20 रुपये रिश्वत लेने के आरोप में कॉन्स्टेबल ने 30 साल तक अदालत में लड़ी जंग, इंसाफ मिला तो अगली सुबह नहीं खुली आंखें
गुजरात के एक पुलिस कांस्टेबल पर 20 रुपये की रिश्वत के आरोप में 30 साल तक मुकदमा चला. जब हाईकोर्ट ने उन्हें किया तो उसके अगले ही दिन उनकी मौत हो गई.
20 रुपये के आरोप ने कांस्टेबल की छीन ली पूरी जिंदगी, इंसाफ मिला तो सांसें साथ छोड़ गईं
Gujarat Constable Dies a Day After Acquittal in Rs 20 Bribe Case: कानून और इंसाफ को लेकर एक मशहूर कहावत है- Justice Delayed is Justice Denied, यानी देर से मिला न्याय भी कई बार अन्याय के बराबर हो जाता है. गुजरात से सामने आया एक मामला इस कहावत को बेहद दर्दनाक तरीके से सच साबित करता है. यह कहानी है अहमदाबाद के वेजलपुर थाने में तैनात रहे पुलिस कांस्टेबल बाबू भाई प्रजापति की, जिन पर महज 20 रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगा था. यह आरोप उनकी ज़िंदगी के पूरे 30 साल खा गया. अदालत से इंसाफ मिला, लेकिन तब, जब वह उसे जी ही नहीं पाए.
20 नवंबर 1996 को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को शिकायत मिली कि वेजलपुर इलाके में ट्रकों को अवैध एंट्री दिलाने के बदले बाबू भाई प्रजापति, सेवेनकुमार रथवा और नसरुल्लाह खान ने 20 रुपये की रिश्वत ली है. इसी शिकायत के आधार पर तीनों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया.
कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
मामला अदालत पहुंचा और लंबी सुनवाई के बाद 2004 में ट्रायल कोर्ट ने तीनों को दोषी मानते हुए चार साल की सजा सुना दी. इसके साथ ही उनकी नौकरी भी चली गई. उस दिन के बाद से बाबू भाई की ज़िंदगी पूरी तरह बदल गई.
30 साल बाबू भाई ने कैसे बिताए?
तीनों कांस्टेबलों ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन यहां मामला 20 साल से ज्यादा समय तक लटका रहा. आखिरकार 4 फरवरी 2026 को जस्टिस एस. वी. पिंटो की बेंच ने फैसला सुनाया और तीनों को पूरी तरह बरी कर दिया. इस दौरान बाबू भाई अहमदाबाद छोड़कर अपने गृह जिले पाटन में रहने लगे थे. नौकरी जा चुकी थी, सामाजिक प्रतिष्ठा पर दाग लग चुका था और उम्र के सबसे अहम साल अदालतों के चक्कर में गुजर गए.
"भगवान चाहें तो अब मुझे अपने पास बुला लें”
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 5 फरवरी की सुबह बाबू भाई को बरी होने की जानकारी मिली. वह अपने वकील नितिन गांधी से मिलने पहुंचे. बातचीत में नौकरी से जुड़े बकाया और कानूनी विकल्पों पर चर्चा हुई, लेकिन बाबू भाई आगे कोई लंबी कानूनी लड़ाई नहीं चाहते थे. उन्होंने अपने वकील से भावुक होकर कहा, “अब मेरी जिंदगी से ये दाग हट गया है, भगवान चाहें तो अब मुझे अपने पास बुला लें.”
अगले दिन टूट गई सांस
यह बातचीत वकील के ऑफिस में लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई थी.उस रात बाबू भाई अपने भतीजे के घर रुके. लेकिन 6 फरवरी की सुबह, नींद में ही उनकी मौत हो गई. जिस इंसाफ का इंतज़ार उन्होंने 30 साल किया, उसे देखने के अगले ही दिन वह दुनिया छोड़ गए.





