Central Secretariat Club: जिमखाना के बाद अब 107 साल पुराने क्लब पर सरकारी हथौड़ा! 2.8 एकड़ जमीन का क्या होगा?
Central Secretariat Club Delhi: दिल्ली के 107 साल पुराने Central Secretariat Club पर सरकारी कार्रवाई के बाद 2.8 एकड़ जमीन चर्चा में है. जानिए क्लब क्यों हट रहा और जमीन का आगे क्या होगा.
दिल्ली के सत्ता-केंद्र के करीब एक ऐसा क्लब है, जिसकी कहानी सिर्फ खेल और मेल-जोल की नहीं, बल्कि नौकरशाही और दिल्ली के प्रभावशाली सरकारी हलकों की सामाजिक दुनिया से भी जुड़ी रही है. Gymkhana के बाद 1919 में बना Central Secretariat Club अब 107 साल बाद अपने सबसे बड़े संकट में है. करीब 2.8 एकड़ केंद्र सरकार की जमीन पर चल रहे इस क्लब की सरकारी मान्यता वापस हो चुकी है और जमीन का आवंटन भी रद्द कर दिया गया है. अब बेदखली की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है.
यानी Central Secretariat Club के मामले में सवाल सिर्फ यह नहीं कि क्लब बचेगा या नहीं. बड़ा सवाल यह है कि सरकार 2.8 एकड़ जमीन वापस लेकर क्या करेगी? क्या इसका कोई संबंध दिल्ली के तेजी से बदलते प्रशासनिक नक्शे और Central Vista के प्रोजेक्ट से है?
Central Secretariat Club आखिर क्यों हटाया जा रहा है?
केंद्र सरकार की कार्रवाई के पीछे केवल जमीन का मुद्दा नहीं बताया गया है. कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने क्लब में कथित नियम उल्लंघन, वित्तीय अनियमितताओं, जानकारी उपलब्ध नहीं कराने, सदस्यता सीमित रखने और प्रबंधन से जुड़ी दूसरी शिकायतों को आधार बनाया है. सरकार के अनुसार क्लब का मूल उद्देश्य केंद्रीय कर्मचारियों के कल्याण, मनोरंजन और सामाजिक मेल-जोल को बढ़ावा देना था, लेकिन समय के साथ वह उद्देश्य कमजोर पड़ा.
सरकारी आदेश के मुताबिक चुनाव न होने और क्लब के संचालन पर भी गंभीर सवाल उठाए गए. क्लब प्रबंधन ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया और सरकार पर जमीन वापस लेने की मंशा का आरोप लगाया. इसलिए विवाद का दूसरा पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है- क्या प्रशासनिक अनियमितताओं के कारण मान्यता वापस लेना और सरकारी जमीन का आवंटन रद्द करना उचित है?
Credit: State Mirror
अहम सवाल: 2.8 एकड़ जमीन किसकी?
इस सवाल का जवाब स्पष्ट है- जमीन केंद्र सरकार की है. सरकारी आदेश के मुताबिक क्लब 2.8 एकड़ केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली जमीन पर संचालित होता है. इसलिए यह मामला क्लब की निजी जमीन छिनने का नहीं, बल्कि सरकारी जमीन पर मिले आवंटन और उसके इस्तेमाल का है.
Directorate of Estates ने क्लब को आवंटित इस भूखंड को रद्द करने के बाद बेदखली की प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा है. क्लब प्रबंधन कानूनी चुनौती देने की तैयारी में है, इसलिए जमीन पर अंतिम कब्जे और आगे की कार्रवाई का रास्ता अदालत और प्रशासनिक प्रक्रिया से तय होगा.
107 साल के इतिहास में क्लब पर तालेबंदी की नौबत कैसे?
Central Secretariat Club की स्थापना 1919 में केंद्रीय कर्मचारियों के कल्याण, मनोरंजन और सामाजिक मेल-जोल के उद्देश्य से हुई थी. 1964 में उसे सरकारी मान्यता मिली, लेकिन विवादों के कारण 1971 में मान्यता वापस ली गई और 1972 में बहाल कर दी गई. 1983 में फिर मान्यता गई और दिसंबर 2005 में दोबारा बहाल हुई.
इसके बाद क्लब के प्रशासन और चुनाव को लेकर विवाद बढ़ता गया. सरकार के अनुसार, नियमित चुनावों में लंबे अंतराल के बाद 2024 में चुनी गई कार्यकारिणी का कार्यकाल 13 जुलाई 2025 को खत्म हो गया और उसके बाद नई वैध कार्यकारिणी नहीं बनी. फरवरी 2026 में सरकार ने मान्यता वापस ले ली. दिल्ली हाईकोर्ट की दखल के बाद क्लब को अपना पक्ष रखने का अवसर मिला, लेकिन तीन सदस्यीय समिति की समीक्षा के बाद जुलाई में सरकार ने अपना फैसला बरकरार रखा.
क्या सीएससी नौकरशाहों और प्रभावशाली लोगों का पुराना अड्डा था?
क्लब का मूल उद्देश्य केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के कल्याण और सामाजिक गतिविधियों से जुड़ा था. इसलिए इसकी सदस्यता और गतिविधियां लंबे समय से सरकारी कर्मचारियों के इर्द-गिर्द रही हैं. इसे दिल्ली की सरकारी सामाजिक संस्कृति से जोड़कर देखा जाता रहा है. हालांकि, इसे सीधे तौर पर “नौकरशाहों, राजनेताओं और कुबेरों का क्लब” कहना आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार सही नहीं कहा जा सकता.
ऐसा इसलिए कि सरकारी रिकॉर्ड में इसकी सदस्यता सेवारत और सेवानिवृत्त केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की बताई गई है; फरवरी 2026 के आदेश के अनुसार करीब 650 सदस्य थे.
Central Vista से इसका क्या कनेक्शन?
अभी ऐसा कोई आधिकारिक दस्तावेज सामने नहीं है जो Central Secretariat Club की 2.8 एकड़ जमीन को Central Vista की किसी घोषित इमारत या किसी परियोजना का जिक्र हो. Central Vista की पुनर्विकास योजना में Common Central Secretariat के 10 कार्यालय भवन और एक केंद्रीय सम्मेलन केंद्र प्रस्तावित हैं. सरकार की योजना सभी 51 केंद्रीय मंत्रालयों को एक स्थान पर लाने की है; अभी कई मंत्रालय अलग-अलग इमारतों में हैं.
Central Vista की आधिकारिक योजना मौजूदा केंद्रीय सचिवालय की कई इमारतों के पुनर्विकास पर आधारित है. ऐसे में दिल्ली के इस महत्वपूर्ण सरकारी क्षेत्र में सरकारी जमीन के इस्तेमाल को लेकर हर बदलाव पर सवाल उठना स्वाभाविक है.
सरकार ने फरवरी में क्या फैसला लिया था?
24 फरवरी 2026 को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने क्लब की मान्यता वापस लेने का आदेश जारी किया. इसमें क्लब के प्रशासन, चुनाव, कथित अनियमितताओं और मूल उद्देश्य से जुड़े सवालों का उल्लेख किया गया. उसी आदेश के आधार पर सरकारी संपदा निदेशालय को बेदखली की कार्रवाई शुरू करने के लिए कहा गया.
क्लब ने इस फैसले को चुनौती दी. दिल्ली हाईकोर्ट के 2 अप्रैल के निर्देश के बाद उसे अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया. तीन अधिकारियों की समिति ने क्लब की दलीलों की समीक्षा की और जुलाई में विभाग ने पहले का फैसला कायम रखा.
अब 2.8 एकड़ जमीन का क्या होगा?
फिलहाल यह जमीन सरकार के नियंत्रण में वापस लेने की प्रक्रिया में है, लेकिन उसके अगले उपयोग की स्पष्ट सार्वजनिक घोषणा सामने नहीं आई है.
असल सवाल अब क्लब से आगे बढ़कर सरकारी जमीन के भविष्य का है. दिल्ली के बेहद महत्वपूर्ण प्रशासनिक इलाके में मौजूद 2.8 एकड़ जमीन का इस्तेमाल सरकार किस उद्देश्य के लिए करेगी, यह आने वाले समय में तय होगा.
पूरे विवाद का असली सवाल क्या?
Central Secretariat Club की कहानी अब केवल 107 साल पुराने एक क्लब के बचने या हटने की कहानी नहीं रह गई है. एक तरफ सरकार सरकारी जमीन के बेहतर इस्तेमाल और प्रशासनिक व्यवस्था को आधुनिक बनाने पर जोर दे रही है; दूसरी तरफ क्लब प्रबंधन अपने अस्तित्व और जमीन के अधिकार को लेकर कानूनी लड़ाई की तैयारी में है.
फिलहाल तीन बातें साफ हैं- क्लब की सरकारी मान्यता वापस हो चुकी है, 2.8 एकड़ सरकारी जमीन का आवंटन रद्द हो चुका है और बेदखली की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है.
Central Secretariat Club का इतिहास
1919: केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के मनोरंजन, कल्याण और सामाजिक मेल-जोल के लिए Central Secretariat Club की स्थापना हुई.
1964: केंद्र सरकार ने क्लब को औपचारिक मान्यता देकर इसे सरकारी कर्मचारियों के कल्याण क्लब का दर्जा दिया.
1971: अनियमितताओं की शिकायतों के बाद सरकार ने पहली बार क्लब की मान्यता वापस ली.
1972: एक साल बाद सरकार ने क्लब की मान्यता दोबारा बहाल कर दी.
1983: क्लब से जुड़ी शिकायतों के बाद सरकार ने दूसरी बार इसकी मान्यता वापस ली.
2005: लंबे अंतराल के बाद दिसंबर 2005 में सरकार ने क्लब को फिर से मान्यता दे दी.
2013: क्लब की कार्यकारिणी के नियमित चुनाव हुए, जिसके बाद चुनाव प्रक्रिया को लेकर विवाद शुरू हुआ.
2023: 20 मार्च 2023 को सरकार ने क्लब का संचालन संभालने और चुनाव कराने के लिए अस्थायी प्रशासकीय समिति बनाई.
जुलाई 2023: क्लब में नई कार्यकारिणी का चुनाव हुआ, जिसका कार्यकाल एक साल तय किया गया.
13 जुलाई 2025: चुनी गई कार्यकारिणी का कार्यकाल समाप्त हुआ और इसके बाद नई नियमित कार्यकारिणी नहीं बन सकी.
24 फरवरी 2026: सरकार ने प्रशासनिक विवादों और कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए क्लब की मान्यता वापस ले ली.
2 अप्रैल 2026: दिल्ली हाईकोर्ट ने क्लब को अपना पक्ष रखने का अवसर देने का निर्देश दिया.
जुलाई 2026: समीक्षा समिति की रिपोर्ट के बाद सरकार ने क्लब की मान्यता वापस लेने का फैसला कायम रखा और सरकारी जमीन खाली कराने की कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ.




