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'FIR के लिए सुप्रीम कोर्ट तक भटकना पड़े तो गुस्सा बढ़ेगा ही', प्रबल प्रताप मामले पर बोले डॉ. एपी सिंह; जानें और क्या कहा

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Interview Dr A.P. Singh | Prabal Pratap Supreme Court Scene| CJI Controversies, Courtroom Misconduct
संजीव चौहान
By: संजीव चौहान

Updated on: 12 July 2026 8:30 PM IST

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. एपी सिंह ने स्टेट मिरर हिंदी के साथ खास बातचीत में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान एक युवक के द्वारा मुख्य न्यायाधीश को गाली देने और फिर कोर्टरूम में फाइल फेंकने के मामले में कहा कि अपने करीब 29 साल के वकालती जीवन में उन्होंने इस तरह की घटनाएं बेहद कम देखी हैं. अदालत में अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना, गाली देना या फाइल फेंकना पूरी तरह अनुचित, गैरकानूनी और न्यायपालिका की गरिमा के खिलाफ है. हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस तरह का व्यवहार अचानक पैदा नहीं होता. यदि कोई व्यक्ति एफआईआर दर्ज कराने जैसी शुरुआती प्रक्रिया के लिए ही पुलिस, ट्रायल कोर्ट, हाई कोर्ट और अंत में सुप्रीम कोर्ट तक भटकने को मजबूर हो जाए, तो उसके भीतर निराशा और हताशा पैदा होना स्वाभाविक है. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में सबसे पहले निचली अदालतों और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली की समीक्षा होनी चाहिए.