31 साल जेल, अब कोर्ट में नई पारी! राजीव गांधी हत्याकांड का दोषी पेरारिवलन बना वकील
ओ. जी. पेरारिवलन, जो कभी राजीव गांधी हत्याकांड मामले में मौत की सजा पाए दोषी थे, अब वकील के रूप में नामांकित हो गए हैं. उन्होंने 30 साल से अधिक समय जेल में बिताने के बाद यह नई शुरुआत की है.
राजीव गांधी हत्याकांड मामले में पहले मौत की सजा पाए और बाद में तीन दशक से अधिक समय जेल में रहने के बाद रिहा हुए ओए जी पेरारिवलन ने सोमवार को तमिलनाडु और पुडुचेरी बार काउंसिल में वकील के रूप में नामांकन कराया.
54 साल की उम्र में पेरारिवलन अब मद्रास हाईकोर्ट में वकालत करने की तैयारी में हैं. वह उसी कानूनी व्यवस्था में काम करेंगे, जिसमें उन्होंने 31 साल तक आरोपी, दोषी और अपीलकर्ता के रूप में समय बिताया है.
क्यों की कानून की पढ़ाई और क्या है मकसद?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को काले वकील के कोट में नजर आए पेरारिवलन ने कहा कि उनकी सालों लंबी कानूनी लड़ाई ने उन्हें कानून की पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने कहा,"मेरा लक्ष्य एक प्रसिद्ध क्रिमिनल वकील बनना नहीं है, बल्कि उन हजारों कैदियों की आवाज बनना है जो जेलों में बिना किसी कानूनी सहायता के बंद हैं. खासकर वे गरीब आजीवन कारावास के कैदी जो लंबे समय से समय से पहले रिहाई का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन केवल इसलिए न्याय से वंचित हैं क्योंकि वे कानूनी मदद नहीं ले सकते.”
रिपोर्ट के मुताबिक, पेरारिवलन ने आगे कहा, "मेरा सपना एक ऐसा आपराधिक न्याय तंत्र बनाना है जो कैदियों के साथ भेदभाव न करे और पोस्ट-कन्विक्शन एक्ज़ोनरेशन जैसे कानूनों को अपनाए, जैसे ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका जैसे देशों में हैं.”
पेरारिवल कब हुए थे गिरफ्तार?
पेरारिवलन को जून 1991 में गिरफ्तार किया गया था, कुछ ही हफ्तों बाद जब तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक चुनावी रैली के दौरान आत्मघाती बम विस्फोट में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी गई थी. वह इस साजिश मामले में दोषी ठहराए गए सात लोगों में शामिल थे.
क्या था परिवार का दावा?
सालों तक उनके परिवार और मित्रों ने दावा किया कि उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया या उनकी सजा असमान रूप से कठोर थी. उनकी मां अरपुथम अम्माल ने लगातार राजनीतिक नेताओं, मुख्यमंत्रियों, न्यायाधीशों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से उनकी रिहाई के लिए अभियान चलाया.
कब हुए रिहा?
मई 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उनकी रिहाई का आदेश दिया. इससे पहले उनकी मृत्युदंड की सजा को आजीवन कारावास में बदला गया था और आतंकवाद से जुड़े आरोप हटा दिए गए थे.
जेल से रिहा होने के बाद पेरारिवलन ने बेंगलुरु स्थित डॉ. बी.आर. अंबेडकर लॉ कॉलेज में कर्नाटक स्टेट लॉ यूनिवर्सिटी के तहत कानून की पढ़ाई शुरू की. उन्होंने 2025 में अपनी डिग्री पूरी की और उसी वर्ष ऑल इंडिया बार परीक्षा भी पास की.




