EXCLUSIVE: जंग भले ही ईरान-इजराइल की हो, मोदी ने मगर भारत का भविष्य दांव पर लगा डाला - पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा
पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने ईरान-इजराइल तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजराइल यात्रा को “रणनीतिक भूल” बताया. उन्होंने कहा कि इससे भारत की संतुलित विदेश नीति और ईरान के साथ रिश्तों को नुकसान पहुंचा है.
Iran War: “भारत को अंतरराष्ट्रीय पटल पर आज मैं जहां कूटनीति, विदेश नीति, सामरिक और सैन्य या जियो पॉलिटिक्स की नजर से खड़ा देखता हूं. उसे देखकर दावे के साथ कह सकता हूं कि खुद को सम्मानित कराने की सनक के फेर में बुरी तरह से फंसे पड़े प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कभी दुनिया के बड़े लोकतांत्रिक देशों में शुमार रहे ताकतवर भारत को आज दांव पर लगाने में जरा भी नहीं ठिठक रहे हैं.
''यह मैं नहीं कह रहा हूं. सिवाए भारत के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाकी भारत सहित दुनिया के उस बच्चे-बच्चे को दिखाई दे रहा है जिसके लिए खुद से पहले देश है. मोदी जी को इसलिए देश दिखाई नहीं दे रहा है क्योंकि उन्हें पहले अपना निजी सम्मान-इनाम-इकराम देश के सामने बड़ा लग रहा है. जब इस कदर किसी देश का शीर्ष नेतृत्व ही अंधत्व का शिकार हो तो उस देश का बेड़ा गर्क होने से भगवान भी नहीं बचा सकते हैं.''
पूर्व विदेश मंत्री कड़वा क्यों बोले?
''यह सब मैं इसलिए दावे के साथ ठोंक कर कह सकता हूं क्योंकि मैंने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की हुकूमत में भारत का विदेश मंत्री रहते हुए ईरान, इजराइल, अमेरिका, चीन, बांग्लादेश, रुस, इराक, अफगानिस्तान सहित दुनिया के तमाम देशों और उनके नेताओं की सोच को बेहद करीब से देखा समझा-परखा है.” यह तमाम बेबाक बातें भारत के पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के कत्ल के तुरंत बाद बेबाकी से बयान की हैं. भारत के पूर्व विदेश और वित्तमंत्री, ब्यूरोक्रेट यशवंत सिन्हा नई दिल्ली में स्टेट मिरर हिंदी के एडिटर इनवेस्टीगेशन संजीव चौहान के साथ एक्सक्लूसिव बात कर रहे थे.
मोदी क्यों इजराइल पहुंच गए?
स्टेट मिरर हिंदी के सवाल के जवाब में पूर्व विदेश मंत्री बोले, “जब ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच जंग के से हालात दुनिया को नजर आ रहे थे. तब फिर हमारे प्रधानमंत्री को ऐसे नाजुक वक्त में इजराइल जाकर भारत और देश की विदेश नीति की सार्वजनिक रुप से सत्या कटवाने या मिट्टी पलीद कराने की क्या जरूरत पड़ी थी? इसका भी जवाब है मेरे पास. क्योंकि मोदी जी बालहठी हैं. अपना हठ पूरा करने के लिए वह किस हद तक जा सकते हैं? मोदी जी देश के लिए नहीं अपने निजी सम्मान के लिए इस कदर के बेमौके पर भी इजराइल अपने लिए तालियां पिटवाने की सनक में जा पहुंचे. देश को पीछे धकेलते हुए मोदी जी इजराइल जाते वक्त यह भूल गए कि वह भारत के तमाम पूर्व प्रधानमंत्रियों की श्रेणी में खुद को सबसे मतलब-परस्त पीएम दर्ज करवाने की गलती जान-बूझकर कर रहे हैं.”
क्या मोदी ने भारत को कांटे बो दिए?
भारत के पूर्व विदेश मंत्री ने कहा, “दरअसल जब यह दुनिया को पता है कि भारत के रिश्ते इजराइल और ईरान दोनों से ही ठीक-ठाक हैं. तो फिर यह बात मोदी जी को क्यों नहीं दिखाई पड़ी जो दुनिया का बच्चा-बच्चा जानता है. मोदी को इजराइल की यात्रा करना तो दूर, मौजूदा वक्त में दुनिया के बदतर कहूं या फिर नाजुक होते अंतरराष्ट्रीय हालातों में उन्हें इजराइल क्या किसी भी देश की ओर घूमकर भी नहीं देखना चाहिए था. विशेषकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजराइल की यात्रा तो कतई नहीं करते. वह भी तब जब अमेरिका इजराइल किसी भी पल भारत के करीबी दोस्त ईरान को तबाह करने का षडयंत्र रच रहे हों, उन हालातों और विपरीत परिस्थितियों में तो कतई मोदी को वह नहीं करना चाहिए था, जो आज वह करके भारत की आने वाली पीढ़ियों तक के लिए कांटे बोए बैठे हैं.”
तो क्या भारत की इज्जत बच जाती?
एक सवाल के जवाब में भारत के पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा, “दरअसल यह सब और कुछ नहीं मोदी जी के लिए विनाशकाले विपरीत बुद्धि हो जाने जैसा है. अगर मोदी इस वक्त गजब की विदेश और कूटनीति का खेल करके किसी भी बहाने से इजराइल की यात्र टाल गए होते. वे इजराइल की संसद में भाषण देकर दुनिया की नजरों में आने की बालहठ से खुद को बचा ले जाते. तो संभव था कि आज ईरान के सुप्रीम कमांडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के कत्ल होने के बाद बदले हुए हालातों में भारत, दोनों देशों (इजराइल-ईरान) की नजरों में मजबूत स्थिति बनाए रह सकता था. अब मोदी जी ने जो कुछ करा-धरा है उसके चलते तो ईरान की नजरों में भारत की मिट्टी पलीद हो ही गई है.”
क्या भारत को इन देशों ने उलझा दिया?
क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इतनी बड़ी भूल जान-बूझकर कर डाली कि वह मध्य पूर्व देशों के ऊपर मंडराते जंग के काले बादलों के बीच भी भारत के मजबूत भविष्य की सोचे बिना इजराइल यात्रा पर चले गए? स्टेट मिरर हिंदी द्वारा पूछने पर भारत के पूर्व विदेश मंत्री ने कहा, “नहीं ऐसा नहीं है. दरअसल मोदी को देश के ब्यूरोक्रेट्स और उनके सुरक्षा सलाहकारों, खुफिया एजेंसियों ने इस नाजुक वक्त में इजराइल न जाने की सलाह जरूर दी होगी.
क्या स्व-सम्मान की जिद मुसीबत बनेगी?
मुझे पूरा विश्वास है कि मगर इजराइल की संसद में जाकर भाषण देने की ललक और फिर वहां जाकर इजराइल का सर्वोच्च सम्मान पाने के लालच ने मोदी की अंतरआत्मा को सही-गलत के बीच फर्क कर पाने की शक्ति छीन ली होगी. लिहाजा उन्होंने देश को पीछे रखकर अपने बारे में अपनी पसंद-न-पसंद और अपनी निजी खुशी मान-सम्मान को तवज्जहो दी.
ईरान के सीने पर क्यों सांप लोट रहे होंगे?
नतीजा देख लीजिए आज जमाने के सामने है. किसी जंग का हिस्सा न होने के बाद भी भारत की विदेश और कूटनीति ईरान के मामले में शर्मिंदा हो रही है. यह मैं कोई विशेष बात नहीं कह रहा हूं. न ही मेरी मोदी जी से कोई ज्यादती रंजिश है. यह सब मैं भारत के हित में कह रहा हूं. देश का पूर्व विदेश मंत्री होने की हैसियत से देश के हित में. जिस दिन हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजराइल की संसद में खड़े होकर अपने सम्मान में तालियां बजवा रहे थे. जब वहां के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू मोदी जी के गले में बाहें डाले गलबहियां कर रहे थे, तब ईरान और उसके शीर्ष नेताओं के सीने पर किस कदर सांप लोट रहे होंगे.”




