क्या कांग्रेस में लौटेंगे ममता बनर्जी, शरद पवार या अन्य 'बागी बच्चे'? जानिए विपक्षी एकता के बीच क्यों उठ रहा 'घर वापसी' का सवाल
बीजेपी के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव के बीच कांग्रेस से अलग होकर अपनी-अपनी पार्टियां बनाने वाले नेताओं की 'घर वापसी' की चर्चा ने विपक्षी राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. ममता बनर्जी, शरद पवार जैसे दिग्गजों के सामने सवाल है कि क्या BJP के बढ़ते प्रभाव के बीच कांग्रेस के साथ लौटना फायदेमंद होगा या अपनी अलग पहचान बचाए रखना बेहतर...
ममता, पवार और कांग्रेस के रिश्तों का पूरा गणित
Mamata Banerjee Sharad Pawar Congress Return Debate: कांग्रेस से अलग होकर अपनी पहचान बनाने वाले कई बड़े नेता और दल आज बीजेपी के बढ़ते प्रभाव के सामने नई चुनौती का सामना कर रहे हैं. इसी बीच सवाल उठ रहा है कि क्या कभी कांग्रेस छोड़कर अपनी राजनीतिक जमीन बनाने वाले ममता बनर्जी, शरद पवार जैसे नेता फिर से कांग्रेस के साथ आ सकते हैं?
हालांकि TMC और कांग्रेस ने मर्जर की खबरों को खारिज कर दिया है, लेकिन इस बहस ने विपक्षी राजनीति में बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है-क्या बीजेपी के मुकाबले के लिए विपक्ष को एक होना चाहिए या अपनी-अपनी पहचान के साथ गठबंधन ही बेहतर रास्ता है?
‘घर वापसी’ की चर्चा क्यों शुरू हुई?
कुछ समय पहले तक ममता बनर्जी और शरद पवार जैसे नेता कांग्रेस से अलग होकर अपनी-अपनी राजनीतिक ताकत बना चुके थे, लेकिन अब बदले हुए राजनीतिक समीकरणों ने इस सवाल को फिर जिंदा कर दिया है कि क्या कांग्रेस से निकले दल वापस उसी परिवार में लौट सकते हैं?
इस चर्चा को हवा तब मिली जब शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने सुझाव दिया कि कांग्रेस से अलग होकर बने दलों को फिर एक साथ आना चाहिए. उन्होंने शरद पवार से ऐसे दलों को जोड़ने की पहल करने की अपील भी की... लेकिन सवाल यह है कि जो नेता कभी कांग्रेस छोड़कर अपनी पहचान बना चुके हैं, क्या वे दोबारा उसी पार्टी के अंदर लौटना चाहेंगे?
1. ममता बनर्जी ने कांग्रेस क्यों छोड़ी थी?
ममता बनर्जी ने 1998 में कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस (All India Trinamool Congress) बनाई थी. वजह थी पश्चिम बंगाल में लंबे समय से सत्ता में रही वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ कांग्रेस की कमजोर रणनीति. ममता को लगा कि कांग्रेस के साथ रहकर बंगाल की राजनीति नहीं बदली जा सकती. उन्होंने अलग रास्ता चुना और 2011 में वही काम कर दिखाया जो कांग्रेस दशकों में नहीं कर पाई- 34 साल पुरानी लेफ्ट सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया. यानी कांग्रेस छोड़ना उनके लिए राजनीतिक नुकसान नहीं बल्कि ताकत बनाने वाला कदम साबित हुआ.
2. शरद पवार की कहानी अलग थी
शरद पवार ने 1999 में कांग्रेस से अलग होकर Nationalist Congress Party बनाई. उनका विवाद सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे को लेकर था. हालांकि विचारधारा के स्तर पर NCP लंबे समय तक कांग्रेस के करीब रही और कई बार दोनों ने मिलकर सरकार भी चलाई. लेकिन महाराष्ट्र में शरद पवार ने अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाई.
आज स्थिति बदल गई है. NCP में टूट के बाद पार्टी और चुनाव चिन्ह पर उनका नियंत्रण खत्म हो चुका है, जिससे उनकी राजनीतिक ताकत पर असर पड़ा है.
3. बीजेपी के उभार ने बदली पूरी राजनीति
जब ममता और पवार ने कांग्रेस छोड़ी थी, तब बीजेपी आज जैसी मजबूत स्थिति में नहीं थी. पिछले एक दशक में बीजेपी ने कई राज्यों में अपनी पकड़ बनाई. कभी कांग्रेस के कमजोर होने से जो राजनीतिक जगह क्षेत्रीय दलों ने भरी थी, अब वही दल बीजेपी से मुकाबला कर रहे हैं. यही वजह है कि कई क्षेत्रीय पार्टियों को अब राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत विपक्ष की जरूरत महसूस हो रही है.
4. क्या कांग्रेस के पास वापसी का मौका है?
कांग्रेस के लिए यह बहस सुनने में अच्छी लग सकती है, लेकिन जमीन पर कई सवाल हैं. अगर ममता बनर्जी या शरद पवार वापस कांग्रेस में आते हैं तो,
- क्या वे राहुल गांधी या कांग्रेस नेतृत्व के तहत काम करेंगे?
- क्या उनके पुराने कार्यकर्ता इसे स्वीकार करेंगे?
- क्या दशकों से एक-दूसरे के खिलाफ लड़ने वाले नेता साथ आ पाएंगे?
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और TMC की राजनीति लंबे समय से एक-दूसरे के विरोध में रही है. ऐसे में सिर्फ घोषणा से संगठन एक नहीं हो सकते.
5. क्या INDIA गठबंधन पहले से यही काम नहीं कर रहा?
विपक्षी एकता के लिए Indian National Developmental Inclusive Alliance (INDIA ब्लॉक) पहले से मौजूद है. कांग्रेस, TMC, DMK, शिवसेना (UBT), NCP और अन्य दल एक मंच पर बीजेपी के खिलाफ रणनीति बनाते हैं, लेकिन अपनी अलग पहचान बनाए रखते हैं. 2024 लोकसभा चुनाव में भी विपक्षी दल अलग-अलग रहकर साथ लड़े और बीजेपी की सीटें कम हुईं. इससे यह तर्क मजबूत होता है कि विपक्षी एकता के लिए विलय जरूरी नहीं है.
6. क्या मर्जर से कांग्रेस मजबूत होगी?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक सिर्फ बड़े नेताओं की वापसी से कांग्रेस मजबूत नहीं होगी. कांग्रेस को जरूरत है;
- मजबूत राज्य संगठन
- स्थानीय नेतृत्व
- जमीनी कार्यकर्ता
- लगातार चुनावी मेहनत
ममता और पवार जैसे नेता अपनी राजनीतिक पहचान खुद बनाकर बड़े हुए हैं. उनके लिए वापस कांग्रेस में जाना आसान फैसला नहीं होगा.
7. असली सवाल: बीजेपी बनाम विपक्ष की लड़ाई कैसे लड़ी जाए?
आज विपक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती बीजेपी की बढ़ती राजनीतिक ताकत है, लेकिन समाधान शायद यह नहीं कि सभी दल कांग्रेस में वापस आ जाएं. ज्यादा व्यावहारिक रास्ता यह हो सकता है कि क्षेत्रीय दल अपनी पहचान बचाते हुए एक मजबूत गठबंधन बनाएं... क्योंकि ममता, पवार और दूसरे नेता इसलिए बड़े बने क्योंकि उन्होंने अपनी अलग राजनीतिक जमीन बनाई थी.
कांग्रेस में ‘घर वापसी’ की चर्चा भले तेज हो गई हो, लेकिन फिलहाल यह ज्यादा राजनीतिक बहस नजर आती है, कोई वास्तविक योजना नहीं. बीजेपी के मुकाबले विपक्षी एकता जरूरी है, लेकिन सवाल यह है कि वह कांग्रेस के अंदर होगी या कांग्रेस के साथ—इसका जवाब आने वाले चुनाव तय करेंगे.




