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ईरान 40 दिन तक लड़ा, चीन-पाकिस्तान का सामना करने के लिए भारत कितना तैयार, रिटायर लेफ्टिनेंट कर्नल ने सब कुछ बताया

क्या भारत भविष्य में चीन और पाकिस्तान जैसे दो मोर्चों पर एक साथ होने वाले युद्ध का सामना करने में सक्षम है? लेफ्टिनेंट कर्नल ने बताया कि 2030 के बाद भारत के सामने 'टू-फ्रंट' या '3.5 फ्रंट वॉर' जैसी चुनौती खड़ी हो सकती है, लेकिन देश के पास इस स्थिति से निपटने की जरूरी ताकत और क्षमता मौजूद है.

ईरान 40 दिन तक लड़ा, चीन-पाकिस्तान का सामना करने के लिए भारत कितना तैयार, रिटायर लेफ्टिनेंट कर्नल ने सब कुछ बताया
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हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत4 Mins Read

Updated on: 10 April 2026 4:22 PM IST

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान द्वारा 40 दिनों तक संघर्ष करने की क्षमता ने दुनिया भर के सैन्य विश्लेषकों का ध्यान खींचा है. इसी संदर्भ में भारत की सुरक्षा तैयारियों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है. क्या भारत भविष्य में चीन और पाकिस्तान जैसे दो मोर्चों पर एक साथ युद्ध की स्थिति का सामना कर सकता है?

इस पर स्टेट मिरर हिंदी से बात करते हुए रिटायर लेफ्टिनेंट कर्नल जे.एस. सोढ़ी ने बताया कि 2030 के बाद भारत के सामने 'टू-फ्रंट' या '3.5 फ्रंट वॉर' का खतरा बन सकता है, लेकिन भारत में इससे निपटने की क्षमता मौजूद है. हालांकि इसके लिए रक्षा बजट बढ़ाने, सैन्य उत्पादन में सुधार और नागरिकों की भागीदारी जैसी अहम जरूरतों पर तेजी से काम करना होगा.

2030 के बाद बढ़ सकता है खतरा

रिटायर लेफ्टिनेंट कर्नल जे.एस. सोढ़ी के अनुसार, 2030 के बाद कभी भी चीन और पाकिस्तान भारत के खिलाफ टू-फ्रंट वॉर की स्थिति बना सकते हैं. उनका मानना है कि हाल की कूटनीतिक घटनाओं से पाकिस्तान का मनोबल बढ़ा है, जो भारत के लिए चिंता का विषय हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान को अब कई देशों से आर्थिक और सैन्य समर्थन मिल सकता है.

चीन की ‘पर्दे के पीछे’ भूमिका

जे.एस. सोढ़ी ने यह भी साफ किया कि भले ही चीन खुलकर सामने नहीं आया, लेकिन उसने पर्दे के पीछे काफी सक्रिय भूमिका निभाई. खासतौर पर ईरान को समझाने में चीन का प्रभाव दिखा, क्योंकि दोनों देशों के रिश्ते काफी गहरे हैं. इससे यह संकेत मिलता है कि भविष्य के किसी भी संघर्ष में चीन अप्रत्यक्ष रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

क्या भारत 40 दिन तक अकेले लड़ सकता है?

चर्चा में यह बड़ा सवाल उठा कि जिस तरह ईरान ने बिना सीधे समर्थन के 40 दिन तक संघर्ष किया, क्या भारत भी ऐसी स्थिति में टिक सकता है? इस पर रिटायर अधिकारी ने कहा कि भारत में टू-फ्रंट या 3.5 फ्रंट वॉर से निपटने की क्षमता है, लेकिन इसके लिए कुछ अहम कदम उठाने जरूरी होंगे.

सेना के बजट को बढ़ाने की जरूरत

रिटायर कर्नल ने जोर देकर कहा कि भारत को अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए रक्षा बजट में इजाफा करना होगा. वर्तमान में यह जीडीपी का करीब 2% है, जिसे अगले 5-6 वर्षों में कम से कम 3% तक ले जाना जरूरी है. उन्होंने चाणक्य का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी देश की सैन्य शक्ति उसकी आर्थिक क्षमता पर निर्भर करती है.

‘ऑपरेशन सिंदूर’ और ईरान युद्ध का असर

इस दौरान उन्होंने बताया कि भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में पाकिस्तान को हराया, जबकि चीन पीछे से उसकी मदद कर रहा था. इसके अलावा, ईरान ने भी दो बड़ी सैन्य शक्तियों का सामना किया. इन घटनाओं ने यह साबित किया कि मजबूत रणनीति और इच्छाशक्ति के साथ बड़ी चुनौतियों का सामना किया जा सकता है.

उत्पादन और जवाबदेही पर सवाल

इस बातचीत के दौरान कर्नल जे.एस. सोढ़ी ने भारतीय रक्षा उत्पादन पर भी सवाल उठाए. उदाहरण देते हुए कहा कि अगर चीन एक साल में 240 लड़ाकू विमान बना सकता है, तो भारत 24 क्यों नहीं बना पा रहा? उन्होंने जवाबदेही और जिम्मेदारी की कमी को इसका बड़ा कारण बताया. कुल मिलाकर, रिटायर लेफ्टिनेंट कर्नल का मानना है कि भारत में क्षमता की कमी नहीं है, लेकिन उसे सही दिशा, बेहतर रणनीति, ज्यादा निवेश और मजबूत राष्ट्रीय भागीदारी की जरूरत है. आने वाले सालों में अगर इन पहलुओं पर तेजी से काम किया गया, तो भारत किसी भी बड़े खतरे का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हो सकता है.


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