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'नीच, चायवाला और अब राहुलवादी नहीं'; अय्यर के बयान पर सियासी बवंडर! कांग्रेस को हुई चुनावी टेंशन

मणि शंकर अय्यर के राहुल गांधी, हिंदुत्व और ब्राह्मणवाद पर बयान से कांग्रेस में सियासी हलचल. चुनाव से पहले बढ़ी पार्टी की मुश्किलें.

Mani Shankar Aiyar Controversy
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Mani Shankar Aiyar Controversy

( Image Source:  ANI )
सागर द्विवेदी
Edited By: सागर द्विवेदी

Updated on: 17 Feb 2026 12:01 AM IST

चुनाव से पहले एकजुटता और अनुशासन का संदेश देने की कोशिश कर रही कांग्रेस को एक बार फिर असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा है. वरिष्ठ नेता मणि शंकर अय्यर के ताजा बयान सियासी गलियारों में तेज बहस का कारण बने हैं. ब्राह्मणवाद, ठाकुरवाद और हिंदुत्व पर उनकी टिप्पणियों से लेकर राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल तक. मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है.

IANS से बातचीत में अय्यर ने अपने जन्म और पहचान को लेकर खुलकर बात की. उन्होंने कहा, 'क्या मैं उनसे जुड़ सकता हूं? क्योंकि मेरा जन्म ब्राह्मण परिवार में हुआ. किसी ने मुझसे ब्राह्मण बनने को नहीं कहा कि 'लेकिन मैं जन्म से ब्राह्मण हूं. मैं जनेऊ नहीं पहनता. वयस्क होने के बाद मैंने कभी संध्यावंदन नहीं किया. बचपन की छुट्टियों का अधिकांश समय मैंने शिवानंद आश्रम में बिताया, जिससे मैं हिंदू प्रथाओं का आलोचक बना, हिंदू दर्शन का नहीं.'

हिंदुत्व पर क्या बोले अय्यर?

अय्यर ने साफ कहा कि वह हिंदुत्व के कड़े आलोचक हैं. उनके मुताबिक, 'मैं हिंदुत्व को हिंदू धर्म की विकृति और एक महान धर्म के दुरुपयोग के रूप में देखता हूं. लेकिन मुझे ब्राह्मण कहकर आरोप लगाना वैसा ही है जैसे पिनराई (विजयन) पर भाजपा से जुड़े होने का आरोप लगाना.'

‘ठाकुरवाद’ पर उन्होंने कहा कि 'मुझे नहीं पता कि वे ‘ठाकुरवाद’ से क्या मतलब निकालते हैं. अगर उनका आशय जमींदारी और सामंती ताकतों के खिलाफ है, तो मैं पूरी तरह उनके साथ हूं… अगर मेरी व्याख्या सही है, तो मैं कहने को तैयार हूं, ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद और ठाकुरवाद मुर्दाबाद.'

योगी आदित्यनाथ पर सहमति क्यों?

अय्यर ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक बयान से आंशिक सहमति भी जताई. उन्होंने कहा कि 'यह इकलौती बात है जिससे मैं 100 प्रतिशत सहमत हूं. मैं दिल्ली में रहता हूं और यह आश्चर्य की बात है कि मेरे फेफड़े अब भी काम कर रहे हैं. वह इस मुद्दे पर सही हैं, लेकिन यही एक बात है जो उन्होंने सही कही है.' उन्होंने व्यंग्य में जोड़ा, 'यूपी में रहना है तो ‘योगी-योगी’ कहना है.' बाद में स्पष्ट किया कि वह राजनीति नहीं बल्कि दिल्ली के प्रदूषण की बात कर रहे थे. 'मैं राजनीति की नहीं, मौसम की बात कर रहा हूं.'

क्या राहुल गांधी के नेतृत्व पर उठे सवाल?

विवाद तब और बढ़ा जब अय्यर ने कहा, 'मैं गांधीवादी हूं, मैं नेहरूवादी हूं, मैं राजीववादी हूं, लेकिन मैं राहुलवादी नहीं हूं.' इसे राहुल गांधी के नेतृत्व पर सीधा प्रहार माना गया. ANI से बातचीत में उन्होंने कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा पर भी तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा, “मुझे पवन खेड़ा के प्रति बिल्कुल भी सम्मान नहीं है… वह प्रवक्ता नहीं हैं, वह तो सिर्फ एक तोता हैं.” साथ ही जोड़ा, “अगर पवन खेड़ा मुझे बाहर निकालने वाले हैं, तो मैं बाहर जाने के बाद खुशी-खुशी उन्हें पीछे से लात मारूंगा.”

कांग्रेस ने क्या कहा?

पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मणि शंकर अय्यर का पिछले कुछ वर्षों से कांग्रेस पार्टी से कोई भी संबंध नहीं रहा है. वे जो भी बोलते या लिखते हैं, वह पूरी तरह अपनी व्यक्तिगत क्षमता में करते हैं. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी स्पष्ट किया कि केरल में पार्टी को यूडीएफ पर पूरा भरोसा है और जनता जिम्मेदार शासन के लिए उसे दोबारा मौका देगी.

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

केरल में एक कार्यक्रम के दौरान अय्यर ने मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से कहा था कि, 'मुझे आपके चरणों में गिरकर… अनुरोध करना चाहिए कि कांग्रेस ने जो जिम्मेदारी छोड़ दी है, उसे आप आगे बढ़ाकर संभालें.' बाद में उन्होंने सफाई दी कि उनके भाषण की “half a line” को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया. PTI से बातचीत में उन्होंने कहा, “एक कांग्रेसी के तौर पर मैं चाहता हूं कि यूडीएफ जीते… लेकिन मुझे लगता है कि उन्हें एक और कार्यकाल मिल सकता है.”

क्या पहले भी विवादों में रहे हैं अय्यर?

यह पहला मौका नहीं है जब अय्यर के बयान से कांग्रेस को असहजता हुई हो. 2014 में उन्होंने नरेंद्र मोदी को लेकर कहा था, 'इस चायवाले को यहां आकर चाय परोसनी चाहिए.' 2017 में उन्होंने उन्हें “नीच आदमी” कहा था, जिस पर बड़ा विवाद हुआ. 2022 में राजीव गांधी को लेकर उनकी टिप्पणी—कि वह कैम्ब्रिज और इम्पीरियल कॉलेज में असफल रहे. भी चर्चा में रही.

बीजेपी का क्या कहना है?

बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि ये घटनाएं राहुल गांधी के नेतृत्व पर भरोसे की कमी दिखाती हैं और उन्हें 'non-performing asset' बताया. तमिलनाडु बीजेपी नेता के अन्नामलाई ने भी कांग्रेस और वाम दलों के बीच अंदरूनी समझ का आरोप लगाया.

क्या कांग्रेस के लिए चुनौती बढ़ेगी?

चुनावी माहौल में ऐसे बयान विपक्ष को हमला करने का मौका देते हैं. कांग्रेस के सामने अब चुनौती यह है कि वह अंदरूनी मतभेदों और सार्वजनिक विवादों को कैसे संभाले. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि पार्टी इस सियासी तूफान से कैसे बाहर निकलती है.

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