं.

बीते कुछ दिनों में सोना अपने ऑल-टाइम हाई से करीब 20% टूट चुका है, जबकि चांदी में गिरावट 41% से ज्यादा पहुंच गई है. MCX पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना फिसलकर ₹1.36 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया है, वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी ₹2.41 लाख प्रति किलो तक लुढ़क गई है.


कीमतों में तेज गिरावट का क्या हुआ असर?

कीमतों में इस तेज गिरावट का असर ETF पर भी साफ दिखा. जहां एक समय गोल्ड-सिल्वर ETF निवेशकों की पहली पसंद थे, वहीं अब इनमें जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली है. Silver ETF शुरुआती कारोबार में 20% तक क्रैश हो गया, जबकि Gold ETF करीब 9% तक टूट गए. यानी जिन लोगों ने ETF को सुरक्षित निवेश समझकर पैसा लगाया था, उनके लिए भी यह झटका कम नहीं है.


5 लाख रुपये लगाने वालों को कितना नुकसान होगा?

अगर कोई निवेशक Silver ETF में 5 लाख रुपये लगाए हुए था, तो कुछ ही घंटों में उसका करीब 1 लाख रुपये तक का नुकसान हो गया. वहीं, Gold ETF में 5 लाख रुपये लगाने वालों को भी करीब ₹45,000 तक की चपत लग चुकी है.


कौन-सा ETF कितना गिरा?

Gold ETF में गिरावट

  • BSL Gold ETF – 7.81%
  • Motilal Oswal Gold ETF – 7.15%
  • Mirae Asset Gold ETF – 6.95%
  • ICICI Prudential Gold ETF – 5.90%
  • Kotak Gold ETF – 4.30%


Silver ETF में गिरावट

  • Tata Silver ETF – करीब 20%
  • Kotak Silver ETF – 15.90%
  • Groww Silver ETF – 15.76%
  • HDFC Silver ETF – 15.60%
  • SBI Silver ETF – 15.40%


एक्सपर्ट ने क्या कहा?

केडिया एडवायजरी के MD अजय सुरेश केडिया के मुताबिक, “जबरदस्त तेजी के बाद सोना-चांदी में यह पिछले एक दशक की सबसे बड़ी गिरावट है. रिकॉर्ड स्तरों के बाद मुनाफावसूली हावी हो गई.” उन्होंने बताया कि एक्सचेंजों ने मार्जिन बढ़ा दिया है और ETF में भारी बिकवाली हो रही है. डॉलर की मजबूती और जियो-पॉलिटिकल तनाव कम होने से सेफ-हेवन डिमांड घटी है. यानी एक्सपर्ट की सलाह साफ है कि सिर्फ सोना-चांदी पर निर्भर न रहें, पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करें.

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