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कैसे Dhruva ने बदली Ram Charan की किस्मत? फ्लॉप के बाद बना करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट

फिल्म ध्रुवा ने राम चरण की इमेज को पूरी तरह बदल दिया और उन्हें एक परिपक्व एक्टर के रूप में स्थापित किया. यह फिल्म उनके करियर की दिशा बदलने वाला सबसे अहम मोड़ साबित हुई.

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( Image Source:  Instagram: alwaysramcharan )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय8 Mins Read

Published on: 27 March 2026 11:21 AM

दिसंबर 2016 तक राम चरण (Ram Charan) के करियर में एक बहुत बड़ी सफलता की सख्त जरूरत महसूस हो रही थी. उनकी पिछली फिल्म 'ब्रूस ली: द फाइटर' उम्मीद के मुताबिक नहीं चली थी. तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री में धीरे-धीरे यह बात फैलने लगी थी कि राम चरण अभी भी उस मास एंटरटेनमेंट वाली स्टाइल से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं, जिसने उनके करियर के ज्यादातर हिस्से को डिफाइंड किया था.

उससे पहले की फिल्में पूरी तरह फ्लॉप तो नहीं थीं, लेकिन उनसे कोई खास प्रभाव भी नहीं पड़ा था. लोग चुपके-चुपके यह सवाल पूछने लगे थे कि क्या चिरंजीवी का बेटा राम चरण कभी अपनी खुद की ताकत पर खड़ी होने वाली फिल्मोग्राफी बना पाएगा या नहीं. फिर 9 दिसंबर 2016 को फिल्म 'ध्रुवा' रिलीज हुई और इसने पूरी चर्चा का रुख ही बदल दिया.

ध्रुवा का असली महत्व क्या था?

उस समय राम चरण की स्थिति को समझने के लिए थोड़ा पीछे चलना जरूरी है. उन्होंने साल 2007 में 'चिरुथा' फिल्म से डेब्यू किया था जो काफी सफल रही. साल 2009 में आई फिल्म 'मगधीरा' न सिर्फ उनके करियर की सबसे बड़ी हिट बनी, बल्कि तेलुगु सिनेमा के लिए भी एक यादगार फिल्म साबित हुई. लेकिन 'मगधीरा' के बाद के साल काफी उतार-चढ़ाव भरे रहे. फिल्में जैसे 'रचा', 'नायक' और 'येवडू' में कुछ अच्छे पल जरूर थे लेकिन कोई भी फिल्म 'मगधीरा' वाले वादे को पूरा नहीं कर पाई. 'ब्रूस ली: द फाइटर' के खराब रिजल्ट के बाद तो स्थिति और भी मुश्किल हो गई थी.

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ध्रुवा कैसे बनी?

मूल रूप से इस फिल्म के निर्माता अलग थे लेकिन ब्रूस ली के खराब प्रदर्शन के बाद उन्होंने इस प्रोजेक्ट से हाथ खींच लिया. फिर अल्लू अरविंद ने गीता आर्ट्स बैनर के तहत इस फिल्म को अपना लिया. यह 'मगधीरा' के बाद राम चरण के साथ उनका दूसरा सहयोग था. ध्रुवा असल में 2015 की एक बेहतरीन तमिल फिल्म 'थानी ओरुवन' का आधिकारिक रीमेक थी. मोहन राजा द्वारा निर्देशित यह तमिल फिल्म उस साल की सबसे अच्छी फिल्मों में से एक मानी जाती थी. यह फिल्म कमर्शियल एंटरटेनमेंट वाली थी, लेकिन उसकी कहानी और स्क्रिप्ट इतनी मजबूत और कसी हुई थी कि दर्शक हैरान रह जाते थे. खास बात यह थी कि इसका खलनायक बहुत अलग तरह का था. आम तेलुगु फिल्मों में खलनायक आमतौर पर जोर-जोर से चिल्लाने वाले, मस्कुलर बॉडी वाले या बहुत हिंसक दिखते हैं. लेकिन 'ध्रुवा' का खलनायक एडुकेटेड, शांत और अपनी इंटेलिजेंस की वजह से बहुत ज्यादा डरावना था. तेलुगु दर्शकों को ऐसा खलनायक पहले शायद ही कभी देखने को मिला था.

राम चरण की तैयारी और लुक

फिल्म रिलीज होने से पहले सबसे ज्यादा चर्चा राम चरण के लुक को लेकर हुई. फर्स्ट लुक पोस्टर और इंट्रोडक्शन सॉन्ग के टीजर में लोगों ने देखा कि राम चरण ने अपने शरीर में बहुत बड़ा ट्रांसफॉर्मेशन किया था. आईपीएस अधिकारी का रोल निभाने के लिए उन्होंने खूब मेहनत की। उन्होंने बॉडीबिल्डर राकेश उदियार से ट्रेनिंग ली, जो सलमान खान की फिल्म 'सुल्तान' और आमिर खान की 'दंगल' के लिए बॉडी बनाने वाले मशहूर ट्रेनर हैं. राम चरण ने शूटिंग शुरू होने से बहुत पहले से ट्रेनिंग शुरू कर दी थी. पूरी शूटिंग के दौरान वे सख्त शाकाहारी डाइट फॉलो करते रहे और आईपीएस अधिकारी जैसा दुबला-पतला, चुस्त और फिट शरीर बनाने में जुटे रहे. जब कोई एक्टर अपनी भूमिका के लिए बॉडी को वाकई में तैयार करता है, तो स्क्रीन पर उसकी मौजूदगी बहुत अलग और असरदार हो जाती है. ध्रुवा में राम चरण ठीक ऐसे ही लगते थे – जैसे कोई असली आईपीएस अधिकारी जो कमरे में मौजूद किसी भी व्यक्ति से तेज दौड़ सकता है, लड़ सकता है और हर हालत में टिक सकता है.

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फिल्म की कहानी

फिल्म की कहानी ध्रुवा नाम के एक आईपीएस ट्रेनर की है. शुरुआत से ही वह आम पुलिस अधिकारियों से अलग सोच रखता है. छोटे-मोटे चोर-उचक्कों को पकड़ने में अपना पूरा करियर बर्बाद करने के बजाय, वह सीधे देश के सबसे बड़े और सबसे खतरनाक अपराधी को ढूंढने और उसके पूरे गिरोह को जड़ से खत्म करने का फैसला करता है. उसका निशाना बनता है सिद्धार्थ अभिमन्यु- एक जाना माना साइंटिस्ट जो बाहर से बहुत सम्मानित दिखता है, लेकिन अंदर से इललीगल मेडिकल एक्सपेरिमेंट्स और मेडिसिन इंडस्ट्री का गलत इस्तेमाल करके एक बड़ा आपराधिक नेटवर्क चला रहा है. फिल्म की सबसे दिलचस्प बात यह थी कि इसने नायक और खलनायक की आम धारणा को पूरी तरह उलट दिया. सिद्धार्थ अभिमन्यु शारीरिक रूप से बहुत ताकतवर नहीं दिखाया गया था. उसे ऐसा होने की जरूरत भी नहीं थी. वह हमेशा अपने विरोधियों से तीन कदम आगे सोचता था. दर्शकों को यह नया अनुभव बहुत पसंद आया कि खलनायक को सिर्फ नायक की ताकत या मार-पीट से नहीं, बल्कि उसकी इंटेलिजेंस से हराया जा सकता है. राम चरण के लिए भी यह एक नया तरह का नायक का रोल था. उन्हें इस बार सिर्फ एक्शन ही नहीं, बल्कि इंटेलेक्चुअल लेवल पर भी खलनायक से मुकाबला करना था.

अरविंद स्वामी का कमाल

अगर कागज पर यह राम चरण की फिल्म थी, तो पर्दे पर अरविंद स्वामी ने इसे अपना बना लिया. मूल तमिल फिल्म में भी अरविंद स्वामी ने ही खलनायक का रोल किया था. तेलुगु वर्जन में भी उन्हें दोबारा चुना गया. पहले अजित कुमार और आर माधवन से भी बात हुई थी, लेकिन अंत में स्वामी को ही फाइनल किया गया. अरविंद स्वामी ने सिद्धार्थ अभिमन्यु के किरदार में एक खास किस्म की खामोशी और शांति भर दी, जो किसी भी जोरदार हिंसा से कहीं ज्यादा डरावनी लगती थी. उन्होंने साबित कर दिया कि दर्शक खलनायक से भी प्यार कर सकते हैं और नायक का साथ भी दे सकते हैं यह बहुत मुश्किल बैलेंस है, लेकिन उन्होंने इसे बेहद खूबसूरती से किया. राम चरण और अरविंद स्वामी के बीच के बातचीत वाले सीन फिल्म के सबसे मजेदार हिस्से थे. सिर्फ एक्शन नहीं, बल्कि दोनों एक्टर्स के बीच की IQ टकरार दर्शकों को बहुत भाई थी.

ध्रुवा का राम चरण के करियर में महत्व

2016 में जहां राम चरण थे और 2022 में 'आरआरआर' के बाद जहां वे पहुंच गए, उस सफर में 'ध्रुवा' का एक बहुत खास और महत्वपूर्ण स्थान है. यह वह फिल्म थी जिसमें राम चरण ने खुद को और पूरी इंडस्ट्री को साबित किया कि वे एक मजबूत और कसी हुई थ्रिलर फिल्म को अच्छी तरह संभाल सकते हैं. वे अरविंद स्वामी जैसे दमदार एक्टर के सामने भी अपनी छाप छोड़ सकते हैं. फिल्म को सफल बनाने के लिए उन्हें हर सीन में अकेले हावी होने की जरूरत नहीं है.

'आरआरआर' से सुपरस्टार

'ध्रुवा' के दो साल बाद 'रंगस्थलम' आई, जिसे कई लोग राम चरण का अब तक का सबसे बेहतरीन एक्टिंग मानते हैं. फिर छह साल बाद 'आरआरआर' आई और उसके बाद की सारी फिल्में. इन सभी फिल्मों और 'ध्रुवा' के बीच की कड़ी को हमेशा जोर देकर नहीं बताया जाता, लेकिन इसे जोर देकर बताया जाना चाहिए क्योंकि 'ध्रुवा' वह फिल्म थी जहां राम चरण ने दर्शकों को खुश करने की कोशिश करना कम कर दिया और कहानी की जरूरत के हिसाब से काम करना शुरू कर दिया. यह बदलाव भले ही चुपचाप और धीरे-धीरे हुआ हो, लेकिन इसने उनके बाद की हर फिल्म को पूरी तरह बदल दिया. ध्रुवा राम चरण के करियर का वो टर्निंग पॉइंट थी, जिसने उन्हें एक नए और ज्यादा मैच्योर एक्टर के रूप में स्टैब्लिश किया.

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