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15 हज़ार की नौकरी, 30 करोड़ की दौलत! KRIDL के पूर्व क्लर्क की मुट्ठी भर तनख्वाह में 24 आलीशान मकान और 40 एकड़ जमीन

कर्नाटक ग्रामीण अवसंरचना विकास लिमिटेड (केआरआईडीएल) के पूर्व क्लर्क को 72 करोड़ के घोटाले में लिप्त पाया गया था. जिसकी सैलरी मात्र 15000 रुपये थे लेकिन उसके पास 30 करोड़ की संपत्ति थी. जिसने सबको हैरान कर दिया, सिर्फ इतना नहीं उसके पास 24 आलिशान मकान भी थे.

15 हज़ार की नौकरी, 30 करोड़ की दौलत! KRIDL के पूर्व क्लर्क की मुट्ठी भर तनख्वाह में 24 आलीशान मकान और 40 एकड़ जमीन
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( Image Source:  X : @hustle_worker )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय4 Mins Read

Updated on: 1 Aug 2025 1:46 PM IST

कर्नाटक के कोप्पल ज़िले में भ्रष्टाचार की एक चौंका देने वाली कहानी सामने आई है, जिसने सबको हैरानी में डाल दिया है. कर्नाटक ग्रामीण अवसंरचना विकास लिमिटेड (KRIDL) के एक पूर्व क्लर्क, कलाकप्पा निदागुंडी, जो कभी एक मामूली दिहाड़ी मजदूर के रूप में कार्यरत थे और जिनकी मासिक तनख्वाह मात्र 15,000 रुपये थी, उनके पास से 30 करोड़ रुपये से भी ज़्यादा की संपत्ति बरामद हुई है.

जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह गया है. यह हैरान कर देने वाला खुलासा लोकायुक्त अधिकारियों द्वारा की गई एक खास छापेमारी के दौरान हुआ, जो अदालत से प्राप्त आदेश के बाद की गई थी. जांच के बाद पता चला कि निदागुंडी के पास वह सब कुछ था, जिसकी कल्पना एक मध्यमवर्गीय व्यक्ति भी शायद ही कर सके.

क्या-क्या मिला छापेमारी में?

सबसे ज्यादा हैरान कर देने वाली बात,तो यह है कि जहां कमर तोड़ महंगाई में 15,000 हजार रुपये में किसी का गुजारा करना भी मुश्किल है. वहीं इस पूर्व क्लर्क की मुट्ठी भर सैलरी में करोड़ों की सम्पति ने सबको चौंका दिया है. जांच में जो सामने आया है वो कुछ इस तरह है- 24 आलीशान मकान, 4 कीमती प्लॉट, 40 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि, 350 ग्राम सोना और 1.5 किलोग्राम चांदी के गहने, 2 कारें और 2 दोपहिया वाहन और कई बैंक खातों और दस्तावेज़ों में करोड़ों की संपत्ति के प्रमाण. हैरानी की बात यह है कि ये संपत्तियां केवल निदागुंडी के नाम ही नहीं, बल्कि उनकी पत्नी और भाई के नाम पर भी रजिस्टर्ड हैं, जिससे साफ संकेत मिलता है कि यह पूरा एक सुनियोजित और संगठित घोटाला हो सकता है.

करोड़ों की ठगी का आरोप

लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में एक और नाम उभरकर आया है KRIDL के पूर्व इंजीनियर जेडएम चिंचोलकर. आरोप है कि निदागुंडी और चिंचोलकर ने मिलकर कुल 96 विकास परियोजनाओं के लिए फर्जी बिल और दस्तावेज बनाए, जिन पर कभी कोई काम नहीं हुआ. इन नकली परियोजनाओं के नाम पर सरकार से करीब ₹72 करोड़ की भारी रकम निकाली गई. इस पैसे का क्या हुआ, और कहां-कहां खर्च किया गया इसका ब्योरा अभी जांच के दायरे में है.

सरकार और विधायक का बयान

कोप्पल से विधायक राघवेंद्र हितनाल ने भी इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर मामला है राज्य सरकार इसे पूरी गंभीरता से ले रही है. संबंधित विभागों को गहन जांच करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा न जाए.' लोकायुक्त अधिकारी अब इस बात की भी गहराई से जांच कर रहे हैं कि क्या यह संपत्ति क्लर्क के नौकरी के दौरान ही भ्रष्ट तरीकों से अर्जित की गई थी या फिर रिटायरमेंट के बाद इंजीनियर चिंचोलकर के साथ मिलकर यह फर्जीवाड़ा किया गया.

क्या होगी अगली कार्रवाई?

फिलहाल, लोकायुक्त टीम ने निदागुंडी और चिंचोलकर के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है. आने वाले दिनों में दोनों से पूछताछ की जाएगी और उन्हें गिरफ्तार भी किया जा सकता है. उनकी बैंक डिटेल्स, संपत्ति की खरीद-फरोख्त के रिकॉर्ड, और सरकारी लेन-देन की जांच की जा रही है.

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