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25000 रुपये में कैसे बिका 10 रुपये का मामूली अंडा? ईरान बना वजह, जानें क्या बोला खरीदने वाला शख्स

लद्दाख के लेह जिले में एक साधारण अंडे की नीलामी 25,000 रुपये में हुई, लेकिन यह केवल एक खरीद-फरोख्त नहीं थी, यह युद्ध से जूझ रहे लोगों के लिए सहानुभूति और समर्थन का प्रतीक बन गई. दान अभियान के दौरान लोगों ने न सिर्फ नकद राशि बल्कि आभूषण, कीमती धातुएं और रोजमर्रा की चीजें तक दान में दीं.

egg auction 25000 rupees
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egg auction 25000 rupees

( Image Source:  X/@ANI )

मिडिल ईस्ट में जारी जंग पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं. कुछ ईरान का सपोर्ट कर रहे हैं तो कई अमेरिका और इजरायल का. ईरान अकेला अमेरिका और इजरायल का सामना कर रहा है. भारत में युद्ध से जूझ रहे ईरानी लोगों के लिए सहानुभूति और समर्थन देखने को मिल रहा है. जम्मू-कश्मीर और लेह लद्दाख में इन दिनों दान अभियान चल रहा है. ईरान में जारी संघर्ष के पीड़ितों की मदद के लिए चलाए जा रहे दान अभियान में स्थानीय लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं.

इस बीच लद्दाख के लेह जिले में एक साधारण अंडे की नीलामी 25,000 रुपये में हुई, लेकिन यह केवल एक खरीद-फरोख्त नहीं थी, यह युद्ध से जूझ रहे लोगों के लिए सहानुभूति और समर्थन का प्रतीक बन गई. दान अभियान के दौरान लोगों ने न सिर्फ नकद राशि बल्कि आभूषण, कीमती धातुएं और रोजमर्रा की चीजें तक दान में दीं.

किसने खरीदा 25,000 रुपये का एक अंडा?

लेह में आयोजित इस विशेष दान अभियान के दौरान एक अंडे की नीलामी ने सभी का ध्यान खींचा. आमतौर पर 10 रुपये में मिलने वाला अंडा 25,000 रुपये में खरीदा गया, जो इस बात का संकेत है कि लोग किस तरह दिल खोलकर मदद के लिए आगे आ रहे हैं. इस नीलामी के पीछे की भावना को व्यक्त करते हुए स्थानीय निवासी शब्बीर हुसैन ने कहा "सब जानते हैं कि एक अंडे की कीमत 10 रुपये है. मैंने 25,000 रुपये इसलिए नहीं दिए क्योंकि मैंने कहा कि मेरे पास पैसे हैं. इससे हमें यह संदेश मिलता है कि ईरान में बच्चों पर कितना अत्याचार हो रहा है. इसलिए मैंने उनके लिए 25,000 रुपये दिए. हम अपनी जान देने को तैयार हैं. हम इस समुदाय के लिए जिए हैं. हमें अपने नेता के हर आदेश का पालन करना होगा. अभी तक हमारे नेता ने हमें कोई आदेश नहीं दिया है."

लोगों ने क्या-क्या किया दान?

लद्दाख में चल रहे इस अभियान में हर वर्ग के लोगों ने भागीदारी निभाई. लोगों ने नकदी, सोना, चांदी और अन्य कीमती वस्तुएं दान कीं. यह सिर्फ आर्थिक सहयोग नहीं था, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव का भी प्रतीक था. एक भावुक पल तब देखने को मिला जब एक छोटी बच्ची ने अपना गुल्लक तोड़कर दान कर दिया. वहीं कई बच्चों ने अपनी साइकिलें तक दान में देकर एकजुटता का संदेश दिया.

कहां-कहां के लोग कर रहे दान?

सिर्फ लद्दाख ही नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के दृश्य देखने को मिले. रामबन जिले के चंदरकोट इलाके में शिया समुदाय के सैकड़ों लोग एक इमामबाड़े में एकत्र हुए और उन्होंने दिल खोलकर सहायता सामग्री दान की. यहां लोगों ने घरेलू बर्तनों से लेकर सोने-चांदी के आभूषण तक दान किए. महिलाओं ने अपनी चूड़ियां और बालियां तक उतारकर दे दीं, जबकि एक व्यक्ति ने अपनी भेड़ दान कर दी जो इस अभियान की गहराई को दर्शाता है.

क्या होला ईरानी दूतावास?

भारत में ईरानी दूतावास ने 22 मार्च को भारतीयों द्वारा किए गए इस सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया. उन्होंने इसे "दयालुता" और "मानवता" का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह मदद संघर्ष से प्रभावित लोगों के जीवन को फिर से संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

ईरान इजरायल युद्ध
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