सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर क्यों घटाई एक्साइज ड्यूटी, क्या होगा आम जनता पर असर?-Detailed
केंद्र सरकार ने वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच बड़ा और निर्णायक कदम उठाते हुए पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर टैक्स ढांचे में बड़ा बदलाव किया हैं. इस फैसले के तहत पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में भारी कटौती की गई है.
Petrol Diesel excise cut India
Petrol Diesel Excise Cut : मिडिल ईस्ट में जारी जंग का असर पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत में भी देखने को मिल रहा है. पहले LPG और फिर तेल को लेकर लोगों में मारामारी देखने को मिल रही है. आए दिन देश के अलग-अलग राज्यों से पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी-लंबी लाइनों की वीडियो और तस्वीरें सामने आ रही है, जो देश में ऐसा माहौल पैदा कर रही है कि तेल बस खत्म होने वाला है, जबकि सरकार इसको लेकर साफ कह चुकी है इस तरह की जानकारी पर ध्यान न दें और भारत के पास पर्याप्त तेल है.
इस बीच केंद्र सरकार ने वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच बड़ा और निर्णायक कदम उठाते हुए पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर टैक्स ढांचे में बड़ा बदलाव किया हैं. इस फैसले के तहत पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में भारी कटौती की गई है, जिससे आम जनता और उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीद है. नई व्यवस्था के तहत पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है. वहीं डीजल पर पहले लगने वाली 10 रुपये प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है.
क्यों लिया गया यह फैसला?
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पूरी ने इस फैसले के पीछे की वजह स्पष्ट करते हुए बताया कि सरकार के सामने दो ही विकल्प थे या तो ईंधन की कीमतें बढ़ाई जाएं या फिर वित्तीय बोझ खुद उठाया जाए.उन्होंने कहा “पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 122 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं. परिणामस्वरूप, दुनिया भर में उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ गई हैं. दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में कीमतें लगभग 30%-50% बढ़ी हैं, उत्तरी अमेरिकी देशों में 30%, यूरोप में 20% और अफ्रीकी देशों में 50% बढ़ी हैं. मोदी सरकार के पास दो विकल्प थे या तो अन्य सभी देशों की तरह भारत के नागरिकों के लिए कीमतों में भारी वृद्धि करे या फिर अपने वित्त पर पड़ने वाले बोझ को वहन करे ताकि भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता से सुरक्षित रह सकें.”
क्या है पीएम मोदी का फैसला?
हरदीप पूरी ने आगे कहा “पीएम मोदी ने रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से पिछले 4 सालों में अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को ध्यान में रखते हुए, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक बार फिर अपने वित्त पर चोट खाने का फैसला किया है.”
क्या तेल कंपनियों को होगा नुकसान?
मंत्री के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी उछाल के कारण तेल कंपनियों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान हो रहा है. इस स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने अपने कर राजस्व में कटौती का फैसला लिया है, ताकि कंपनियों पर दबाव कम हो सके और उपभोक्ताओं पर बोझ न बढ़े.
निर्यात को लेकर क्या?
सरकार ने पेट्रोल और डीजल की बढ़ती वैश्विक कीमतों को देखते हुए निर्यात पर भी टैक्स लगाने का फैसला किया है. अब विदेशी देशों को ईंधन निर्यात करने वाली रिफाइनरियों को निर्यात शुल्क देना होगा. इसको लेकर हरदीप पूरी ने कहा “साथ ही, पेट्रोल और डीजल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी वृद्धि के कारण निर्यात कर लगाया गया है, और विदेशी देशों को निर्यात करने वाली किसी भी रिफाइनरी को निर्यात कर देना होगा. इस समयोचित, साहसिक और दूरदर्शी निर्णय के लिए पीएम मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का मैं आभार व्यक्त करता हूं.”




