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Buy American, रूसी तेल समेत इन 7 बातों पर सहमति बनी डील ब्रेकर, जानें कैसे भारत के सामने झुक गया US

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगस्त 2025 में भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के कुछ समय बाद ही भारत के साथ एक अहम व्यापार समझौते की घोषणा की है.

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( Image Source:  X/ @BRICSinfo )
विशाल पुंडीर
Edited By: विशाल पुंडीर

Updated on: 3 Feb 2026 8:21 AM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगस्त 2025 में भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के कुछ समय बाद ही भारत के साथ एक अहम व्यापार समझौते की घोषणा की है. यह घोषणा ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर की, जिसमें उन्होंने टैरिफ में बड़ी राहत और ऊर्जा क्षेत्र में भारत के रुख में बदलाव का दावा किया.

भारत और अमेरिका के बीच इस दौरान 7 ऐसे खास पॉइंट्स रहे जिनपर मोदी और ट्रंप की सहमति बनी. अब बड़ा सवाल ये है कि आखिर ट्रंप जो बार-बार भारत के ऊपर और ज्यादा टैरिफ लगाने का दबाव बना रहे थे अचानक कैसे झुक गए?

क्यों लगाया भारत पर 50% टैरिफ?

ट्रंप ने भारत पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, जिसमें से 25 प्रतिशत रूस से कच्चे तेल के आयात से जुड़ा था. ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों का बार-बार यह दावा रहा है कि भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने से रूस को युद्ध के लिए आर्थिक मदद मिल रही है. इसी आधार पर अमेरिका ने भारत पर सख्त टैरिफ नीति अपनाई थी, जिसे बाद में इस नए समझौते के तहत नरम किया गया.

क्या है वे 7 पॉइंट्स?

1. भारत, अमेरिका से निर्यात होने वाले उत्पादों पर टैरिफ घटाकर शून्य करेगा.

2. अमेरिका भारत पर लगाए गए पारस्परिक (रेसिप्रोकल) शुल्क को 25% से घटाकर 18% करेगा.

3. ट्रंप ने दावा किया कि भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद बंद कर देगा.

4. भारत अमेरिका से तेल की खरीद बढ़ाएगा.

5. भारत भविष्य में वेनेजुएला से तेल आयात शुरू कर सकता है.

6. भारत ने ऊर्जा, कृषि, कोयला और प्रौद्योगिकी सहित अमेरिकी उत्पादों की 500 अरब डॉलर की खरीदारी की प्रतिबद्धता जताई है.

7. दोनों देश ‘बाय अमेरिकन’ नीति को मजबूत करने पर सहमत हुए हैं.

क्या रेसिप्रोकल शुल्क के चलते झुके ट्रंप?

अंतरराष्ट्रीय व्यापार में टैरिफ को आसान भाषा में सीमा शुल्क या आयात शुल्क कहा जाता है. यह वह टैक्स होता है जो किसी देश द्वारा आयात किए गए सामान पर लगाया जाता है. वहीं ‘रेसिप्रोकल’ का अर्थ है पारस्परिक या ‘जैसे को तैसा’, जब अमेरिका ने भारत पर भारी टैरिफ लगाने का ऐलान किया था, तब भारत ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिका से आने वाले सामान पर समान टैरिफ लगाने की घोषणा की थी.

उदाहरण के तौर पर, यदि अमेरिका भारत में बनी मोटरसाइकिल पर 25 प्रतिशत टैक्स लगाता है, तो भारत भी अमेरिका से आने वाले किसी उत्पाद पर उतना ही टैक्स लगाएगा.

भारत के लिए क्यों दी गई टैरिफ में राहत?

अमेरिका ने भारत के साथ मित्रतापूर्ण संबंधों को ध्यान में रखते हुए भारत पर लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को तत्काल 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का फैसला किया है. इसके बदले में भारत ने अमेरिका के खिलाफ अपनी टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को शून्य करने और अमेरिकी उत्पादों को प्राथमिकता देने पर सहमति जताई है.

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?

रिपोर्ट्स के मुताबिक यह समझौता अमेरिका के ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और कृषि क्षेत्र को बड़ा बढ़ावा देगा. 500 अरब डॉलर की अमेरिकी वस्तुओं की खरीद से दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते मजबूत होंगे. हालांकि, सवाल यह भी उठ रहा है कि रेसिप्रोकल टैरिफ जैसी नीतियां लंबे समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था को किस दिशा में ले जाएंगी और क्या ट्रंप का यह ‘टैरिफ बम’ दूसरे देशों के साथ व्यापार युद्ध को और तेज करेगा.

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