भारत में आज भी कई युवा अपना घर न होने की वजह से शादी टाल देते हैं. समाज में यह धारणा बनी हुई है कि शादी से पहले घर, कार और अच्छी नौकरी होना जरूरी है. लेकिन कई उदाहरण बताते हैं कि खुशहाल शादी सिर्फ अपने घर पर नहीं, बल्कि रिश्ते की मजबूती पर टिकी होती है. मनोवैज्ञानिक भी मानते हैं कि रिश्ते में भरोसा, सम्मान और संवाद सबसे बड़ी सुरक्षा देते हैं. दूसरी ओर, भारी होम लोन और ईएमआई कई बार रिश्तों में तनाव की वजह बन जाते हैं. अपना घर खरीदना गलत नहीं है, लेकिन यह फैसला आर्थिक क्षमता और सही समय देखकर लेना चाहिए. केवल सामाजिक दबाव में लिया गया बड़ा आर्थिक फैसला भविष्य में परेशानी बढ़ा सकता है. आखिरकार मकान ईंट-पत्थर से बनता है, लेकिन घर दो लोगों के भरोसे, प्यार और साथ से बनता है.