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I-PAC रेड केस में ED का बड़ा आरोप, सुप्रीम कोर्ट से बोली- ममता बनर्जी पुलिस के साथ आईं और सबूत ले गई

आई-पैक (I-PAC) मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट से सख्त रुख अपनाने की मांग की है. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान ED ने कहा कि 8 जनवरी को कोलकाता में I-PAC मुख्यालय और उसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर चल रही छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पुलिस बल और शीर्ष अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचीं और कथित तौर पर अहम सबूत हटाए गए.

I-PAC रेड केस में ED का बड़ा आरोप, सुप्रीम कोर्ट से बोली- ममता बनर्जी पुलिस के साथ आईं और सबूत ले गई
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( Image Source:  ANI )
नवनीत कुमार
Edited By: नवनीत कुमार

Updated on: 15 Jan 2026 12:28 PM IST

सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील मामला गूंजा. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर I-PAC कार्यालय और उसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर हुई छापेमारी में दखल देने का गंभीर आरोप लगाया. ED का कहना है कि 8 जनवरी को कोलकाता में चल रही जांच के दौरान राज्य सत्ता ने जांच एजेंसी के काम में सीधा हस्तक्षेप किया. इस याचिका ने केंद्र और राज्य के बीच टकराव को और तीखा कर दिया है.

ED की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में हालात को “चौंकाने वाला” बताया. उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ छापे की जगह पर पहुंचीं और कथित तौर पर अहम दस्तावेज अपने साथ ले गईं. ED का आरोप है कि यह कार्रवाई कोयला तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में चल रही जांच को कमजोर करने की कोशिश थी. मेहता ने कहा कि ऐसी घटनाएं केंद्रीय एजेंसियों का मनोबल तोड़ती हैं.

पुलिस नेतृत्व पर भी उठे सवाल

इस मामले में ED ने सिर्फ मुख्यमंत्री पर ही नहीं, बल्कि राज्य पुलिस के शीर्ष अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. एजेंसी ने पश्चिम बंगाल के डीजीपी राजीव कुमार समेत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निलंबित करने की मांग करते हुए नई अर्जी दाखिल की है. ED का कहना है कि पुलिस नेतृत्व ने न सिर्फ छापों में बाधा डाली, बल्कि कथित तौर पर सबूत हटाने में भी मदद की. यह आरोप राज्य प्रशासन की भूमिका पर बड़े सवाल खड़े करता है.

धारा 17 PMLA का हवाला, फिर भी विरोध

ED ने कोर्ट को बताया कि छापेमारी पूरी तरह वैध थी और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 17 के तहत की गई थी. स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी भी दी गई थी. इसके बावजूद, ED का दावा है कि पुलिसकर्मी और राजनीतिक कार्यकर्ता छापों के दौरान धरने पर बैठ गए. इससे जांच एजेंसी के कामकाज में सीधा व्यवधान पड़ा और स्थिति असामान्य हो गई.

फोन छीना, फाइलें ले जाई गईं: ED का दावा

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने और भी गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने न सिर्फ फाइलें उठाईं, बल्कि एक ED अधिकारी का मोबाइल फोन भी अपने पास रख लिया. उनके शब्दों में, “यह चोरी है.” मेहता ने दलील दी कि अगर ऐसे मामलों में सख्त उदाहरण नहीं बनाया गया, तो राज्यों को लगेगा कि वे जांच एजेंसियों के साथ ऐसा व्यवहार कर सकते हैं.

SC से सख्ती की मांग, राजनीति गरमाई

ED ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह इस मामले में सख्त रुख अपनाए और एक मिसाल कायम करे. एजेंसी का तर्क है कि यदि ऐसी घटनाओं पर कड़ा संदेश नहीं गया, तो केंद्रीय एजेंसियों की स्वतंत्रता और प्रभावशीलता पर गंभीर असर पड़ेगा. वहीं, यह मामला अब सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक लड़ाई का रूप ले चुका है, जिस पर देशभर की नजरें टिकी हैं.

ममता बनर्जीसुप्रीम कोर्ट
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