बंगाल की राजनीति में संदेशखाली की वापसी, मूसा मोल्ला बड़ी चुनौती, पकड़ने गई पुलिस पर हमला, क्या है पूरा मामला
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 से पहले नॉर्थ 24 परगना क्षेत्र में स्थित संदेशखाली एक बार फिर सियासी और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का केंद्र बन गया है. फरार आरोपी मूसा मोल्ला को पकड़ने गई पुलिस टीम पर हमले के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया है. फिलहाल, पुलिस मूसा मोल्ला की तलाश में जुटी है. जानें क्यों शेख शाहजहां के चेले मूसा मोल्ला की तलाश में पुलिस जुटी है?
पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव से नॉर्थ 24 परगना जिले के संदेशखाली एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है. लंबे समय से फरार चल रहे मूसा मोल्ला को पकड़ने पहुंची पुलिस टीम पर कथित तौर पर हमला किया गया, जिसके बाद पूरे इलाके में भारी तनाव का माहौल है. इस घटना ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं बल्कि चुनाव से पहले राजनीतिक दलों को भी एक नया मुद्दा दे दिया है.
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मूसा मोल्ला को गिरफ्तार करने गई थी पुलिस
दरअसल, संदेशखाली में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एक कार्यकर्ता को गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस पर उग्र भीड़ ने हमला कर दिया. इसमें एक अधिकारी समेत 6 पुलिसकर्मी घायल हो गए. इस मामले में पुलिस ने 9 लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस की टीम पर हमला करने के मुख्य आरोपी मूसा मोल्ला की गिरफ्तारी के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है.
पुलिस ने बताया है कि उत्तर 24 परगना के नजात थाने की एक टीम मत्स्य पालन के लिए जल निकायों और भूमि पर कथित तौर पर अवैध कब्जा करने वाले मूसा मोल्ला को गिरफ्तार करने के लिए शुक्रवार की रात संदेशखाली ब्लॉक के बोयरमारी गांव गई थी. मोल्ला को हिरासत में लेकर पुलिस वाहन में बैठाने लगी, तो टीएमसी के समर्थकों ने कार को घेर लिया और पुलिस टीम पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए.
इस बीच भीड़ का फायदा उठाकर फरार हो गया मूसा मोल्ला उग्र भीड़ का फायदा उठाकर मोल्ला वहां से फरार हो गया. पुलिस का कहना है कि मूसा मोल्ला को जमीन विवाद मामले में कई बार नोटिस भेजा गया, लेकिन उसने उन्हें नजरअंदाज कर दिया. खेती योग्य भूमि में खारा पानी भरने की शिकायतों के बाद, बशीरहाट उपमंडल अदालत ने विवादित संपत्ति पर निषेधाज्ञा लागू कर दी थी.
पूरा मामला क्या है?
संदेशखाली इलाके में मूसा मोल्ला पर लंबे समय से गंभीर आरोप लगे हुए हैं. पुलिस के मुताबिक मूसा मोल्ला कई मामलों में वांछित है और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. इसी कड़ी में जब पुलिस टीम इलाके में छापेमारी के लिए पहुंची, तो हालात बिगड़ गए.
चुनाव से पहले चर्चा में संदेशखाली?
संदेशखाली पहले भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का बड़ा केंद्र रहा है. अब जब 2026 का विधानसभा चुनाव नजदीक है, ऐसे में यह इलाका फिर से सियासी रणनीति का अहम हिस्सा बनता दिख रहा है. विपक्ष इस मुद्दे को कानून-व्यवस्था से जोड़कर सरकार पर हमला कर सकता है, जबकि सत्तारूढ़ दल इसे प्रशासनिक कार्रवाई बता रहा है.
मूसा मोल्ला चुनौती क्यों ?
पुलिस के लिए मूसा मोल्ला की गिरफ्तारी बड़ी चुनौती बनी हुई है. बताया जा रहा है कि उसे स्थानीय स्तर पर समर्थन प्राप्त है, जिससे कार्रवाई में दिक्कतें आ रही हैं. पुलिस लगातार दबिश दे रही है और इलाके पर नजर बनाए हुए है. पुलिस प्रशासन ने साफ किया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और मूसा मोल्ला की गिरफ्तारी के लिए अभियान जारी रहेगा. वहीं, राजनीतिक गलियारों में संदेशखाली को लेकर बयानबाजी तेज होने के आसार हैं.
टीएमसी की हताशा और दुस्साहस
भाजपा नेता सजल घोष ने घटना के बाद कहा कि हमला ममता बनर्जी की सरकार में सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ताओं की ‘हताशा और दुस्साहस’ का प्रतीक है. पहले केंद्रीय एजेंसियों पर हमले हुए और अब राज्य पुलिस पर हमले हो रहे हैं.
घटना से TMC ने खुद को अलग
तृणमूल ने इस घटना से खुद को अलग करने की कोशिश की है. पार्टी प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने हमले को ‘निंदनीय’ करार दिया. कहा कि पार्टी ऐसे कृत्यों का समर्थन नहीं करती. उन्होंने कहा कि पुलिस अपना कर्तव्य निभा रही है. वे जो भी कार्रवाई करेंगे, पार्टी उसका समर्थन करेगी.





