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सर्वे के नाम पर सुंदर लड़कियों को ऑफिस में ले जाकर S@# करते थे ये लीडर, इन पांच नेताओं के कारण TMC इस बार संकट में!

पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले टीएमसी के कुछ नेताओं पर लगे गंभीर आरोपों ने सियासी माहौल गरमा दिया है. संदेशखाली की महिलाओं के सनसनीखेज खुलासों के बाद यौन शोषण, जमीन कब्जाने और भ्रष्टाचार के आरोपों ने पार्टी को बड़े संकट में डाल दिया है.

सर्वे के नाम पर सुंदर लड़कियों को ऑफिस में ले जाकर S@# करते थे ये लीडर, इन पांच नेताओं के कारण TMC इस बार संकट में!
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सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी5 Mins Read

Published on: 3 April 2026 6:52 PM

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी तेज है. सियासी पारा चढ़ा हुआ है, रैलियों से लेकर सोशल मीडिया तक हर तरफ चुनावी शोर सुनाई दे रहा है. 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होने वाले दो चरणों के मतदान से पहले सभी राजनीतिक दल पूरी ताकत झोंक चुके हैं.

लेकिन चुनावी वादों और दावों के बीच एक और सिलसिला भी लगातार चर्चा में है. पुराने विवाद और नेताओं पर लगे गंभीर आरोप. पिछले कुछ सालों में टीएमसी के कई ऐसे चेहरे सामने आए हैं, जिन पर यौन शोषण, जमीन कब्जा, घोटाले और भ्रष्टाचार जैसे आरोप लगे. ये मामले सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि कानून और सिस्टम पर भी बड़े सवाल खड़े करते हैं. आइए जानते हैं पश्चिम बंगाल के 5 ऐसे ‘बवाली’ नेताओं की पूरी कहानी

कौन है शाहजहां शेख और संदेशखाली में क्यों भड़का विवाद?

Shahjahan Sheikh उत्तर 24 परगना के संदेशखाली में टीएमसी के प्रभावशाली नेता माने जाते हैं. लेकिन उन पर लगे आरोपों ने पूरे राज्य को हिला दिया. महिलाओं ने उन पर यौन उत्पीड़न और जमीन हड़पने जैसे गंभीर आरोप लगाए. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 'सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर महिलाओं को बुलाया जाता था और उनके साथ दुष्कर्म किया जाता था.' 5 जनवरी को जब ईडी की टीम राशन घोटाले में पूछताछ करने पहुंची, तो उनके समर्थकों ने अधिकारियों पर हमला कर दिया. इसके बाद शेख लंबे समय तक फरार रहे और करीब 55 दिन बाद गिरफ्तार किए गए.

संदेशखाली की महिलाओं ने क्या-क्या आरोप लगाए?

संदेशखाली की महिलाओं ने जो आरोप लगाए, वो बेहद चौंकाने वाले थे. एक वायरल वीडियो में एक महिला ने कहा कि 'पार्टी (टीएमसी) के लोग आते थे और एक-एक घर का सर्वे करते थे, जिसमें किसी की सुंदर पत्नी होती है, जिसकी लड़की जवान होती है. फिर वे महिलाओं को पार्टी कार्यालय में ले जाते हैं. कई रातों तक उन्हें वहां रखा जाता था...जब तक वे संतुष्ट नहीं हो जाते.' महिलाओं का आरोप है कि विरोध करने पर परिवार को धमकाया जाता था और पुरुषों को जबरन बैठकों में शामिल किया जाता था.

शिबू हाजरा की गिरफ्तारी क्यों हुई और उन पर क्या आरोप हैं?

Shibu Hazra को संदेशखाली हिंसा के मामले में गिरफ्तार किया गया. उन्हें शाहजहां शेख का करीबी माना जाता है. उन पर यौन उत्पीड़न, धमकी और जमीन कब्जाने के आरोप हैं. एफआईआर में सामूहिक दुष्कर्म की धाराएं जोड़े जाने के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया. बताया जाता है कि उन्होंने सरकारी और निजी जमीन पर अवैध पोल्ट्री फार्म बना रखे थे, और इलाके में उनका दबदबा था.


उत्तम सरदार का नाम विवादों में क्यों आया?

Uttam Sardar का नाम भी संदेशखाली विवाद में सामने आया. स्थानीय लोगों ने उन पर जमीन हड़पने, धमकाने और हिंसा के आरोप लगाए. विरोध बढ़ने के बाद टीएमसी ने उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया. पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार भी किया था, और उनका नाम लगातार सत्ता के दुरुपयोग के उदाहरण के तौर पर लिया जाता है.


पार्थ चटर्जी का ‘शिक्षक भर्ती घोटाला’ क्या है?

Partha Chatterjee, जो कभी ममता सरकार के सबसे ताकतवर मंत्रियों में गिने जाते थे, शिक्षक भर्ती घोटाले में फंस गए. 23 जुलाई 2022 को ईडी ने उन्हें गिरफ्तार किया. आरोप है कि उन्होंने पैसे लेकर अयोग्य उम्मीदवारों को सरकारी नौकरी दिलाई. उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी के घर से करीब ₹21.9 करोड़ नकद और भारी मात्रा में सोना बरामद हुआ. इस खुलासे ने पूरे देश को चौंका दिया.


अनुब्रत मंडल को ‘बीरभूम का टाइगर’ क्यों कहा जाता है?

Anubrata Mondal टीएमसी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं. कभी मछली बेचने वाले अनुब्रत मंडल ने राजनीति में बड़ा मुकाम हासिल किया. लेकिन उन पर गौ तस्करी के आरोप लगे और सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार किया. विवादित बयानों के लिए मशहूर मंडल ने एक बार कहा था कि 'अगर टीएमसी को छेड़ा गया तो विपक्षी दलों का हाथ काट देंगे.' उनकी गिरफ्तारी के बाद भी उनका राजनीतिक दबदबा बना रहा और रिहाई पर उनका भव्य स्वागत हुआ.


क्या इन विवादों का चुनाव पर पड़ेगा असर?

पश्चिम बंगाल की राजनीति में ये सभी मामले चुनावी मुद्दा बन चुके हैं. विपक्ष लगातार टीएमसी सरकार पर आरोप लगा रहा है कि उसने ऐसे नेताओं को संरक्षण दिया. वहीं टीएमसी का दावा है कि कानून अपना काम कर रहा है और जो दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी. अब देखना होगा कि 2026 के विधानसभा चुनाव में ये ‘बवाली चेहरे’ जनता के फैसले को कितना प्रभावित करते हैं?

विधानसभा चुनाव 2026स्टेट मिरर स्पेशलममता बनर्जी
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