Shiv Sena में फिर बगावत का काउंटडाउन? राउत का दावा- MPs को 50-50 करोड़ का ऑफर, आखिर महाराष्ट्र में क्या चल रहा? पूरी कहानी
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना (UBT) में संभावित बगावत की चर्चा तेज हो गई है. रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि उद्धव ठाकरे गुट के 9 में से 6 सांसद पार्टी छोड़ सकते हैं.
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे के लिए वर्ष 2022 से राजनीतिक हालात लगातार चुनौतीपूर्ण रहे हैं. एकनाथ शिंदे की अगुवाई में हुई बगावत ने न केवल पार्टी को दो हिस्सों में बांट दिया था, बल्कि शिवसेना का नाम और चुनाव चिन्ह भी उनसे छिन गया था. अब चार साल बाद पार्टी एक बार फिर संभावित टूट की अटकलों के कारण चर्चा में है. इस बात मुहर संजय राउत के ट्वीट से भी लगती है, उन्होंने साफ कहा है कि शिवसेना के सांसदों को 15 करोड़ रुपये ऑफर हुए हैं.
सूत्रों के मुताबिक, 2024 लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने वाले उद्धव ठाकरे गुट के 9 सांसदों में से 6 सांसद पार्टी छोड़ सकते हैं. बताया जा रहा है कि यह घटनाक्रम 19 जून को होने वाले शिवसेना के स्थापना दिवस से पहले सामने आ सकता है.
क्या बंगाल जैसा होगा खेला?
रिपोर्ट्स के अनुसार, संभावित बगावत का स्वरूप पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के टूटने जैसी स्थिति से मिलता-जुलता हो सकता है. बताया जा रहा है कि दो सांसद पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं, जबकि अन्य चार सांसद भी दिल्ली आने वाले हैं. इन सांसदों की एक बैठक एकनाथ शिंदे के बेटे और सांसद श्रीकांत शिंदे के आवास पर होने की संभावना जताई जा रही है. इसके बाद सांसदों के लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलने की भी चर्चा है.
कैसे शुरू हुई शिव सेना टूट की चर्चा?
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत उस समय हुई जब उद्धव ठाकरे के आवास 'मातोश्री' में आयोजित बैठक में 9 में से 5 सांसद मौजूद नहीं रहे. इसके बाद पार्टी में संभावित टूट की अटकलें तेज हो गईं. हालांकि, उद्धव ठाकरे के करीबी सहयोगी संजय राउत ने सफाई देते हुए कहा कि ओमप्रकाश राजेनिंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश बापुराव पाटिल अष्टीकर और संजय देशमुख ने बैठक में वर्चुअली हिस्सा लिया था. वहीं सांसद संजय जाधव ने उद्धव ठाकरे से फोन पर बातचीत की थी और बाद में मिलने की बात कही थी.
इसके बावजूद संदेह तब और बढ़ गया जब सांसद संजय देशमुख ने एकनाथ शिंदे गुट के केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव से मुलाकात की. हालांकि देशमुख ने इसे गैर-राजनीतिक मुलाकात बताया, लेकिन इससे अटकलों को और बल मिला.
उद्धव ठाकरे ने क्या कहा?
दो दिनों तक चुप्पी साधने के बाद उद्धव ठाकरे ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी. पार्टी सांसदों की बैठक में उन्होंने 2022 की बगावत का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें पहले से ही संभावित विद्रोह की भनक थी, लेकिन उन्होंने किसी पर दबाव नहीं डाला. उद्धव ठाकरे ने कहा, "आज का दिन शायद मेरा न हो, लेकिन कल जरूर मेरा होगा. तब तक हमें धैर्य रखना होगा और परिस्थितियों का सामना करना होगा."
उन्होंने आगे कहा, "मैं राज्य का मुख्यमंत्री रह चुका हूं. क्या लोगों को लगता है कि मुझे कुछ पता नहीं था? मुझे पहले से अंदाजा था कि क्या होने वाला है. लेकिन मैंने किसी पर दबाव नहीं बनाया और न ही किसी के खिलाफ जांच की फाइलें खुलवाईं."
पार्टी के सीनियर नेता अनिल देसाई ने क्या कहा?
हालांकि उद्धव ठाकरे के बयान के बावजूद पार्टी के वरिष्ठ नेता अनिल देसाई ने किसी भी तरह की टूट की संभावना से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे नियमित रूप से सांसदों की बैठक बुलाते हैं और सभी सांसदों ने उनके नेतृत्व पर भरोसा जताया है.
अनिल देसाई ने कहा, "ऐसी कोई बात नहीं है. सभी सांसद उद्धव जी के नेतृत्व के साथ हैं. किसी पर कोई दबाव नहीं है. इस तरह की बातें समय-समय पर सामने आती रहती हैं, लेकिन इनमें कोई सच्चाई नहीं है."
संजय राउत ने क्या लगाया इल्जाम?
मंगलवार को जब कुछ सांसद दिल्ली पहुंचे तो शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पार्टी में टूट कराने के लिए सांसदों को पैसे की पेशकश की जा रही है.
संजय राउत ने अपने पोस्ट में लिखा, "अपना सपना मनी मनी! यह चौंकाने वाला और शर्मनाक है कि महाराष्ट्र के सांसदों को कथित तौर पर आज रात पार्टी बदलने के लिए 15-15 करोड़ रुपये का ऑफर दिया जा रहा है." राउत ने अपने पोस्ट में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी टैग किया. इसके बाद संजय राउत ने लिखा कि 50-50 करोड़ रुपये हर एक एमपी को मिलने वाले हैं. 15 करोड़ रुपये तो एडवांस के लिए हैं.
फिलहाल शिवसेना (UBT) में संभावित टूट को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हैं. हालांकि पार्टी नेतृत्व लगातार किसी भी बगावत से इनकार कर रहा है, लेकिन आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है.




