चीन-पाक की बढ़ी टेंशन! अब सरकार ही नहीं, प्राइवेट कंपनियां भी बनाएंगी भारत की घातक मिसाइलें; आखिर क्यों लिया गया यह फैसला?
भारत सरकार पहली बार निजी कंपनियों को मिसाइल निर्माण की अनुमति देने की तैयारी में है. Astra Mark 2 मिसाइल के निर्माण के लिए जल्द RFP जारी हो सकता है.
भारत सरकार रक्षा निर्माण के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है. केंद्र सरकार पहली बार निजी भारतीय कंपनियों को मिसाइलों के विकास और निर्माण की अनुमति देने की योजना बना रही है. अब तक यह क्षेत्र लगभग पूरी तरह सरकारी रक्षा संस्थानों के पास था.
यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब इंडोनेशिया ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की विकसित की गई अस्त्र (Astra) मिसाइल खरीदने में रुचि दिखाई है. वहीं, भारतीय सेना और मित्र देशों से बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार घरेलू उत्पादन बढ़ाने और रक्षा निर्यात को मजबूत करना चाहती है.
किन सेक्टर्स में भारत प्राइवेट सेक्टर्स को कर चुका है शामिल?
अब तक भारत सरकार विमान, ड्रोन, तोप और नौसैनिक प्लेटफॉर्म जैसे कई रक्षा क्षेत्रों में निजी कंपनियों को शामिल कर चुकी है. अगर मिसाइल निर्माण का क्षेत्र भी निजी कंपनियों के लिए खोल दिया जाता है, तो इसे देश की रक्षा उत्पादन नीति में सबसे बड़े सुधारों में से एक माना जाएगा. क्योंकि अब तक मिसाइल निर्माण को बेहद रणनीतिक और संवेदनशील क्षेत्र माना जाता रहा है.
कौनसी कंपनियां बनाएंगी मिसाइल?
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा मंत्रालय जल्द ही एक रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी करेगा. इसके जरिए निजी कंपनियों को Astra Mark 2 Beyond Visual Range (BVR) एयर-टू-एयर मिसाइल बनाने के लिए आमंत्रित किया जाएगा. रिपोर्ट के मुताबिक, जिन कंपनियों के इसमें भाग लेने की संभावना है, उनमें ICOMM, Adani, Bharat Forge, Tata Group और Mahindra Group शामिल हैं.
क्यों अहम है सरकार का ये फैसला?
सरकार का यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भारतीय सशस्त्र बलों और मित्र देशों से मिसाइलों की मांग लगातार बढ़ रही है. फिलहाल सरकारी कंपनी भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) अकेले इस बढ़ती मांग को पूरी तरह पूरा नहीं कर पा रही है. ऐसे में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए निजी कंपनियों को भी इसमें शामिल करने की तैयारी की जा रही है.
Astra Mark 2 मिसाइल को DRDO ने विकसित किया है. यह एक Beyond Visual Range एयर-टू-एयर मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता 180 से 200 किलोमीटर बताई गई है. रिपोर्ट के अनुसार, इसे चीन की लंबी दूरी की PL-15E एयर-टू-एयर मिसाइल का मुकाबला करने के लिए तैयार किया गया है. इसी PL-15E मिसाइल को पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर से पहले पाकिस्तान को उपलब्ध कराया गया था.
क्या इनके अलावा और मिसाइलें भी बनाएगा प्राइवेट सेक्टर?
रिपोर्ट के अनुसार, Astra Mark 2 मिसाइल को तेजस Mark 1-A, MiG-29, Su-30 MKI और Rafale Marine लड़ाकू विमानों के साथ जोड़ा जाएगा. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भविष्य में सरकार Pralay Tactical Ballistic Missile के विकास और निर्माण का काम भी निजी क्षेत्र के लिए खोल सकती है. Pralay मिसाइल की मारक क्षमता 500 किलोमीटर है. यह दो चरणों वाली बैलिस्टिक मिसाइल है और ध्वनि की गति से छह गुना अधिक रफ्तार से उड़ान भर सकती है.
Pralay भारत की Integrated Rocket Forces का हिस्सा है. इसमें Long-Range Land Attack Cruise Missile (LRLACM), अगली पीढ़ी की BrahMos मिसाइल और Extended Range Pinaka Multi-Barrel Rocket Launching System भी शामिल हैं. Pinaka प्रणाली लगभग 300 किलोमीटर तक लक्ष्य पर हमला करने में सक्षम बताई गई है.
क्या है इस फैसले की वजह?
रिपोर्ट के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के बाद सरकार ने स्टैंड-ऑफ हथियारों के महत्व को और गंभीरता से लिया है. अब सरकार तेजी से भारत की मिसाइल और रॉकेट क्षमता बढ़ाना चाहती है ताकि संभावित विरोधियों के खिलाफ देश की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो सके. इस योजना के तहत सरकार आक्रामक मिसाइलों के साथ-साथ रक्षा के लिए एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम को भी मजबूत करने पर जोर दे रही है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हालिया ईरान-अमेरिका संघर्ष ने यह दिखाया कि आधुनिक युद्ध में मिसाइलें महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को कितना नुकसान पहुंचा सकती हैं. इसी वजह से भारत अपनी मिसाइल रक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने पर काम कर रहा है.
क्या है भारत की प्लानिंग?
भारत केवल मिसाइल उत्पादन ही नहीं बढ़ा रहा है, बल्कि अपने एयर डिफेंस नेटवर्क को भी मजबूत कर रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत और इजरायल मिलकर नौसेना के युद्धपोतों की सुरक्षा के लिए लंबी दूरी की Surface-to-Air Missile विकसित कर रहे हैं.
तुर्की के ड्रोन्स के लिए क्या है भारता का प्लान?
इसके अलावा, भारत एक बहु-स्तरीय एंटी-मिसाइल और एंटी-ड्रोन नेटवर्क भी तैयार कर रहा है. इसका उद्देश्य पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले कम लागत वाले तुर्की ड्रोन और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के लंबी दूरी के रॉकेट और बैलिस्टिक मिसाइलों का मुकाबला करना है.
कब मिलेगा भारत को पांचवां एयर डिफेंस सिस्टम?
रिपोर्ट के अनुसार, भारत को पांचवां S-400 एयर डिफेंस सिस्टम नवंबर में मिलने की उम्मीद है. इसके साथ ही सरकार रूस से पांच अतिरिक्त S-400 सिस्टम खरीदने की योजना भी बना रही है, ताकि देश की हवाई सुरक्षा और मजबूत हो सके.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि S-400 सिस्टम की सुरक्षा के लिए रूस के Pantsir एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे उन्हें कामिकाजे ड्रोन और रॉकेट हमलों से बचाया जा सके.




