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सुप्रीम कोर्ट की दो टूक: हर गली से आवारा कुत्ते हटाने का आदेश नहीं, सिर्फ संस्थानों से हटाने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मुद्दे पर बड़ा स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि उसने हर सड़क से कुत्तों को हटाने का कोई आदेश नहीं दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका निर्देश केवल अस्पताल, स्कूल और अन्य संस्थागत परिसरों से आवारा कुत्तों को हटाने तक सीमित है. कोर्ट ने डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई और कहा कि स्थानीय निकाय Animal Birth Control (ABC) नियमों को सही ढंग से लागू करने में विफल रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट की दो टूक: हर गली से आवारा कुत्ते हटाने का आदेश नहीं, सिर्फ संस्थानों से हटाने को कहा
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( Image Source:  sci.gov.in )
प्रवीण सिंह
Edited By: प्रवीण सिंह

Published on: 8 Jan 2026 11:53 AM

आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे और डॉग बाइट की घटनाओं को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा स्पष्टीकरण दिया है. शीर्ष अदालत ने साफ कहा है कि उसने हर सड़क से आवारा कुत्तों को हटाने का कोई निर्देश नहीं दिया है, बल्कि उसका आदेश सिर्फ संस्थागत परिसरों (Institutional Areas) तक सीमित है.

गुरुवार को इस मामले की सुनवाई फिर से शुरू हुई. न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत का पूरा फोकस एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों के सख्त पालन पर है, न कि आवारा जानवरों के अंधाधुंध हटाने पर.

“कुत्ते और बिल्ली स्वाभाविक दुश्मन”

सुनवाई के दौरान पीठ ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि कुत्ते और बिल्लियां स्वाभाविक रूप से एक-दूसरे के दुश्मन होते हैं. अदालत ने यह भी कहा कि यदि बिल्लियों को बढ़ावा दिया जाए तो चूहों की समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकता है, जो शहरी स्वास्थ्य के लिहाज से एक व्यावहारिक दृष्टिकोण हो सकता है. हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह की टिप्पणियां नीति-निर्माण का विकल्प नहीं हैं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के व्यापक संदर्भ में की गई हैं.

अस्पतालों और संवेदनशील इलाकों पर सवाल

पीठ ने अस्पतालों और संवेदनशील संस्थानों को लेकर कड़ा रुख अपनाया. अदालत ने सवाल किया, “अस्पताल के वार्ड में या मरीजों के आसपास आखिर कितने कुत्तों को घूमने की इजाजत दी जा सकती है?” इस टिप्पणी से साफ है कि सुप्रीम कोर्ट अस्पताल, स्कूल, सरकारी कार्यालय और अन्य सार्वजनिक संस्थानों में सुरक्षा को सर्वोपरि मान रहा है.

डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं पर चिंता

यह सुनवाई ऐसे समय में हो रही है जब देशभर में डॉग बाइट की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं. एक दिन पहले यानी बुधवार को कोर्ट ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता जताते हुए कहा था कि “हमें पता है कि ये घटनाएं हो रही हैं. बच्चे, बड़े लोग काटे जा रहे हैं, यहां तक कि मौतें भी हो रही हैं.” अदालत ने यह भी माना कि स्थानीय निकाय और नगर निगम ABC नियमों को लागू करने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं.

जजों के साथ हुए हादसों का जिक्र

सुनवाई के दौरान एक गंभीर तथ्य भी सामने आया. पीठ ने बताया कि पिछले 20 दिनों में दो जज हाईवे पर आवारा जानवरों के कारण दुर्घटनाग्रस्त हुए, जिनमें से एक जज की हालत गंभीर बनी हुई है. इससे साफ है कि समस्या सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं, बल्कि हाईवे और सार्वजनिक सड़कों पर भी बड़ा खतरा बन चुकी है.

संतुलन की कोशिश

कुल मिलाकर सुप्रीम कोर्ट ने यह संदेश दिया है कि पशु कल्याण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन जरूरी है. अदालत न तो आवारा कुत्तों के खिलाफ है और न ही उनके अंधाधुंध हटाने के पक्ष में, बल्कि वह कानून के दायरे में रहते हुए सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दे रही है.

सुप्रीम कोर्ट
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