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देश का कौन सा जिला जो हो रहा सबसे तेज बूढ़ा, कहां सबसे ज्यादा युवा? बदलते डेमोग्राफिकल मैप की पूरी कहानी

देश का कौन सा जिला सबसे तेजी से बूढ़ा हो रहा है और कहां सबसे ज्यादा युवा आबादी रहती है? जानिए भारत के बदलते डेमोग्राफिक मैप, बुजुर्ग आबादी, युवा जिलों और 2036 के अनुमान.

India Oldest District Youngest District Demographic Map
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देश में आगामी जनगणना की तैयारियों और जनसंख्या से जुड़े मुद्दों पर तेज हुई चर्चा के बीच अब एक नया सवाल भी केंद्र में है- भारत का कौन सा जिला सबसे तेजी से बुढ़ापे की ओर बढ़ रहा है और कहां सबसे ज्यादा युवा आबादी रहती है? बदलते जनसांख्यिकीय (डेमोग्राफिक) रुझान बता रहे हैं कि देश का आयु-संतुलन तेजी से बदल रहा है. एक ओर दक्षिण भारत के कई जिले घटती जन्मदर और बढ़ती लाइफ एक्पेक्टेंसी के कारण ओल्ड एज सोसाइटी की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं उत्तर और पूर्वी भारत के कई जिले अब भी युवाओं की बड़ी आबादी के दम पर देश के सबसे युवा क्षेत्रों में शामिल हैं.

डाटा विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह बदलाव आने वाले वर्षों में रोजगार, अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा की नीतियों पर बड़ा असर डालेगा. आकंड़ों से समझें डेमोग्राफिकल बदलाव की पूरी कहानी.

भारत की आबादी का बदलता चेहरा

भारत आज दुनिया का सबसे युवा देशों में शामिल है, लेकिन यही तस्वीर तेजी से बदल रही है. एक तरफ दक्षिण भारत के कई हिस्सों में बुजुर्ग आबादी का अनुपात लगातार बढ़ रहा है, वहीं उत्तर और पूर्वी भारत के कई जिले अब भी युवा आबादी के गढ़ बने हुए हैं. घटती प्रजनन दर, बढ़ती जीवन प्रत्याशा और बड़े पैमाने पर पलायन ने देश के जनसांख्यिकीय संतुलन को नई दिशा दे दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले एक-दो दशकों में यही बदलाव देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा नीतियों की सबसे बड़ी चुनौती बनने वाला है.

2036 तक हर सातवां भारतीय होगा 60 वर्ष से अधिक

यह रुझान भारत सरकार की Technical Group on Population Projections for India and States (2011–2036) रिपोर्ट, Longitudinal Ageing Study in India (LASI) Wave-1 (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय एवं इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पॉपुलेशन साइंसेज-IIPS), भारत की जनगणना 2011 (Census of India), राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के जनसांख्यिकीय संकेतकों तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी रिपोर्टों और आधिकारिक दस्तावेजों पर आधारित हैं.

Technical Group on Population Projections (TGPP) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2011 में देश में 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों की संख्या करीब 10 करोड़ थी. अनुमान है कि 2036 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 23 करोड़ हो जाएगी, यानी देश की कुल आबादी का करीब 15 प्रतिशत हिस्सा बुजुर्ग होगा. इसका अर्थ है कि 2036 तक हर सातवां भारतीय वरिष्ठ नागरिक सीनियर सिटीजन होगा.

सबसे तेजी से बूढ़ा हो रहा है दक्षिण भारत

TGPP की रिपोर्ट के अनुसार राज्य स्तर पर केरल भारत का सबसे अधिक उम्रदराज राज्य बन चुका है. अनुमान है कि 2036 तक यहां 60 वर्ष से अधिक आयु की आबादी कुल जनसंख्या के लगभग 23 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी. इसके बाद तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश और पंजाब भी ऐसे राज्यों में शामिल हैं जहां बुजुर्ग आबादी राष्ट्रीय औसत से अधिक है. तमिलनाडु में 2036 तक ज्यादा उम्र के लोगों की आबादी 21 से 22 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है.

बदलाव की वजह क्या?

इस बदलाव के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं- कम होती जन्म दर, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण बढ़ती जीवन प्रत्याशा और युवाओं का रोजगार के लिए दूसरे राज्यों तथा विदेशों की ओर पलायन.

कौन से जिले बढ़ रहे हैं बुढ़ापे की ओर?

भारत सरकार ने अभी तक सभी जिलों की Median Age के आधार पर कोई आधिकारिक राष्ट्रीय रैंकिंग जारी नहीं की है. हालांकि जनगणना, जनसंख्या अध्ययन और विभिन्न जनसांख्यिकीय विश्लेषणों के आधार पर केरल के पथनमथिट्टा (Pathanamthitta), कोट्टायम (Kottayam), अलप्पुझा (Alappuzha) और एर्नाकुलम (Ernakulam) ऐसे जिलों में माने जाते हैं जहां बुजुर्ग आबादी का अनुपात देश में सबसे अधिक है.

इन जिलों में दशकों से कम प्रजनन दर बनी हुई है. बड़ी संख्या में युवा खाड़ी देशों और अन्य राज्यों में रोजगार के लिए चले गए, जबकि स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार से लोगों की औसत आयु लगातार बढ़ी. परिणामस्वरूप यहां आबादी का आयु ढांचा तेजी से वृद्ध हो रहा है.

सबसे युवा आबादी कहां रहती है?

दूसरी ओर बिहार और उत्तर प्रदेश आज भी देश के सबसे युवा राज्यों में शामिल हैं. इन राज्यों में जन्मदर अपेक्षाकृत अधिक है, जिससे कार्यशील आयु वर्ग और बच्चों की संख्या बड़ी बनी हुई है.

जनसांख्यिकीय रुझान (डेमोग्राफिकल चेंजेज) बताते हैं कि किशनगंज, अररिया, पटना (बिहार), श्रावस्ती, बहराइच और गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) जैसे जिलों में युवा आबादी का अनुपात काफी अधिक है. इन क्षेत्रों में औसत आयु कम होने का मुख्य कारण उच्च प्रजनन दर और अपेक्षाकृत कम वृद्ध आबादी है.

बदलती आबादी का अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?

भारत लंबे समय से अपने Demographic Dividend यानी युवा आबादी की ताकत का लाभ उठाने की बात करता रहा है. लेकिन दक्षिण भारत के कई राज्यों में अब श्रमबल की कमी का खतरा बढ़ रहा है. वहीं उत्तर भारत में बड़ी युवा आबादी रोजगार, शिक्षा और कौशल विकास की चुनौती लेकर खड़ी है.

यदि इन युवाओं को पर्याप्त रोजगार और प्रशिक्षण मिलता है तो यह भारत की आर्थिक वृद्धि को गति दे सकते हैं. लेकिन अवसरों की कमी होने पर यही बड़ी आबादी बेरोजगारी और सामाजिक असंतोष का कारण भी बन सकती है.

स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा की बढ़ेगी चुनौती

बुजुर्ग आबादी बढ़ने के साथ सरकार पर स्वास्थ्य सेवाओं, पेंशन, दीर्घकालिक देखभाल और सामाजिक सुरक्षा का दबाव भी बढ़ेगा. अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों, विधवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर बुजुर्गों के लिए विशेष योजनाओं की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है.

भारत सरकार का माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 (बाद में संशोधित) बच्चों और उत्तराधिकारियों को माता-पिता के भरण-पोषण की कानूनी जिम्मेदारी देता है. वहीं, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय बुजुर्गों के कल्याण से जुड़े कार्यक्रमों का नोडल मंत्रालय है.

सिल्वर इकोनॉमी बनेगी नया अवसर

बढ़ती बुजुर्ग आबादी केवल चुनौती नहीं बल्कि एक बड़ा आर्थिक अवसर भी है. स्वास्थ्य सेवाएं, होम केयर, मेडिकल उपकरण, डिजिटल हेल्थ, बीमा, सहायक तकनीक और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष सेवाओं का बाजार तेजी से बढ़ रहा है. विशेषज्ञ इसे सिल्वर इकोनॉमी कहते हैं. विभिन्न उद्योग अध्ययनों के अनुसार भारत की सिल्वर इकोनॉमी का आकार लगातार बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में इसमें कई गुना विस्तार की संभावना है.

असली तस्वीर क्या?

भारत अब दो अलग-अलग जनसांख्यिकीय वास्तविकताओं के साथ आगे बढ़ रहा है. दक्षिण भारत तेजी से वृद्ध समाज की ओर बढ़ रहा है, जबकि उत्तर और पूर्वी भारत अब भी युवा आबादी से भरपूर हैं. यही असमानता आने वाले वर्षों में रोजगार, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा की नीतियों को तय करेगी.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देश इस बदलाव की तैयारी अभी से करता है तो युवा आबादी का लाभ भी मिलेगा और बढ़ती बुजुर्ग आबादी की जरूरतों को भी बेहतर ढंग से पूरा किया जा सकेगा.

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