रंभा तीज आज: जानिए शुभ तिथि, पूजा विधि और क्यों कहते हैं इसे रंभा तीज
हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह की तृतीया तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है. ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को रंभा तृतीया या रंभा तीज के रूप में मनाया जाता है.
Rambha Teej
हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह की तृतीया तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है. ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को रंभा तृतीया या रंभा तीज के रूप में मनाया जाता है. यह व्रत विशेष रूप से सुखी वैवाहिक जीवन, अखंड सौभाग्य और मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए रखा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधिपूर्वक भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है. भविष्य पुराण में भी रंभा तृतीया व्रत का उल्लेख मिलता है.
कहा जाता है कि यह व्रत पापों का नाश करने वाला और शुभ फल देने वाला होता है. विवाहित महिलाएं जहां अपने दांपत्य जीवन की सुख-शांति के लिए यह व्रत रखती हैं, वहीं अविवाहित कन्याएं योग्य वर की कामना से इस व्रत को करती हैं.
रंभा तीज 2026 की तिथि
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का आरंभ 16 जून 2026, मंगलवार को रात 12 बजकर 53 मिनट पर होगा. यह तिथि 17 जून 2026, बुधवार को रात 9 बजकर 49 मिनट तक रहेगी. उदया तिथि के आधार पर रंभा तृतीया का व्रत 17 जून 2026, बुधवार को रखा जाएगा.
रंभा तृतीया पूजा विधि
1. सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
2. घर के पूजा स्थल को साफ करके भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें.
3. सबसे पहले भगवान गणेश का पूजन करें और व्रत का संकल्प लें.
4. इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती को जल, दूध और पंचामृत अर्पित करें.
5. चंदन, फूल, माला, दूर्वा और बेलपत्र अर्पित कर विधिपूर्वक पूजा करें.
6. माता पार्वती को सुहाग की वस्तुएं जैसे चुनरी, सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी और श्रृंगार सामग्री अर्पित करें.
7. धूप और दीप जलाकर “ॐ नमः शिवाय” और “ॐ गौर्यै नमः” मंत्र का जाप करें.
8. रंभा तृतीया व्रत कथा का पाठ करें और अंत में भगवान शिव-पार्वती की आरती करें.
9. पूजा के बाद परिवार की सुख-समृद्धि और वैवाहिक सुख की कामना करें.
रंभा तृतीया का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता है कि यह व्रत देवलोक की अप्सरा रंभा ने अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए किया था जिसके कारण इसको रंभा तीज के नाम से जाना जाता है. इसलिए श्रद्धा और विधि-विधान से रंभा तृतीया का व्रत करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है. महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है और वैवाहिक जीवन में प्रेम बना रहता है. कहा जाता है कि माता पार्वती ने भी भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए इस प्रकार का व्रत और तप किया था. यही कारण है कि यह व्रत विशेष रूप से महिलाओं के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. इस व्रत के प्रभाव से परिवार में खुशहाली आती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.




