बंगाल में SIR को लेकर कोलकाता के रेड लाइट एरिया सोनागाछी में क्या है माहौल? सेक्स वर्कर्स के वोटिंग राइट पर क्या है EC का रुख
कोलकाता के रेड-लाइट एरिया सोनागाछी (Sonagachi) में जारी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर सेक्स वर्कर्स खौफ में हैं. उन्हें इस बात का डर सता रहा है कि वोटर सूची से उनके नाम भी ना हटा दिए जाएं. गैर सरकारी संगठनों ने सेक्स वर्कर्स के अधिकारों की रक्षा के लिए चुनाव आयोग से जरूरी कदम उठाने की मांग की है. जानिए, सोनागाछी की अहमियत और क्या है वहां का माहौल?
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के 23 साल बाद हुए विशेष पुनरीक्षण (SIR) से Election Commission of India (EC) का मकसद मतदाता डेटाबेस अपडेट करना है. लेकिन कोलकाता के रेड-लाइट जिले सोनागाछी में यह प्रक्रिया खासी बेचैनी लेकर आई है. हजारों सेक्स वर्कर्स का कहना है कि दस्तावेजों की कमी या उनके पास पारिवारिक रिकॉर्ड न होने के कारण, ऐसे लोगों का नाम वोटर सूची से हटाए जाने का खतरा है. इस बात को ध्यान में रखते हुए कई गैर सरकारी संगठनों ने एसआईआर को मतदान अधिकारों की वंचना की प्रक्रिया बता रहे हैं. इन संगठनों ने ईसी से पत्र लिखा है. पत्र के जरिए चुनाव आयोग से इस समस्या का समाधान निकालने की मांग की गई है.
SIR के बीच सोनागाछी चर्चा में क्यों?
सोनागाछी एशिया के सबसे बड़े रेड-लाइट एरियाओं में से एक है. यहां हजारों सेक्स वर्कर्स रहती हैं. पिछले दशकों में कई सेक्स वर्कर्स ने स्थानीय NGO जैसे Durbar Mahila Samanwaya Committee (DMSC) की मदद से वोटर कार्ड, आधार, अन्य पहचान प्राप्त किए थे. साल 2007 में एक अभियान के तहत कई सेक्स वर्कर्स को वोटर-ID मिला था.
समस्या पर विचार करे EC
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक सोनागाछी के दरबार महिला समन्वय समिति कल्याण (DMSC) ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज कुमार अग्रवाल को पत्र लिखकर एसआईआर के दौरान यौनकर्मी समुदाय के लिए विशेष सहायता की मांग की है. दरबार महिला समन्वय समिति की अधिकारियों का कहना है कि, "हम सभी SIR के तहत नामांकन कराना चाहते हैं. यहां की अधिकांश महिलाओं ने 2002 की ड्राफ्ट सूची में नाम दर्ज नहीं कराया है, क्योंकि यह पहला साल था, जब सभी यौनकर्मियों को पहली बार मतदाता पहचान पत्र मिला था. हम चुनाव आयोग को बताना चाहते हैं कि हम अपने पास मौजूद दस्तावेजों के साथ SIR के तहत नामांकन कराना चाहते हैं, क्योंकि हम सभी भारतीय नागरिक हैं."
अलग से लगे वेरिफिकेशन कैंप
DMSC और अन्य संगठनों ने EC से आग्रह किया है कि सोनागाछी के सेक्स वर्कर्स को दस्तावेजों की कमी के बावजूद वोटर सूची में शामिल किया जाए. उन्होंने मांग की है कि SIR प्रक्रिया के तहत उनके लिए विशेष सत्यापन कैंप लगाए जाएं. चुनाव आयोग ने कहा है कि इस समूह की समस्या आयोग के संज्ञान में है. EC अब सोनागाछी में विशेष सहायता व सत्यापन कैंप लगाने पर विचार कर रहा है. ताकि जुर्माना, दस्तावेजों की कमी या पारिवारिक रिकॉर्ड न होने के कारण कोई वंचित न रहे.
एसआईआर जरूरी क्यों?
वेस्ट बंगाल में एसआईआर (SIR) लागू करना चुनाव आयोग के लिए एक चुनौती है. उत्तरी कोलकाता का यह क्षेत्र चिंता का विषय बना है. चुनाव आयोग को काफी कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. चुनाव निकाय को इन असहाय महिलाओं का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है. ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ये महिलाएं आगामी विधानसभा चुनाव में अपना वोट डाल सकें और सब कुछ गंवा चुकी इन महिलाओं को और परेशान न होना पड़े.
डर का माहौल
इस बार 2025 में राज्यव्यापी SIR के तहत मतदाता सूची पुनः देखी जा रही है. 18 लाख से अधिक फॉर्म वितरित किए गए हैं. SIR में 2002 की मतदाता सूची व उस समय के परिवार डेटा (पैरेंटल रिकॉर्ड) की मांग की जा रही है. सोनागाछी में कई सेक्स वर्कर्स के पास उनके माता-पिता या जन्मस्थान के दस्तावेज नहीं हैं. क्योंकि उन्होंने सालों पहले अपना घर छोड़ दिया था. कई लोगों को डर है कि उनकी वोटिंग पहचान व मतदाता सूची से उनका नाम हटा दिया जाएगा. यानी उनका वोटिंग अधिकार छीन सकता है.
सेक्स वर्कर्स बदलने लगे आवास
एसआईआर को लेकर सोनागाछी में यह चर्चा है कि इससे सेक्स वर्कर्स मतदान के अधिकार से वंचित हो जाएंगे. हालांकि, पब्लिक ऐसा किसी ने नहीं कहा है, लेकिन परदे के पीछे से ऐसा नैरेटिव बनाया गया है. यही वजह है कि सेक्स वर्कर्स अपने मत के अधिकार को लेकर चिंतित हैं. इस डर का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि कई सेक्स वर्कर्स अपने निवास स्थान बदलने लगे हैं.
इन समुदाय के लोगों का कहना है कि यह मतदान अधिकार की लड़ाई थी. अब इसी अधिकार को बचाने की जद्दोजहद शुरू हो गई है. कई लोग भविष्य में वोट न कर पाने के डर से बेचैन हैं.
रेड लाइट एरिया क्यों बना विवाद का केंद्र?
सोनागाछी सेक्स वर्कर्स का सबसे बड़ा इलाका है, जहां लाखों लोग रहते और काम करते हैं. उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति, पारिवारिक पृष्ठभूमि व दस्तावेज सामान्य नहीं होती. 2002 के बाद वोटर-ID पाने वालों में से कई SIR में 2002 वोटर-लिस्ट की मांग पूरी नहीं कर सकते, जिससे उनका मतदान अधिकार खतरे में है.
इस इलाके के इतिहास, सेक्स वर्कर्स की अस्थिरता व माइग्रेशन, पारिवारिक अपडेट की कमी मिलाकर SIR को उनके लिए स्वतंत्रता या बहिर्हार जैसा बना देते हैं. अगर लाखों लोग अचानक वोटर सूची से हट जाते हैं, तो उनकी राजनीतिक भागीदारी, वोट बैंक, आवाज सब प्रभावित होंगे.





