China Dependency Report: मेड इन चाइना पर भारत की मजबूरी! किन 100 उत्पादों के लिए सबसे ज्यादा निर्भर है भारत?
China Dependency Report: जानिए भारत किन 100 प्रमुख उत्पादों के लिए अब भी चीन पर निर्भर है. इलेक्ट्रॉनिक्स, दवा, सोलर, ऑटो पार्ट्स और मशीनरी से जुड़ी पूरी रिपोर्ट.
सीमा पर तनाव, कारोबार में प्रतिस्पर्धा और आत्मनिर्भर भारत के बड़े अभियानों के बावजूद एक सच्चाई यह भी है कि भारत आज भी कई अहम औद्योगिक उत्पादों के लिए चीन पर काफी हद तक निर्भर है. मोबाइल फोन आज भले ही भारत में असेंबल हो रहे हों और रक्षा क्षेत्र में भी देश तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा हो, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स, दवा उद्योग, सोलर एनर्जी, केमिकल्स और मशीनरी जैसे कई रणनीतिक क्षेत्रों में चीन की हिस्सेदारी 50 से 90 प्रतिशत तक बनी हुई है. कई उत्पाद ऐसे हैं जिन भारत 50 से 70 प्रतिशत से ज्यादा मात्रा में आयात के चीन पर निर्भर है.
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, DPIIT, DGCIS, UN Comtrade और GTRI जैसी संस्थाओं के विश्लेषण के आधार पर सरकार ने ऐसे करीब 100 उत्पादों की पहचान की है, जिनका आयात कम करना राष्ट्रीय प्राथमिकता माना जा रहा है.
1. भारत किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा चीन पर निर्भर है?
इलेक्ट्रॉनिक्स: भारत की सबसे बड़ी निर्भरता
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में चीन पर सबसे अधिक निर्भर है. इंटीग्रेटेड सर्किट (IC), सेमीकंडक्टर चिप, माइक्रोप्रोसेसर, माइक्रोकंट्रोलर, प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB), मदरबोर्ड, LCD और OLED डिस्प्ले, टच स्क्रीन पैनल, कैमरा मॉड्यूल, लिथियम-आयन सेल, बैटरी पैक, चार्जिंग मॉड्यूल, USB फ्लैश ड्राइव, SSD, मेमोरी कार्ड, राउटर, मॉडेम, नेटवर्क स्विच, CCTV कैमरे, LED चिप, LED ड्राइवर, डायोड, ट्रांजिस्टर, रेजिस्टर, कैपेसिटर, इंडक्टर, कनेक्टर, कीबोर्ड, माउस, स्पीकर, हेडफोन, माइक्रोफोन, प्रिंटर पार्ट्स, लैपटॉप पार्ट्स, टैबलेट पार्ट्स, स्मार्टफोन डिस्प्ले, स्मार्टफोन बैटरी, स्मार्टफोन मदरबोर्ड और कैमरा सेंसर जैसे उत्पादों का बड़ा हिस्सा चीन से आयात किया जाता है.
दवा उद्योग: APIs के बिना मुश्किल
भारत दुनिया का बड़ा दवा निर्माता है, लेकिन दवाओं के कच्चे माल के लिए चीन पर काफी हद तक निर्भर है. पैरासिटामोल API, अमोक्सिसिलिन, एज़िथ्रोमाइसिन, पेनिसिलिन-जी, सेफैलोस्पोरिन, इबुप्रोफेन, एस्पिरिन, विटामिन-सी, विटामिन-बी12, विटामिन-बी6, साइट्रिक एसिड, सल्फामेथॉक्साजोल, Key Starting Materials (KSM), बल्क ड्रग इंटरमीडिएट्स, हार्मोन इंटरमीडिएट्स, एंटीबायोटिक, एंटीफंगल और एंटीवायरल इंटरमीडिएट्स सहित कई महत्वपूर्ण फार्मा केमिकल्स चीन से आयात किए जाते हैं.
सोलर और ग्रीन एनर्जी: आत्मनिर्भरता की चुनौती
भारत के सोलर मिशन की बड़ी जरूरतें अभी भी चीन से पूरी होती हैं. सिलिकॉन वेफर्स, सोलर सेल, सोलर PV मॉड्यूल, सोलर ग्लास, सोलर इनवर्टर, EVA शीट, बैकशीट, जंक्शन बॉक्स, सिल्वर पेस्ट और एल्यूमिनियम फ्रेम जैसे अधिकांश प्रमुख उत्पाद चीन से आते हैं. यही वजह है कि सौर ऊर्जा क्षेत्र में चीन की मजबूत पकड़ बनी हुई है.
ऑटो और भारी उद्योग: मशीनों की रीढ़
ऑटोमोबाइल और भारी उद्योगों में भी चीन का दबदबा है. EV मोटर, परमानेंट मैग्नेट, एक्सल, गियरबॉक्स, टर्बोचार्जर, रेडिएटर, स्टीयरिंग सिस्टम, ब्रेक पैड, क्लच प्लेट, अलॉय व्हील, बॉल बेयरिंग, गैस कंप्रेसर, CNC मशीन, इंजेक्शन मोल्डिंग मशीन, टेक्सटाइल वीविंग मशीन, औद्योगिक वाल्व, पंप, न्यूक्लियर रिएक्टर कंपोनेंट, मशीन टूल्स और करेंसी काउंटिंग मशीन जैसे कई उपकरणों का आयात चीन से किया जाता है.
केमिकल्स और मेडिकल उपकरण: रोजमर्रा से उद्योग तक असर
केमिकल और मेडिकल सेक्टर में भी भारत की निर्भरता कम नहीं है. PVC रेजिन, पॉलीप्रोपाइलीन, विनाइल क्लोराइड पॉलिमर, DAP, यूरिया, टाइटेनियम डाइऑक्साइड, कार्बन फाइबर, ग्लिसरॉल, डिजिटल थर्मामीटर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, ब्लड प्रेशर मॉनिटर, एक्स-रे ट्यूब, पेसमेकर के कंपोनेंट और अन्य मेडिकल उपकरण बड़ी मात्रा में चीन से आयात किए जाते हैं. इन्हीं क्षेत्रों में आयात घटाने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार PLI योजना और आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत तेजी से निवेश और विनिर्माण को बढ़ावा दे रही है.
2. सबसे ज्यादा आयात होने वाले प्रमुख उत्पाद कौन-कौन से हैं?
इलेक्ट्रॉनिक्स में इंटीग्रेटेड सर्किट (IC), माइक्रोप्रोसेसर, LCD और OLED डिस्प्ले, PCB, लिथियम-आयन सेल, मॉडेम, राउटर, SSD, मेमोरी कार्ड, USB फ्लैश ड्राइव, कैमरा मॉड्यूल, डायोड, ट्रांजिस्टर, CCTV कैमरे, कीबोर्ड, माउस, स्पीकर और हेडफोन प्रमुख हैं.
दवा उद्योग में पैरासिटामोल API, अमोक्सिसिलिन, एज़िथ्रोमाइसिन, पेनिसिलिन-जी, सेफैलोस्पोरिन, साइट्रिक एसिड, विटामिन B12, B6, विटामिन C, एस्पिरिन, इबुप्रोफेन और सल्फामेथॉक्साजोल का बड़ा हिस्सा चीन से आता है.
ऑटो सेक्टर में एक्सल, टर्बोचार्जर, गियरबॉक्स, EV मोटर, रेडिएटर, स्टीयरिंग सिस्टम, ब्रेक पैड, टायर और अलॉय व्हील भी आयात सूची में शामिल हैं.
3. सोलर, मशीनरी और केमिकल सेक्टर में चीन की पकड़ कितनी मजबूत?
भारत के सौर ऊर्जा मिशन की बड़ी जरूरतें अभी भी चीन पर टिकी हैं. सिलिकॉन वेफर्स, सोलर सेल, सोलर PV मॉड्यूल, सोलर इनवर्टर और सोलर ग्लास का बड़ा हिस्सा चीन से आता है. इसी तरह उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले गैस कंप्रेसर, बॉल बेयरिंग, CNC कटिंग मशीन, वाल्व, टेक्सटाइल वीविंग मशीन, इंजेक्शन मोल्डिंग मशीन, करेंसी काउंटिंग मशीन और न्यूक्लियर रिएक्टर के कुछ कंपोनेंट भी आयात किए जाते हैं.
केमिकल सेक्टर में PVC रेजिन, पॉलीप्रोपाइलीन, विनाइल क्लोराइड पॉलिमर, यूरिया, DAP, ग्लिसरॉल, हेट्रोसाइक्लिक कंपाउंड, टाइटेनियम डाइऑक्साइड और कार्बन फाइबर जैसी वस्तुओं में भी चीन की मजबूत हिस्सेदारी है.
4. मेडिकल डिवाइस और रोजमर्रा की चीजों में कितनी डिपेंडेंसी?
मेडिकल उपकरणों में डिजिटल थर्मामीटर, ब्लड प्रेशर मॉनिटर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, एक्स-रे ट्यूब, पेसमेकर के कंपोनेंट और ओजोन थेरेपी उपकरण भी बड़ी मात्रा में चीन से आते हैं. वहीं उपभोक्ता और धातु उत्पादों में एल्युमिनियम फॉयल, स्टेनलेस स्टील फ्लैंज, कांच की बोतलें और इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों के सर्किट जैसे उत्पाद भी चीन से आयात किए जाते हैं. यानी कई ऐसे उत्पाद, जो रोजमर्रा की जिंदगी से लेकर बड़े उद्योगों तक इस्तेमाल होते हैं, उनकी सप्लाई चेन में चीन की अहम भूमिका बनी हुई है.
5. सरकार निर्भरता को कम करने के लिए क्या कर रही है?
सरकार ने प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के जरिए मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर उपकरण और बल्क ड्रग्स का घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया है. DPIIT ने रणनीतिक रूप से ऐसे उत्पादों की अलग सूची तैयार की है, जिनमें एक्सल, मोटरसाइकिल के पुर्जे, कार्बन फाइबर और अन्य महत्वपूर्ण औद्योगिक कंपोनेंट शामिल हैं. इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने, घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन देने और आयात पर निर्भरता घटाने के लिए विशेष रियायतें दी जा रही हैं. यह पूरी पहचान वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, DPIIT, DGCIS, UN Comtrade के आयात आंकड़ों तथा GTRI, CII और FICCI जैसे उद्योग संगठनों के विश्लेषण पर आधारित है, जिनका उद्देश्य भारत की रणनीतिक औद्योगिक कमजोरियों को कम करना और देश को अधिक आत्मनिर्भर बनाना है.




