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बुजुर्गों, विकलांगों और... बंगाल में SIR पर बवाल के बीच चुनाव आयोग की BLO को चेतावनी, अगर हुए ये उल्लंघन तो मिलेगी कड़ी सजा

चुनाव प्रक्रिया को मानवीय और संवेदनशील बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है. आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि यदि 85 वर्ष या उससे अधिक आयु के किसी मतदाता या किसी बीमार अथवा दिव्यांग मतदाता को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की सुनवाई के लिए बुलाया गया, तो संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) और उनके बाकी साथियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

बुजुर्गों, विकलांगों और... बंगाल में SIR पर बवाल के बीच चुनाव आयोग की BLO को चेतावनी, अगर हुए ये उल्लंघन तो मिलेगी कड़ी सजा
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विशाल पुंडीर
Edited By: विशाल पुंडीर

Published on: 2 Jan 2026 9:13 AM

चुनाव प्रक्रिया को मानवीय और संवेदनशील बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है. आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि यदि 85 वर्ष या उससे अधिक आयु के किसी मतदाता या किसी बीमार अथवा दिव्यांग मतदाता को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की सुनवाई के लिए बुलाया गया, तो संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) और उनके बाकी साथियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

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यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पहले भी बुजुर्ग और अस्वस्थ मतदाताओं को लंबी कतारों में खड़े होने की मजबूरी को लेकर सवाल उठते रहे हैं. मीडिया रिपोर्टों में इन मतदाताओं की पीड़ा और परेशानी को बार-बार उजागर किया गया है, जिसके बाद चुनाव आयोग ने जमीनी स्तर पर जिम्मेदारी तय करने का संकेत दिया है.

29 दिसंबर को जारी हुआ था निर्देश

29 दिसंबर को पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) और जिलाधिकारियों (DM) को लिखित निर्देश जारी किए थे. इसमें कहा गया था कि 85 वर्ष या उससे अधिक आयु के मतदाता, बीमार व्यक्ति और दिव्यांग मतदाता यदि स्वयं कोई विशेष अनुरोध न करें, तो उन्हें SIR से जुड़ी सुनवाई के लिए व्यक्तिगत रूप से नहीं बुलाया जाना चाहिए. निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया था कि यदि ऐसे मतदाताओं को पहले ही नोटिस जारी हो चुके हैं, तो संबंधित अधिकारी उन्हें फोन पर सूचित करें कि उन्हें उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं है और सत्यापन उनके आवास पर जाकर किया जाए.

निर्देशों के बावजूद सामने आईं शिकायतें

इन निर्देशों के बावजूद CEO कार्यालय को राज्य के विभिन्न हिस्सों से कई शिकायतें मिलीं. रिपोर्ट्स में बताया गया कि बुजुर्गों, बीमार व्यक्तियों, दिव्यांगों और यहां तक कि गर्भवती महिलाओं को भी SIR से संबंधित सुनवाई के लिए व्यक्तिगत रूप से बुलाया गया. इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग ने इसे निर्देशों का सीधा उल्लंघन माना है और जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

BLO पर गिरेगी गाज

चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारी ने इस मुद्दे पर नाराजगी जताते हुए कहा "हमने डीईओ को बताया था कि अगर निर्देशों का उल्लंघन करते हुए एक भी घटना घटित होती है, तो बीएलओ के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. बीएलओ के साथी क्या कर रहे हैं? टूटे पैर या गंभीर बीमारी से पीड़ित कोई भी व्यक्ति सुनवाई स्थलों पर क्यों जाता है? बीएलओ घर-घर जाकर ऐसे मतदाताओं का रिकॉर्ड रखेंगे. इन मतदाताओं की सुनवाई सुनवाई प्रक्रिया के अंतिम सप्ताह में उनके घरों में होगी."

घर-घर जाकर होगी सुनवाई

नए निर्देशों के अनुसार, 85 वर्ष से अधिक आयु के मतदाता, गंभीर रूप से बीमार या दिव्यांग मतदाताओं की SIR सुनवाई अब उनके घरों पर जाकर की जाएगी. इसके लिए BLO को घर-घर जाकर रिकॉर्ड तैयार करने और सत्यापन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. चुनाव आयोग का मानना है कि इससे न केवल बुजुर्ग और असहाय मतदाताओं को राहत मिलेगी, बल्कि चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता और संवेदनशीलता भी बनी रहेगी.

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