नेताजी के प्रपौत्र का अचानक क्यों हो गया दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी BJP से मोह भंग, Bengal की सियासत में कितने भारी है Chandra Kumar Bose?
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र Chandra Kumar Bose का कहना है कि बीजेपी ज्वाइन करना उनकी सबसे बड़ी गलती थी. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सांप्रदायिकता का मुकाबला सांप्रदायिकता से नहीं किया जा सकता.
Chandra Kumar Bose on BJP: स्वतंत्रता सेनानी Subhas Chandra Bose के प्रपौत्र Chandra Kumar Bose ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने को अपनी 'ऐतिहासिक गलती' बताया है. शुक्रवार को दिए गए एक बयान में उन्होंने कहा कि उन्हें यह बात 'देरी से नहीं, बल्कि समय रहते' समझ आ गई.
उन्होंने अपने बयान में साफ तौर पर कहा कि जिस पार्टी का मुख्य उद्देश्य चुनाव जीतने के लिए समाज में विभाजन और ध्रुवीकरण करना हो, उसका समर्थन नहीं किया जा सकता. उन्होंने यह भी जोर दिया कि सांप्रदायिकता का जवाब सांप्रदायिकता से नहीं दिया जा सकता और सभी समुदायों को एकजुट रहने की अपील की.
सोशल मीडिया पर क्या लिखा?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्होंने लिखा,"BJP में शामिल होना मेरी एक ऐतिहासिक गलती थी-लेकिन मुझे इसका एहसास देर से नहीं, बल्कि समय रहते हो गया. अगर किसी पार्टी का मकसद सिर्फ चुनाव जीतने के लिए लोगों के बीच नफरत और बंटवारा फैलाना है, तो मैं उसे स्वीकार नहीं कर सकता."
उन्होंने आगे लिखा,"सांप्रदायिकता का मुकाबला सांप्रदायिकता से नहीं किया जा सकता. हमें सभी समुदायों को साथ लेकर देश की बुनियादी व्यवस्था को बचाना होगा. देश को नुकसान पहुंचाने वाली विभाजनकारी ताकतों को हराने के लिए INDIA गठबंधन, कार्यकर्ताओं और आम लोगों को एकजुट होकर आगे आना होगा. जय हिंद!"
अचानक मोह भंग हुआ या पहला का है विवाद?
चंद्र कुमार बोस ने साल 2016 में BJP जॉइन की थी, लेकिन 2023 में उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने उस समय पार्टी अध्यक्ष JP Nadda को लिखे अपने पत्र में कहा था कि उनकी वैचारिक सोच और रणनीति को पार्टी के भीतर समर्थन नहीं मिला. इस पत्र की प्रतियां उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi और गृह मंत्री Amit Shah को भी भेजी थीं.
बोस ने बताया था कि वह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और विकास एजेंडे से प्रेरित होकर पार्टी में शामिल हुए थे. उनका मकसद नेताजी सुभाष चंद्र बोस की समावेशी विचारधारा को आगे बढ़ाना था, लेकिन उन्हें इसमें पार्टी का सहयोग नहीं मिला.
उन्होंने यह भी कहा था कि वह पार्टी के भीतर ‘आजाद हिंद मोर्चा’ बनाना चाहते थे, जिसका उद्देश्य धर्म, जाति और पंथ से ऊपर उठकर लोगों को जोड़ना था. हालांकि, उनके इस प्रस्ताव को न तो केंद्र स्तर पर और न ही पश्चिम बंगाल इकाई में कोई समर्थन मिला.
बोस ने यह भी आरोप लगाया था कि बंगाल के लिए उन्होंने जो खास रणनीति और प्रस्ताव तैयार किए थे, उन्हें भी नजरअंदाज कर दिया गया. ऐसे हालात में उन्होंने कहा कि पार्टी में बने रहना उनके लिए संभव नहीं रह गया था.
कौन हैं चंद्र कुमार बोस?
Chandra Kumar Bose, Amiya Nath Bose और Jyotsna Bose के पुत्र हैं. वह Sarat Chandra Bose के पोते और Subhas Chandra Bose (नेताजी) के प्रपौत्र हैं. उन्होंने यूनाइटेड किंगडम से जनरल सर्टिफिकेट ऑफ एजुकेशन हासिल किया. इसके बाद लंदन के हेंडन कॉलेज से इकोनॉमिक्स की पढ़ाई की. उन्होंने कोलकाता के IMM (इंस्टीट्यूट ऑफ मार्केटिंग मैनेजमेंट), जो वेस्ट बंगाल के इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से संबद्ध है, से बिजनेस मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया. इसके अलावा उन्होंने लंदन यूनिवर्सिटी के Birkbeck College में कानून (Law) का कोर्स भी किया.
कैसा रहा उनका करियर?
साल 1982 में उन्होंने Tata Steel में मैनेजमेंट ट्रेनी के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की. जमशेदपुर में ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्होंने मार्केटिंग और सेल्स डिवीजन में मार्केटिंग ऑफिसर के रूप में काम किया और बाद में एरिया सेल्स मैनेजर बने. उन्होंने दिसंबर 2000 तक, करीब 18 साल तक टाटा स्टील में काम किया.
इसके बाद उन्होंने कोलकाता में अपनी कंसल्टेंसी फर्म Bose Information & Technology Pvt Ltd शुरू की, जो ह्यूमन रिसोर्स और स्किल डेवलपमेंट के क्षेत्र में काम करती है. जर्मनी स्थित Bose Information Technology ने 1998 से IBM के साथ साझेदारी की है. जर्मनी (हैम्बर्ग) में यह कंपनी सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में विशेषज्ञता रखती है, जबकि कोलकाता में यह मानव संसाधन विकास और स्किल ट्रेनिंग पर काम करती है.
चंद्र कुमार बोस सामाजिक मुद्दों पर भी सक्रिय रहे हैं. वह Indian Socialist Democratic Forum (ISDF) से जुड़े हैं, जो भारत में मानवाधिकारों को लेकर जागरूकता अभियान चलाता है और अधिकारों के उल्लंघन के मामलों में लोगों की मदद करता है. वह Netaji Subhas Foundation से भी जुड़े रहे हैं, जो कोलकाता और लंदन से संचालित एक शोध संस्थान है और आज़ाद हिंद फौज तथा नेताजी सुभाष चंद्र बोस के इतिहास पर काम करता है.
चंद्र कुमार बोस ने भारत और विदेशों की कई यूनिवर्सिटीज़ में सेमिनार और बहसों में मुख्य वक्ता के रूप में हिस्सा लिया है. उन्होंने लंदन के नेहरू सेंटर में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के संदर्भ में युवाओं की भूमिका पर भी व्याख्यान दिया है.
राजनीति में कितना एक्टिव?
चंद्र कुमार बोस ने जनवरी 2016 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) जॉइन की और उन्हें पश्चिम बंगाल इकाई का उपाध्यक्ष बनाया गया. वह 58 वर्ष के हैं और 2016 के विधानसभा चुनाव में भवानीपुर सीट से BJP के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव भी लड़ चुके हैं.




