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उद्धव ठाकरे की शिवसेना में फिर बगावत, 6 सांसदों ने खोला मोर्चा! क्या कांग्रेस से विलय के डर ने बढ़ाई दरार? जानें अब तक क्या-क्या हुआ

महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) के अंदर बड़ा संकट खड़ा हो गया है. पार्टी के 6 लोकसभा सांसदों ने बैठक से दूरी बना ली और बगावत के संकेत दिए हैं. बागी सांसदों का दावा है कि कांग्रेस से संभावित विलय की आशंका के कारण उन्होंने अलग रास्ता चुना, जबकि उद्धव गुट इसे पार्टी तोड़ने की कोशिश बता रहा है.

Shiv Sena UBT Split Crisis: Six MPs Rebel, Congress Merger Fear Sparks Maharashtra Political Battle
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उद्धव ठाकरे

( Image Source:  ANI )

Shiv Sena UBT Crisis: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी तूफान खड़ा हो गया है. उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (UBT) में अंदरूनी कलह अब खुली बगावत में बदलती दिख रही है. पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने गुरुवार को दिल्ली में बुलाई गई संसदीय दल की बैठक से दूरी बना ली, जिसके बाद पार्टी में टूट की अटकलें तेज हो गई हैं.

इस बगावत के पीछे सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है कि कुछ सांसदों को डर है कि शिवसेना (UBT) भविष्य में कांग्रेस के साथ विलय कर सकती है. बागी खेमे का आरोप है कि पार्टी की दिशा बदल रही है और वह अपनी मूल पहचान से दूर जा रही है. यह महाराष्ट्र में पिछले चार साल में तीसरी बड़ी राजनीतिक टूट की स्थिति है. इससे पहले 2022 में शिवसेना में और 2023 में Sharad Pawar की NCP में बड़ी फूट देखने को मिली थी.

छह सांसदों ने बनाई दूरी, टूट की चर्चा तेज

गुरुवार को शिवसेना (UBT) ने दिल्ली में सांसदों की बैठक बुलाई थी, जिसमें पार्टी नेतृत्व यह तय करना चाहता था कि सांसदों का समर्थन अभी भी Uddhav Thackeray के साथ है या नहीं... लेकिन 9 में से 6 सांसद बैठक में नहीं पहुंचे. सिर्फ Arvind Sawant, Anil Desai और Rajabhau Waje मौजूद रहे. जानकारों के मुताबिक, अगर किसी गुट को अलग पहचान बनानी है तो उसे दलबदल कानून के तहत कम से कम दो-तिहाई सांसदों का समर्थन चाहिए. यही वजह है कि छह सांसदों का एक साथ अलग होना राजनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

बागी सांसदों का आरोप- कांग्रेस के करीब जा रही थी शिवसेना UBT

शिंदे गुट से जुड़े नेताओं का दावा है कि कई सांसदों को डर था कि शिवसेना (UBT) धीरे-धीरे कांग्रेस के साथ जाने की तैयारी कर रही है. शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के ने आरोप लगाया कि कई सांसदों ने उद्धव ठाकरे से मुलाकात की कोशिश की, लेकिन उन्हें पर्याप्त जवाब नहीं मिला. बागी नेताओं ने Sanjay Raut के उस बयान का भी हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर बनी पार्टियों के दोबारा साथ आने की बात कही थी. बागियों का कहना है कि इसी वजह से उन्हें लगा कि शिवसेना (UBT) भी उसी दिशा में जा सकती है.

संजय राउत का पलटवार, "गद्दारी की कीमत चुकानी होगी"

वहीं संजय राउत ने बागी सांसदों पर जमकर हमला बोला. उन्होंने उन्हें 'गद्दार' और 'बेईमान' बताते हुए कहा कि पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर जीतने वाले सांसद अगर व्हिप का उल्लंघन करेंगे तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. राउत ने दावा किया कि इन सांसदों के खिलाफ अयोग्यता की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है.

छह बागी सांसदों को Y+ सुरक्षा

बढ़ते तनाव के बीच महाराष्ट्र सरकार ने छह बागी सांसदों की सुरक्षा बढ़ा दी है. महाराष्ट्र इंटेलिजेंस विभाग ने उन्हें Y+ कैटेगरी की सुरक्षा दी है. सुरक्षा पाने वाले सांसदों में संजय दीना पाटिल, नागेश पाटिल अस्टिकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, संजय देशमुख और संजय जाधव शामिल हैं. सरकार का कहना है कि संभावित खतरे को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। हालांकि, राउत ने इस पर भी हमला करते हुए कहा कि अगर उन्हें भरोसा है तो बिना सुरक्षा के जनता के बीच जाएं.

महाराष्ट्र शिवसेना संकट: अब तक के 10 बड़े अपडेट

1. महाराष्ट्र की राजनीति में 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चा के बीच उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना (UBT) में बड़ा संकट खड़ा हो गया है. पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने अलग रास्ता चुन लिया है. इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष Om Birla से मुलाकात कर खुद को अलग गुट के रूप में मान्यता देने की मांग की है. साथ ही उन्होंने Eknath Shinde के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ जाने की इच्छा जताई है.

2. बागी सांसदों का कहना है कि उन्हें आशंका थी कि शिवसेना (UBT) भविष्य में कांग्रेस के साथ विलय कर सकती है. उनका आरोप है कि पार्टी अपनी मूल विचारधारा से दूर जा रही है. सांसदों ने दावा किया कि शिवसेना की स्थापना कांग्रेस में शामिल होने के लिए नहीं हुई थी और पार्टी को Bal Thackeray के हिंदुत्व के रास्ते पर वापस जाना चाहिए.

3. बागी सांसदों ने Sanjay Raut के उस बयान को भी वजह बताया जिसमें उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर बनी पार्टियों के दोबारा साथ आने की बात कही थी. उनका कहना है कि जब राउत ने Mamata Banerjee और उनकी पार्टी को कांग्रेस के साथ आने की सलाह दी, तो उन्हें लगा कि भविष्य में शिवसेना (UBT) के साथ भी ऐसा हो सकता है.

4. बगावत की पूरी तैयारी बेहद गोपनीय तरीके से हुई. 16 जून की रात कई बागी सांसद अलग-अलग रास्तों से दिल्ली पहुंचे और बैठकों का दौर शुरू हुआ. 17 जून को कुछ सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की और अलग बैठने की मांग वाला पत्र सौंपा. इसके बाद यह साफ हो गया कि शिवसेना (UBT) में अंदरूनी टूट अब खुलकर सामने आ चुकी है.

5. बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र देकर खुद को अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की है. उनका अगला कदम शिंदे गुट में शामिल होना बताया जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, सांसद जल्द ही Eknath Shinde से मुलाकात कर अपनी राजनीतिक दिशा स्पष्ट कर सकते हैं.

6. बगावत की खबर सामने आने के बाद उद्धव ठाकरे गुट ने दिल्ली में संसदीय दल की आपात बैठक बुलाई थी. सभी सांसदों को तीन लाइन का व्हिप जारी किया गया था, लेकिन 9 में से केवल 3 लोकसभा सांसद ही बैठक में पहुंचे. अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजभाऊ वाजे ने बैठक में हिस्सा लिया, जबकि बाकी 6 सांसद अनुपस्थित रहे.

7. उद्धव ठाकरे गुट से अलग होने वाले सांसदों में ओमराजे निंबालकर, संजय देशमुख, संजय बंदू जाधव, संजय दीना पाटिल, नागेश पाटिल आष्टीकर और भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल हैं. इन सांसदों के अलग होने से शिवसेना (UBT) के लोकसभा में संख्या बल पर बड़ा असर पड़ा है। यही संख्या इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम भूमिका निभा रही है.

8. दल-बदल कानून के तहत किसी भी पार्टी के सांसदों को अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन चाहिए. शिवसेना (UBT) के पास लोकसभा में 9 सांसद हैं और दो-तिहाई संख्या के लिए 6 सांसदों की जरूरत थी. चूंकि ठीक 6 सांसद एक साथ अलग हुए हैं, इसलिए फिलहाल उनकी सदस्यता पर खतरा नहीं माना जा रहा है.

9.शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने बागी सांसदों पर जमकर निशाना साधा है. उन्होंने उन्हें पार्टी और विचारधारा के साथ धोखा करने वाला बताया. राउत ने कहा कि पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर जीतने वाले सांसदों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा.

10. अब सबकी नजरें 20 जून पर टिकी हैं, जब शिवसेना स्थापना दिवस के आसपास बागी सांसद अपना अगला कदम घोषित कर सकते हैं. अगर ये सांसद शिंदे गुट में शामिल होते हैं तो महाराष्ट्र में एक बार फिर शिवसेना की मूल पहचान और नेतृत्व को लेकर बड़ा राजनीतिक संघर्ष शुरू हो सकता है. यह महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों की तीसरी बड़ी टूट होगी.

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