20 रुपये का बिजली बिल कैसे बना 2.2 लाख का मामला? साइबर फ्रॉड में फंसे ग्राहक को अब SBI देगा भारी मुआवजा
20 रुपये का बिजली बिल भरने के दौरान एक SBI ग्राहक के साथ ₹1.99 लाख का साइबर फ्रॉड हो गया. ग्राहक ने तुरंत शिकायत की, जिसके बाद आयोग ने SBI को पूरी रकम और ₹25,000 मुआवजा देने का आदेश दिया.
बिजली बिल के नाम पर साइबर फ्रॉड
How a ₹20 Electricity Bill Payment Led to SBI Paying ₹2.2 Lakh Compensation: भारतीय स्टेट बैंक के एक ग्राहक को ₹20 का बिजली बिल भरने की कोशिश भारी पड़ गई, लेकिन आखिरकार उसे बड़ी राहत मिली. ग्राहक के साथ हुए ₹1.99 लाख के साइबर फ्रॉड मामले में National Consumer Disputes Redressal Commission (NCDRC) ने बैंक को रकम वापस करने और ₹25,000 मुआवजा देने का आदेश दिया है. आयोग ने साफ कहा कि अगर ग्राहक समय पर अनधिकृत ट्रांजैक्शन की जानकारी दे देता है, तो बैंक जिम्मेदारी से बच नहीं सकता.
पीठासीन सदस्य AVM जे राजेंद्र (सेवानिवृत्त) और सदस्य न्यायमूर्ति अनूप कुमार मेंदिरत्ता की पीठ कर्नाटक राज्य उपभोक्ता आयोग के 26 मई, 2025 के आदेश के खिलाफ एसबीआई द्वारा दायर दूसरी अपील पर सुनवाई कर रही थी. इस आदेश में बिल की वापसी और मुआवजे का निर्देश दिया गया था.
क्या है पूरा मामला?
- यह मामला 19 जुलाई 2022 का है, जब बेंगलुरु निवासी Prodosh Kumar Banerjee को बिजली बिल बकाया होने और कनेक्शन काटने की चेतावनी वाला एक SMS मिला. इस पर उसने मैसेज में दिए नंबर पर कॉल किया तो बिजली विभाग जैसा जिखने वाला एक ऐप डाउनलोड करने को कहा गया.
- बनर्जी ने ऐप से ₹20 का भुगतान करने की कोशिश की, लेकिन इसके बाद ₹25,000 खाते से कट गए. फिर ₹1.99 लाख की दूसरी अनधिकृत ट्रांजैक्शन किया गया, जिसका OTP भी साझा नहीं किया गया. कुछ देर बाद फोन भी काम करना बंद हो गया.
- इस पर ग्राहक ने तुरंत साइबर क्राइम पुलिस में शिकायत की और FIR दर्ज कराई. यही नहीं, उसने SBI हेल्पलाइन और ईमेल से बैंक को सूचित किया. बैंक ने ₹25,000 वापस कर दिए और अकाउंट फ्रीज कर दिया, लेकिन ₹1.99 लाख वापस नहीं किए.
SBI का क्या तर्क था?
SBI ने कहा कि OTP शेयर किए बिना फ्रॉड संभव नहीं है. ग्राहक ने देरी से शिकायत की, लेकिन आयोग ने कहा कि ग्राहक ने तुरंत शिकायत की और OTP शेयर करने का कोई सबूत नहीं है. ऐप डाउनलोड करना लापरवाही नहीं माना जा सकता.
RBI गाइडलाइन क्या कहती है?
Reserve Bank of India की 6 जुलाई 2017 गाइडलाइन के अनुसार, अनधिकृत ट्रांजैक्शन में ग्राहक की जीरो लायबिलिटी होती है, अगर 3 दिन में शिकायत कर दी जाए. आयोग ने इसी आधार पर फैसला दिया.
आयोग का अंतिम आदेश
आयोग ने आदेश दिया कि ₹1,99,000 वापस करें और ₹25,000 मुआवजा दें. भुगतान 4 हफ्ते में करें. अगर देरी होगी तो 8% ब्याज देना होगा.




