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महानवमी के साथ चैत्र नवरात्रि का समापन, मां सिद्धिदात्री की कृपा से मिलेगी सभी सिद्धियां, जानिए पूजन विधि

आज 27 मार्च को महानवमी है और इसी के साथ 9 दिनों तक चलने वाले चैत्र नवरात्रि का समापन हो जाएगा . नवरात्रि का प्रत्येक दिन देवी के एक विशेष स्वरूप की उपासना के लिए समर्पित होता है, जिसमें नवमी तिथि का विशेष महत्व माना गया है.

chaitra navratri 2026
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chaitra navratri 2026

( Image Source:  AI: Sora )
State Mirror Astro
Edited By: State Mirror Astro4 Mins Read

Published on: 27 March 2026 11:42 AM

आज 27 मार्च को महानवमी है और इसी के साथ 9 दिनों तक चलने वाले चैत्र नवरात्रि का समापन हो जाएगा . नवरात्रि का प्रत्येक दिन देवी के एक विशेष स्वरूप की उपासना के लिए समर्पित होता है, जिसमें नवमी तिथि का विशेष महत्व माना गया है. इस दिन माँ दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की आराधना की जाती है, जो साधक को भौतिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार की सिद्धियों से सम्पन्न करने वाली मानी गई हैं. शास्त्रों में वर्णित है कि यह स्वरूप केवल भक्तों की कामनाओं को पूर्ण करने वाला ही नहीं, बल्कि उन्हें आध्यात्मिक उन्नति के सर्वोच्च स्तर तक पहुंचाने वाला भी है.

1. माँ सिद्धिदात्री का स्वरूप और महिमा

माँ दुर्गाजी की नवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री है, नवरात्र पूजन के नवें दिन इनकी उपासना की जाती है. माँ का यह रूप सभी सिद्धियों को प्रदान करने वाला है.

2. अष्ट सिद्धियों का उल्लेख और महत्व

मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व ये आठ सिद्धियां हैं. माँ सिद्धिदात्री भक्तों और साधकों को ये सभी सिद्धियां प्रदान करने में समर्थ हैं.

3. भगवान शिव और सिद्धिदात्री का संबंध

देवी पुराण के अनुसार भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही इन सिद्धियों को प्राप्त किया था. इनकी अनुकम्पा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था, इसी कारण वह लोक में अर्धनारीश्वर नाम से प्रसिद्ध हुए.

4. साधना का प्रभाव और आध्यात्मिक उपलब्धि

इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है. सृष्टि में कुछ भी उसके लिए अगम्य नहीं रह जाता, सर्वत्र विजय प्राप्त करने की सामर्थ्य उसमें आ जाती है.

5. माँ सिद्धिदात्री का दिव्य स्वरूप-वर्णन

सिंह पर सवार, कमल पुष्प पर आसीन, अत्यंत दिव्य स्वरुप वाली माँ सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं. इनके दाहिने तरफ के नीचे वाले हाथ में चक्र, ऊपर वाले हाथ में गदा तथा बायीं तरफ के नीचे वाले हाथ में शंख और ऊपर वाले हाथ में कमल पुष्प है.

6. देवी सरस्वती के स्वरूप के रूप में सिद्धिदात्री

सिद्धिदात्री देवी सरस्वती का भी स्वरुप माना गया है जो श्वेत वस्त्रालंकार से युक्त महाज्ञान और मधुर स्वर से अपने भक्तों को सम्मोहित करती हैं.

7. पूजा फल, विधि और मंत्र का महत्व

इनकी उपासना से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं. भक्त इनकी पूजा से यश, बल, कीर्ति और धन की प्राप्ति करते हैं. माँ भगवती का स्मरण, ध्यान, पूजन हमें इस संसार की असारता का बोध कराते हुए वास्तविक परमशांतिदायक अमृत पद की ओर ले जाता है. सर्वप्रथम कलश की पूजा व उसमें स्थापित सभी देवी-देवताओं का ध्यान करना चाहिए. रोली, मोली, कुमकुम, पुष्प, चुनरी आदि से माँ की भक्ति भाव से पूजा करें. हलुआ, पूरी, खीर, चने और नारियल से माता को भोग लगाएं. इसके पश्चात माता के मंत्रों का जाप करें. इस दिन नौ कन्याओं को घर में भोजन कराना चाहिए, जिनकी आयु दो वर्ष से ऊपर और दस वर्ष तक हो तथा संख्या कम से कम नौ होनी चाहिए. इस प्रकार विधिपूर्वक की गई पूजा से माता शीघ्र प्रसन्न होती हैं और धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष की प्राप्ति कराती हैं.

पूजा मंत्र

सिद्धगन्‍धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि,

सेव्यमाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

चैत्र नवरात्रि
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