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9 राज्यों की नई वोटर लिस्ट ने चौंकाया: 1.70 करोड़ नाम घटे, जानिए किस राज्य में कितनी हुई कटौती?

चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया के बाद नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता लिस्ट से 1.70 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए हैं. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस रिव्यू के बाद कुल वोटर बेस में करीब 7.93 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है.

9 राज्यों की नई वोटर लिस्ट ने चौंकाया: 1.70 करोड़ नाम घटे, जानिए किस राज्य में कितनी हुई कटौती?
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( Image Source:  AI GENERATED IMAGE- SORA )

SIR of 9 States: चुनाव आयोग के जरिए कराए गए स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के बाद नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाताओं की तादाद में बड़ी कमी दर्ज की गई है. शनिवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जहां-जहां आखिरी वोटर लिस्ट पब्लिश हो चुकी है, वहां कुल मिलाकर 1.70 करोड़ से अधिक नाम घटे हैं. यह कुल मतदाता आधार में 7.93 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है.

गुजरात, पुडुचेरी, लक्षद्वीप, राजस्थान, छत्तीसगढ़, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गोवा और केरल के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर्स के जरिए साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 27 अक्टूबर पिछले साल SIR शुरू होने से पहले इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल मतदाता संख्या 21.45 करोड़ से ज्यादा थी.

आखिरी एसआईआर लिस्ट के बाद कितने वोटर्स?

इस हफ्ता आखिरी लिस्ट जारी होने के बाद यह तादाद घटकर 19.75 करोड़ रह गई है. यानी कुल मिलाकर 1.70 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं की सीधे तौर पर कमी दर्ज की गई है.

किन राज्यों में आई सबसे ज्यादा गिरावट?

बड़े राज्यों में गुजरात में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई, यहां मतदाता लिस्ट में 13.4 प्रतिशत की कमी आई है. कुल 68.12 लाख नाम हटाए गए और मतदाताओं की संख्या 5.08 करोड़ से घटकर 4.40 करोड़ हो गई है.

मध्य प्रदेश में 34.35 लाख नाम हटे, जिससे मतदाता संख्या 5.74 करोड़ से घटकर 5.39 करोड़ रह गई. यह 5.96 प्रतिशत की गिरावट है. राजस्थान में 31.36 लाख नाम कम हुए और मतदाता संख्या 5.46 करोड़ से घटकर 5.15 करोड़ रह गई, जो 5.74 प्रतिशत की कमी है।य

छत्तीसगढ़ में अनुपात के लिहाज से 11.77 फीसद की बड़ी गिरावट दर्ज की गई. यहां 24.99 लाख नाम हटे और मतदाता संख्या 2.12 करोड़ से घटकर 1.87 करोड़ हो गई.

बड़े राज्यों में केरल में सबसे कम गिरावट देखी गई. यहां 3.22 प्रतिशत की कमी आई और 8.97 लाख नाम हटे. मतदाता संख्या 2.78 करोड़ से घटकर 2.69 करोड़ हो गई. गोवा में 10.76 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई, जहां 1.27 लाख नाम सूची से हटाए गए.

केंद्र शासित प्रदेशों के क्या है हाल?

केंद्र शासित प्रदेशों में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में सबसे अधिक प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई. यहां 16.87 प्रतिशत की कमी आई. कुल 52,364 नाम हटे और मतदाता संख्या 3.10 लाख से घटकर 2.58 लाख रह गई. पुडुचेरी में 7.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और 77,367 नाम हटाए गए. वहीं लक्षद्वीप में बहुत मामूली कमी देखी गई. यहां सिर्फ 206 मतदाता कम हुए, जो 0.36 प्रतिशत गिरावट है.

बिहार का आंकड़ा क्या कहता है?

अगर बिहार को भी शामिल किया जाए, जहां विधानसभा चुनाव से पहले SIR कराया गया था, तो कुल शुद्ध कटौती 2.16 करोड़ तक पहुंच जाती है. यह 7.37 प्रतिशत की गिरावट है. बिहार में जून 2024 में वोटर्स की तादाद 7.89 करोड़ थी, जो सितंबर 2024 तक घटकर 7.43 करोड़ रह गई.

किन राज्यों में जारी है एसआईआर?

वर्तमान में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया चल रही है, जहां लगभग 60 करोड़ मतदाता शामिल हैं. बाकी 40 करोड़ मतदाताओं को 17 राज्यों और पांच केंद्र शासित प्रदेशों में कवर किया जाएगा.

तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश की अंतिम मतदाता सूचियां अभी पूरी तरह जारी नहीं हुई हैं. तमिलनाडु की आखिरी लिस्ट सोमवार को आने की संभावना है, जबकि पश्चिम बंगाल में इसे चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाएगा. उत्तर प्रदेश में 6 अप्रैल को आखिरी लिस्ट पब्लिश की जाएगी.

क्या कोर्ट तक पहुंच गया है मामला?

नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में SIR का कार्यक्रम कई बार बदला गया. बिहार की तरह तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में भी राजनीतिक दलों ने इस प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.

किन लोगों के नाम हटाए गए?

SIR के दौरान मतदाताओं को नाम जोड़ने, सुधार करने और हटाने के लिए आवेदन करने की अनुमति दी गई थी. अधिकारियों के मुताबिक, जिन लोगों ने आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए या जिनके रिकॉर्ड पुराने वोटर्स लिस्ट से मेल नहीं खा सके, उनके नाम हटाए गए हैं. चुनाव आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के दौरान मतदाता सूची की गहन जांच की गई, जिसमें नाम जोड़ने, संशोधन और हटाने के लिए आवेदन लिए गए. इस प्रक्रिया में उन नामों को हटाया गया, जहां संबंधित व्यक्ति आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सके, उनकी पहचान और पते का सत्यापन नहीं हो पाया, या उनके रिकॉर्ड पुराने निर्वाचन रोल से मेल नहीं खा सके. इसके अलावा मृत और शिफ्ट हो जाने वाले मतदाताओं के नाम भी सूची से हटाए गए.

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