Bengal की सबसे गरीब कैंडिडेट? जेब में सिर्फ 500 रुपये, फिर भी चुनावी मैदान में रुबिया बेगम, क्या है अनसुनी कहानी?
सिर्फ 500 रुपये की संपत्ति वाली रुबिया बेगम बंगाल चुनाव 2026 की सबसे गरीब उम्मीदवार हैं. जानिए उनकी जिंदगी, संघर्ष और चुनाव लड़ने की पूरी कहानी.
पश्चिम बंगाल की 294 में से 152 सीटों पर सुबह सात बजे से मतदान जारी है, लेकिन सुर्खियों में वहां के सबसे गरीब उम्मीदवार रुबिया बेगम. उनके जेब में सिर्फ 500 रुपये, फिर भी चुनावी मैदान में रुबिया बेगम. क्या है रुबिया की अनसुनी कहानी? यह जानना सभी के लिए इसलिए भी जरूरी है कि पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में जहां एक तरफ करोड़ों की संपत्ति वाले उम्मीदवार चर्चा में हैं. वहीं दूसरी ओर Rubia Begum का नाम सिर्फ 500 रुपये की संपत्ति होने की वजह से सुर्खियों में है. इतना ही नहीं, उनकी कोई नियमित आय नहीं और कोई देनदारी भी नहीं है. फिर भी उन्होंने चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया है. यह कहानी सिर्फ एक उम्मीदवार की नहीं, बल्कि उस लोकतंत्र की भी है जहां सीमित संसाधनों वाला व्यक्ति भी अपनी आवाज उठा सकता है.
कौन हैं रुबिया बेगम?
Rubia Begum साधारण पृष्ठभूमि से आने वाली महिला हैं, जो ग्रामीण इलाके में रहती हैं और लंबे समय से स्थानीय लोगों के बीच जुड़ी रही हैं. उनकी पहचान किसी बड़े राजनीतिक चेहरे के रूप में नहीं, बल्कि आम लोगों के मुद्दों को समझने वाली महिला के तौर पर बनी है. वे सामाजिक तौर पर सक्रिय रही हैं और इलाके के छोटे-छोटे मसलों जैसे राशन, पानी और स्थानीय सुविधाओं को लेकर आवाज उठाती रही हैं. यही वजह है कि सीमित संसाधनों के बावजूद उन्हें चुनाव लड़ने का मौका मिला.
किस पार्टी से लड़ रहीं चुनाव?
रुबिया बेगम, ममता बनर्जी के करीबी से धुर विरोधी बने हुमायूं कबीर की Aam Janata Unnayan party की उम्मीदवार हैं. यह पार्टी खुद को जमीनी स्तर की राजनीति और वंचित वर्गों की आवाज बताती है. रुबिया की उम्मीदवारी को भी उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें आम और गरीब तबके को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की जा रही है.
500 रुपये की संपत्ति: क्या कहता है हलफनामा?
रुबिया बेगम ने अपने चुनावी हलफनामे में कुल संपत्ति मात्र 500 रुपये बताई है. उनके पास कोई जमीन-जायदाद नहीं है, न ही बैंक बैलेंस के रूप में बड़ी रकम है. सबसे खास बात यह है कि उनकी कोई नियमित आय नहीं है और उन्होंने किसी प्रकार का कर्ज भी नहीं लिया है. ऐसे समय में जब चुनावों में करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, उनका यह आंकड़ा लोगों को चौंका रहा है.
क्यों लिया चुनाव लड़ने का फैसला?
रुबिया बेगम का चुनाव लड़ना सिर्फ एक राजनीतिक कदम नहीं, बल्कि एक संदेश भी माना जा रहा है. उनका मानना है कि आम लोगों की समस्याएं वही बेहतर समझ सकता है, जो खुद उन परिस्थितियों से गुजरता हो. स्थानीय स्तर पर उनकी सक्रियता और लोगों के बीच भरोसे ने उन्हें यह हिम्मत दी कि वे चुनावी मैदान में उतरें. उनकी उम्मीदवारी यह दिखाती है कि राजनीति में सिर्फ पैसा ही नहीं, बल्कि जमीनी जुड़ाव भी मायने रखता है.
क्या करते हैं बेगम के पति?
रुबिया बेगम के पति दिहाड़ी मजदूर हैं, जो अस्थायी काम करके परिवार चलाते हैं. उनकी आय निश्चित नहीं है और परिवार को अक्सर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे हालात में चुनाव लड़ने का फैसला आसान नहीं था, लेकिन परिवार ने उनका साथ दिया. यही संघर्ष उनकी कहानी को और ज्यादा मजबूत बनाता है.
चुनावी असर और बड़ा सवाल
रुबिया बेगम की उम्मीदवारी ने चुनावी बहस को एक नया मोड़ दे दिया है. जहां एक ओर पैसे और संसाधनों की ताकत दिखती है, वहीं दूसरी ओर उनका उदाहरण यह सवाल उठाता है कि क्या लोकतंत्र में बराबरी की हिस्सेदारी सच में संभव है. भले ही वे चुनाव जीतें या नहीं, लेकिन उनकी मौजूदगी यह जरूर साबित करती है कि लोकतंत्र में हर आवाज की अहमियत है.
दरअसल, रुबिया बेगम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में दुर्गापुर पुर्बा से Aam Janata Unnayan party के उम्मीदवार हैं. इस सीट पर सुबह से मतदान जारी है. 33 साल के Rubiya Begam दसवीं पास है. उनके खिलाफ zero आपराधिक रिकॉर्ड है. उनकी कुल संपत्ति Rs 500 है, जिसमें Rs 500 की चल संपत्ति और Rs 0 की अचल संपत्ति है. उनकी Rs 0 देनदारी है. वह House wife हैं.




